James Webb ने बदली ब्रह्मांड की कहानी, अब तक की सबसे दूर गैलेक्सी की खोज
James Webb Space Telescope की नई खोज ने बिग बैंग के बाद बने शुरुआती ब्रह्मांड की झलक दिखाई और गैलेक्सी निर्माण को लेकर वैज्ञानिक समझ को नया मोड़ दिया।
James Webb Space Telescope : जब इंसान आसमान की तरफ देखता है, तो वह सिर्फ तारों को नहीं, बल्कि अपने अतीत को भी देख रहा होता है। अब इसी अतीत की एक बेहद पुरानी झलक NASA के James Webb Space Telescope ने दिखा दी है। वैज्ञानिकों ने अब तक की सबसे दूर स्थित गैलेक्सी को पहचानने का दावा किया है, जो बिग बैंग के कुछ ही करोड़ साल बाद मौजूद थी। इस खोज ने ब्रह्मांड की शुरुआती कहानी को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम जोड़ दिया है और कई पुरानी धारणाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
NASA के मुताबिक, इस गैलेक्सी का नाम MoM-z14 रखा गया है। यह गैलेक्सी उस समय की है, जब ब्रह्मांड अपनी शैशव अवस्था में था और पहली बार तारे व गैलेक्सियां आकार लेना शुरू कर रही थीं। इस दौर को वैज्ञानिक ‘कॉस्मिक डॉन’ कहते हैं। James Webb के डेटा से पता चलता है कि MoM-z14 बिग बैंग के लगभग 20.8 करोड़ साल बाद मौजूद थी। इसकी रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने में करीब 13.5 अरब साल लगे हैं, यानी हम आज जो देख रहे हैं, वह अरबों साल पुराना दृश्य है।
यह खोज अप्रैल 2025 में James Webb Space Telescope द्वारा जुटाए गए डेटा पर आधारित है। Webb टेलीस्कोप को खास तौर पर इसी काम के लिए डिजाइन किया गया है कि वह बेहद दूर और बेहद पुरानी वस्तुओं को इंफ्रारेड रोशनी में देख सके। यही वजह है कि वैज्ञानिक अब उस ब्रह्मांड को भी देख पा रहे हैं, जो पहले पूरी तरह अंधेरे में छिपा हुआ था।
इस रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि शुरुआती ब्रह्मांड उनकी उम्मीदों से बिल्कुल अलग नजर आ रहा है। MIT से जुड़े वैज्ञानिक रोहन नायडू के अनुसार, जो तस्वीर अब सामने आ रही है, वह पुराने सैद्धांतिक मॉडल से मेल नहीं खाती। पहले माना जाता था कि शुरुआती गैलेक्सियां बहुत छोटी, धुंधली और कम विकसित होंगी। लेकिन MoM-z14 इन सभी अनुमानों को चुनौती देती है।
NASA के अनुसार, यह गैलेक्सी उम्मीद से ज्यादा चमकदार है, आकार में कॉम्पैक्ट है और रासायनिक रूप से भी काफी विकसित दिखती है। इसमें नाइट्रोजन जैसे भारी तत्वों की मात्रा भी ज्यादा पाई गई है। इसका मतलब यह है कि उस समय बड़े और भारी तारे बहुत तेजी से बने और उन्होंने कम समय में ही अपने आसपास के वातावरण को बदल दिया। वैज्ञानिकों के लिए यह बात इसलिए भी अहम है, क्योंकि भारी तत्व आमतौर पर कई पीढ़ियों के तारों के बनने और खत्म होने के बाद बनते हैं।
MoM-z14 को लेकर एक और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस गैलेक्सी ने अपने आसपास मौजूद प्राचीन हाइड्रोजन गैस को काफी हद तक साफ कर दिया था। शुरुआती ब्रह्मांड में हर तरफ न्यूट्रल हाइड्रोजन फैली हुई थी, जो रोशनी को रोक देती थी। इसी वजह से उस दौर को लंबे समय तक “कॉस्मिक डार्क एज” कहा जाता रहा। लेकिन इस गैलेक्सी के आसपास हाइड्रोजन की कमी यह संकेत देती है कि तारे बहुत तेजी से बने और उन्होंने अपने आसपास के क्षेत्र को आयनाइज कर दिया।
James Webb के लॉन्च से पहले वैज्ञानिकों को लगता था कि रेडशिफ्ट 10 से आगे की गैलेक्सियों को देख पाना बेहद कठिन होगा। रेडशिफ्ट का मतलब है कि कोई वस्तु हमसे कितनी दूर और कितनी पुरानी है। उस समय यह माना जाता था कि इतनी शुरुआती गैलेक्सियां बहुत कम होंगी और उन्हें पहचानने के लिए महीनों या सालों तक ऑब्जर्वेशन करना पड़ेगा। लेकिन Webb टेलीस्कोप ने इन आशंकाओं को गलत साबित कर दिया।
अब तक James Webb Space Telescope दर्जनों ऐसी गैलेक्सियां देख चुका है, जो बिग बैंग के कुछ सौ मिलियन साल बाद मौजूद थीं। MoM-z14 इनमें सबसे दूर और सबसे पुरानी गैलेक्सियों में से एक मानी जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जैसे-जैसे Webb और ज्यादा डेटा इकट्ठा करेगा, वैसे-वैसे ब्रह्मांड की शुरुआती कहानी और साफ होती जाएगी।
NASA का कहना है कि यह समय ब्रह्मांड को समझने के लिए बेहद खास है। पहली बार इंसान उस दौर को सीधे देख पा रहा है, जब तारे जन्म ले रहे थे और गैलेक्सियां बननी शुरू हुई थीं। यह खोज सिर्फ एक नई गैलेक्सी की पहचान नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि ब्रह्मांड हमारी सोच से कहीं ज्यादा तेज़ी से विकसित हुआ।
आने वाले सालों में James Webb से और भी ऐसी खोजों की उम्मीद की जा रही है, जो ब्रह्मांड की शुरुआत, तारों के निर्माण और गैलेक्सियों के विकास को नए नजरिए से समझने में मदद करेंगी। MoM-z14 जैसी गैलेक्सियां यह बताती हैं कि ब्रह्मांड की कहानी अभी पूरी तरह लिखी नहीं गई है, और हर नई खोज हमें अपने अस्तित्व के मूल सवालों के थोड़ा और करीब ले जाती है।












