बजट सत्र से पहले MP सरकार ने फिर लिया 5,000 करोड़ का कर्ज, कुल उधारी 67,300 करोड़ पार
Madhya Pradesh government loan : मध्य प्रदेश में विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने से ठीक पहले राज्य सरकार ने बाजार से 5,000 करोड़ रुपये का नया कर्ज उठाया है। पिछले सात दिनों के भीतर यह दूसरी बार है जब सरकार ने उधारी ली है। इससे पहले फरवरी की शुरुआत में भी हजारों करोड़ रुपये जुटाए गए थे। ऐसे समय में लगातार कर्ज लेने के फैसले ने वित्तीय प्रबंधन और आगामी बजट को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
बजट सत्र से पहले बढ़ी उधारी
राज्य का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू हो रहा है और 18 फरवरी को वित्त मंत्री द्वारा बजट पेश किया जाएगा। इसी बीच सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से तीन अलग-अलग हिस्सों में 5,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह रकम खुले बाजार से राज्य विकास ऋण के रूप में ली जाती है, जहां बैंक और वित्तीय संस्थाएं निवेश करती हैं।
इस नए कर्ज के साथ ही चालू वित्त वर्ष में राज्य द्वारा लिया गया कुल कर्ज 67,300 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। एक हफ्ते में दूसरी बार उधारी से यह संकेत मिलता है कि सरकार को अपने खर्चों और परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है।
तीन हिस्सों में लिया गया कर्ज
हाल में उठाई गई राशि तीन अलग-अलग अवधियों के लिए है। दो हिस्से 2,000-2,000 करोड़ रुपये के हैं, जिनकी अवधि 21 वर्ष और 16 वर्ष तय की गई है। तीसरा हिस्सा 1,000 करोड़ रुपये का है, जिसकी अवधि 8 वर्ष रखी गई है। इन कर्जों पर ब्याज का भुगतान हर छह महीने में किया जाएगा।
लंबी अवधि वाले कर्ज आमतौर पर बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए लिए जाते हैं, ताकि एक बार में पूरा बोझ न आए और भुगतान लंबे समय में फैल सके। कम अवधि वाला कर्ज नकदी प्रबंधन या जल्दी पूरी होने वाली योजनाओं के लिए उपयोग में लाया जाता है।
इस वित्त वर्ष में कितनी बार लिया गया कर्ज
वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक सरकार 36 बार बाजार से उधारी ले चुकी है। जनवरी के अंत तक 30 बार कर्ज लिया जा चुका था। फरवरी के पहले दस दिनों में ही छह नई उधारियां जोड़ दी गईं। इससे पहले 3 फरवरी को भी तीन हिस्सों में हजारों करोड़ रुपये जुटाए गए थे।
यदि पूरे साल के आंकड़ों को देखें तो मई से लेकर अब तक लगभग हर महीने सरकार ने अलग-अलग चरणों में कर्ज लिया है। शुरुआती महीनों में 2,000 से 2,500 करोड़ रुपये की किश्तें ली गईं। जुलाई, अगस्त और सितंबर में कई राउंड में उधारी हुई, जिनमें एक-एक महीने में चार से सात बार तक कर्ज उठाया गया। अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में भी हजारों करोड़ रुपये बाजार से जुटाए गए। जनवरी और फरवरी में यह रफ्तार और तेज दिखाई दी।
कर्ज की जरूरत क्यों पड़ी
सरकार का कहना है कि यह धन कृषि योजनाओं, सिंचाई परियोजनाओं, बिजली से जुड़ी योजनाओं और सामुदायिक विकास कार्यों के लिए उपयोग में लाया जाएगा। स्थायी निर्माण कार्यों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च के लिए आमतौर पर बड़ी पूंजी की जरूरत होती है, जिसे केवल कर संग्रह से तुरंत पूरा करना संभव नहीं होता।
राज्य सरकारें अपने राजस्व और पूंजीगत खर्च के बीच संतुलन बनाने के लिए बाजार से उधार लेती हैं। यदि पूंजीगत निवेश बढ़ाया जाता है तो सड़क, बिजली, सिंचाई और अन्य बुनियादी ढांचे के जरिए लंबे समय में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, लगातार बढ़ती उधारी भविष्य में ब्याज भुगतान का दबाव भी बढ़ाती है।
बजट से पहले संकेत क्या हैं
बजट से ठीक पहले इतनी बड़ी राशि जुटाना इस बात का संकेत हो सकता है कि सरकार आगामी वित्त वर्ष के लिए बड़े खर्च या नई योजनाओं की तैयारी कर रही है। हाल ही में कैबिनेट के सामने प्रस्तावित बजट का प्रस्तुतीकरण किया गया है। ऐसे में यह कर्ज अल्पकालिक नकदी प्रबंधन के साथ-साथ पूंजीगत परियोजनाओं को गति देने के लिए भी हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उधारी का उपयोग उत्पादक और आय बढ़ाने वाली परियोजनाओं में किया जाए तो इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को फायदा होता है। लेकिन यदि राजस्व व्यय का हिस्सा ज्यादा हो, तो दीर्घकाल में वित्तीय संतुलन प्रभावित हो सकता है।
राज्य की वित्तीय स्थिति पर नजर
67,300 करोड़ रुपये की उधारी का आंकड़ा अपने आप में बड़ा है, लेकिन इसे राज्य के सकल घरेलू उत्पाद और कुल बजट आकार के संदर्भ में देखना जरूरी होता है। हर राज्य को वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन कानून के तहत तय सीमा में रहकर ही कर्ज लेने की अनुमति होती है। आमतौर पर यह सीमा राज्य की जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में तय की जाती है।
मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं के लिए लगातार निवेश की जरूरत होती है। ऐसे में बाजार से संसाधन जुटाना एक सामान्य प्रक्रिया है। फिर भी, बजट सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा इस बढ़ती उधारी पर सवाल उठाए जाने की संभावना है
अब नजर 18 फरवरी को पेश होने वाले बजट पर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार कुल राजस्व, पूंजीगत खर्च और घाटे को किस तरह संतुलित करती है। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि लिए गए कर्ज का कितना हिस्सा विकास परियोजनाओं में लगाया जाएगा और कितना हिस्सा पुराने दायित्वों के भुगतान में जाएगा।













