नरसिंहपुर लूट कांड: होटल मैनेजर ने ही रची थी 1 करोड़ की साजिश, ऐसे हुआ पर्दाफाश
नरसिंहपुर पुलिस ने होटल कुसुम वैली में हुई एक करोड़ की सनसनीखेज लूट का पर्दाफाश करते हुए मैनेजर सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर 60 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।
Narsinghpur Crime News : मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में बीती रात एक ऐसी वारदात हुई जिसने शहर के अमन-चैन को कुछ घंटों के लिए हिला कर रख दिया। नरसिंहपुर नगर के बीचों-बीच स्थित होटल कुसुम वैली में तड़के तीन बजे जब पूरी दुनिया गहरी नींद में थी, तब कुछ नकाबपोश बदमाशों ने एक बड़ी लूट को अंजाम दिया।
शुरुआती खबर मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया क्योंकि मामला लगभग एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी से जुड़ा था। पुलिस के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि लुटेरों ने बड़े ही शातिर तरीके से अपना चेहरा छिपा रखा था। लेकिन नरसिंहपुर पुलिस की मुस्तैदी और बारीकी से की गई जांच ने महज कुछ ही घंटों के भीतर इस पूरी साजिश की परतों को उधेड़ कर रख दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस व्यक्ति पर होटल की सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी थी, वही इस पूरी वारदात का सूत्रधार निकला।
आधी रात का वो खौफनाक मंजर
घटना मंगलवार तड़के करीब 3:00 बजे की है। होटल कुसुम वैली के स्टाफ ने घबराए हुए स्वर में पुलिस को सूचना दी कि तीन से चार नकाबपोश लोग होटल के अंदर जबरन घुस आए हैं। इन बदमाशों ने वहां मौजूद कर्मचारियों को डराया-धमकाया और होटल के लॉकर या सुरक्षित स्थान पर रखी लगभग एक करोड़ रुपये की नकदी लेकर फरार हो गए।
इतनी बड़ी रकम की लूट की खबर आग की तरह फैली। सूचना मिलते ही पुलिस विभाग के आला अधिकारी सक्रिय हो गए। पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना खुद घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उनके साथ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया और एसडीओपी मनोज गुप्ता भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने तुरंत मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया ताकि आरोपियों को शहर छोड़ने से पहले ही दबोचा जा सके।
पुलिस की पैनी नजर और मैनेजर का संदिग्ध व्यवहार
जांच टीम ने जब होटल के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली और वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, तो उन्हें कुछ बातें खटकने लगीं। पुलिस की अनुभवी नजरों ने भांप लिया था कि बाहर से आए लुटेरों के लिए होटल के भीतर नकदी के सटीक स्थान तक पहुंचना इतना आसान नहीं था।

जांच के दौरान रात्रिकालीन मैनेजर चंद्रेश रजक की गतिविधियों ने पुलिस का ध्यान अपनी ओर खींचा। जब उससे सामान्य पूछताछ की गई, तो उसके बयानों में काफी विरोधाभास नजर आया। वह बार-बार अपनी बातों से पलट रहा था और उसके चेहरे पर घबराहट साफ देखी जा सकती थी।
पुलिस ने जब तकनीकी साक्ष्यों और मैनेजर के फोन रिकॉर्ड्स की जांच की, तो शक यकीन में बदल गया। कड़ाई से पूछताछ करने पर चंद्रेश रजक टूट गया और उसने वह सच उगल दिया जिसने सबको हैरान कर दिया।
लालच, साजिश और वफादारी का कत्ल
चंद्रेश रजक काफी समय से होटल में मैनेजर के पद पर तैनात था और उसे इस बात की पूरी जानकारी थी कि होटल में भारी मात्रा में नकदी रखी हुई है। इतनी बड़ी रकम देखकर उसके मन में लालच आ गया। उसने अपने कुछ पुराने परिचितों के साथ मिलकर इस लूट की पटकथा लिखी।
चंद्रेश ने अनुज और राकेश शुक्ला नाम के व्यक्तियों को होटल की पूरी जानकारी साझा की। राकेश और अनुज मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के रहने वाले हैं लेकिन फिलहाल नरसिंहपुर में ही रह रहे थे। इन लोगों ने मिलकर मोनू उर्फ टुईया बंशकार और अन्य साथियों को इस गैंग में शामिल किया।
योजना यह थी कि आधी रात को जब होटल में चहल-पहल कम होगी, तब नकाब पहनकर लूट की जाएगी ताकि किसी को शक न हो और सीसीटीवी में पहचान भी न हो सके।
पुलिस का एक्शन और गिरफ्तारी का घटनाक्रम
जैसे ही मास्टरमाइंड मैनेजर का नाम सामने आया, पुलिस ने एक के बाद एक कड़ियाँ जोड़नी शुरू कर दीं। पुलिस टीमों ने घेराबंदी करते हुए दबिश दी और चारों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों में मैनेजर चंद्रेश रजक (निवासी यादव कॉलोनी, नरसिंहपुर), राकेश कुमार शुक्ला, अनुज कुमार वाल्मीकि और मोनू उर्फ टुईया बंशकार शामिल हैं।
पुलिस ने इनके पास से लूटी गई राशि का एक बड़ा हिस्सा बरामद करने में सफलता हासिल की है। आरोपियों के पास से अब तक कुल 60 लाख रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं। बरामदगी का विवरण भी काफी दिलचस्प है, जिसमें मोनू के पास से अकेले 45 लाख रुपये मिले, जबकि अनुज से 10 लाख और चंद्रेश व राकेश से ढाई-ढाई लाख रुपये बरामद हुए। शेष राशि की तलाश और अन्य संभावित मददगारों के बारे में पुलिस अभी भी पूछताछ कर रही है।













