AI Fake Video : जबलपुर की पहचान ‘बैलेंसिंग रॉक’ को लेकर वायरल वीडियो ने मचाई हलचल, जांच में निकला एआई का खेल
AI Fake Video : जबलपुर की मशहूर बैलेंसिंग रॉक को लेकर सोशल मीडिया पर हाल ही में ऐसा वीडियो फैलाया गया, जिसने कई लोगों को चौंका दिया। वीडियो में दावा किया गया कि शहर की पहचान मानी जाने वाली यह ऐतिहासिक चट्टान गिर गई है। इसके साथ ही सनसनीखेज अंदाज में यह संदेश भी जोड़ा गया कि साल 2026 में दुनिया खत्म होने वाली है। कुछ ही घंटों में यह वीडियो अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर तेजी से शेयर होने लगा और लोगों के बीच भ्रम और डर फैलने लगा।
लेकिन जब पुलिस ने मामले की पड़ताल की, तो सच्चाई सामने आई। जांच में पता चला कि यह वीडियो असली नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से तैयार किया गया था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर वीडियो बनाने और अपलोड करने वालों की पहचान शुरू कर दी है।
क्या है बैलेंसिंग रॉक और क्यों है खास
जबलपुर का बैलेंसिंग रॉक शहर की सबसे प्रसिद्ध प्राकृतिक धरोहरों में गिना जाता है। यह मदन महल क्षेत्र में स्थित है और एक बड़ी चट्टान दूसरी चट्टान के ऊपर संतुलित अवस्था में टिकी हुई दिखाई देती है। देखने में ऐसा लगता है जैसे हल्का सा धक्का लगे तो यह गिर जाएगी, लेकिन दशकों से यह मजबूती से जमी हुई है।
भूवैज्ञानिकों के अनुसार यह संरचना प्राकृतिक क्षरण और भूगर्भीय बदलावों का परिणाम है। दिलचस्प बात यह है कि 1997 में आए भूकंप के दौरान भी यह चट्टान नहीं गिरी थी। इसी कारण यह स्थानीय लोगों के लिए गर्व और जिज्ञासा का विषय रही है। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक इसे देखने पहुंचते हैं।
ऐसी ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर से जुड़ा फर्जी वीडियो लोगों की भावनाओं को सीधे प्रभावित करता है। यही वजह है कि यह मामला केवल एक वायरल पोस्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानून-व्यवस्था का विषय बन गया।
कैसे फैला फर्जी वीडियो
7 जनवरी को एक सोशल मीडिया ग्रुप से यह वीडियो पोस्ट किया गया। वीडियो में एडिटिंग के जरिए दिखाया गया कि बैलेंसिंग रॉक अचानक गिर जाती है और आसपास अफरा-तफरी मच जाती है। इसके साथ डर पैदा करने वाला संदेश जोड़ा गया कि यह किसी बड़े विनाश का संकेत है और 2026 में दुनिया खत्म हो जाएगी।
कुछ यूजर्स ने इसे सच मानकर आगे शेयर कर दिया। कई लोगों ने चिंता जताई, तो कुछ ने शहर की सुरक्षा और प्रशासन पर सवाल उठाए। देखते ही देखते वीडियो हजारों व्यूज और शेयर हासिल कर गया।
हालांकि कुछ सतर्क नागरिकों ने वीडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए और प्रशासन को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की।
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
यह पहला मामला नहीं है जब जबलपुर में एआई की मदद से भ्रामक वीडियो बनाया गया हो। इससे पहले एक कॉलेज छात्र ने रेलवे स्टेशन पर हवाई जहाज उतरने का फर्जी वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर डाला था। उस वीडियो ने भी कुछ समय के लिए लोगों को भ्रमित कर दिया था।
इन घटनाओं से यह साफ है कि एआई तकनीक का इस्तेमाल केवल रचनात्मक कामों तक सीमित नहीं रह गया है। कुछ लोग इसे लोकप्रियता हासिल करने या फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं।












