Bhopal Metropolitan Region : 5 जिलों को मिलाकर बनेंगे नए शहर, जानें क्या है सरकार का प्लान
भोपाल को केंद्र में रखकर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की योजना तैयार हो रही है। इसके तहत पांच जिलों में नए निकाय और उपनगर बनाए जाएंगे ताकि शहरी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकें।
- भोपाल और आसपास के 4 जिलों को मिलाकर बनेगा विशाल मेट्रोपॉलिटन रीजन।
- हर 10 लाख की आबादी पर एक नया प्रशासनिक निकाय और उपनगर बनाने की तैयारी।
- भोपाल का मास्टर प्लान 2047 इस नई योजना के कारण अप्रैल 2027 तक अटका।
Bhopal Metropolitan Region : मध्य प्रदेश में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरों के फैलते दायरे को देखते हुए सरकार अब शहरी प्रशासन को नए तरीके से व्यवस्थित करने की तैयारी कर रही है। इसी दिशा में भोपाल को केंद्र में रखकर एक बड़े मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की योजना बनाई जा रही है। इस योजना के तहत भोपाल और आसपास के जिलों में नए शहरी निकाय और उपनगर विकसित किए जाएंगे, ताकि लोगों को रोजमर्रा की सुविधाओं के लिए दूर तक जाने की जरूरत न पड़े।
सरकार का लक्ष्य है कि लगभग हर 10 लाख की आबादी पर एक नया प्रशासनिक निकाय बनाया जाए। इन नए निकायों में पूरी प्रशासनिक व्यवस्था मौजूद होगी और इन्हें इस तरह विकसित किया जाएगा कि ये छोटे शहर या उपनगर की तरह काम करें। इससे शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करने और आसपास के इलाकों के संतुलित विकास में मदद मिलने की उम्मीद है।
भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन के तहत तैयार हो रही योजना
भोपाल को केंद्र में रखते हुए जिस मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की योजना बनाई जा रही है, उसमें आसपास के कई जिलों के हिस्सों को भी शामिल किया जाएगा। अभी जो प्रारंभिक योजना तैयार की जा रही है, उसके अनुसार भोपाल जिले की लगभग 25 लाख आबादी के साथ आसपास के चार जिलों की करीब 20 लाख आबादी को जोड़कर नया प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जाएगा।
इस तरह कुल मिलाकर करीब पांच जिलों में नए निकाय और उपनगर विकसित किए जाने की संभावना है। हर निकाय में स्थानीय प्रशासन, नागरिक सेवाएं, परिवहन व्यवस्था और आवश्यक सुविधाओं को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाएगा।
इस योजना का मकसद यह है कि बड़े शहरों में अत्यधिक भीड़ और अव्यवस्था को कम किया जाए और आसपास के क्षेत्रों में भी आधुनिक शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इससे रोजगार के अवसर भी स्थानीय स्तर पर बढ़ सकते हैं और शहरों में आवागमन का दबाव भी कम होगा।
बीडीए को बनाया गया नोडल एजेंसी
इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार ने भोपाल विकास प्राधिकरण को नोडल एजेंसी की जिम्मेदारी दी है। फिलहाल बीडीए की कंसल्टेंसी एजेंसी इस योजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रही है।
अधिकारियों के अनुसार योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने का काम जारी है और इसे अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद ही जमीन पर विकास कार्य शुरू हो पाएगा।
भोपाल विकास प्राधिकरण के प्रशासक और संभागायुक्त संजीव सिंह के अनुसार मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। शहर और आसपास के क्षेत्रों को प्रशासनिक सुविधा के आधार पर अलग-अलग हिस्सों में बांटकर विकास की रणनीति बनाई जा रही है। तय समय सीमा में इसे सार्वजनिक किया जाएगा।
भोपाल को केंद्र में रखकर जोड़े जा रहे आसपास के इलाके
योजना के शुरुआती नक्शे में भोपाल को मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का केंद्र बनाया गया है। इसके चारों तरफ के जिलों के कुछ हिस्सों को गोलाकार तरीके से इस क्षेत्र में शामिल करने का प्रस्ताव है।
हालांकि इस नक्शे को लेकर कुछ इलाकों में असंतोष भी सामने आया है। उदाहरण के तौर पर बैरसिया क्षेत्र के बड़े हिस्से को फिलहाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से बाहर रखा गया है, जिस पर स्थानीय स्तर पर विरोध की आवाज उठ रही है। लोगों का मानना है कि यदि आसपास के क्षेत्रों का विकास करना है तो इन इलाकों को भी योजना में शामिल किया जाना चाहिए। सरकार और प्रशासन की कोशिश है कि अंतिम योजना बनाते समय इन आपत्तियों और सुझावों पर भी विचार किया जाए।
इंदौर मेट्रोपॉलिटन योजना से पीछे चल रहा भोपाल
राज्य सरकार ने पहले ही भोपाल और इंदौर को मेट्रोपॉलिटन शहरों के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया था। लेकिन इस मामले में इंदौर की योजना काफी आगे निकल चुकी है।
जानकारी के अनुसार इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की डीपीआर का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। वहीं भोपाल में कंसल्टेंट की नियुक्ति हाल ही में हुई है, इसलिए यहां योजना लगभग एक साल पीछे चल रही है।
यानी इंदौर में जहां योजना का अंतिम चरण करीब है, वहीं भोपाल में अभी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
मास्टर प्लान 2047 भी इसी योजना से जुड़ा
भोपाल के शहरी विकास से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण योजना मास्टर प्लान 2047 भी फिलहाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की योजना पर निर्भर है। जब तक मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की सीमाएं और विकास रणनीति तय नहीं हो जाती, तब तक मास्टर प्लान को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा।
राज्य सरकार के संबंधित विभाग पहले ही संकेत दे चुके हैं कि मेट्रोपॉलिटन योजना स्पष्ट होने के बाद ही मास्टर प्लान को लागू किया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि भोपाल का मास्टर प्लान पहले से ही काफी देरी से चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार शहर का नया मास्टर प्लान लगभग 21 साल की देरी से तैयार हो रहा है। ऐसे में यदि मेट्रोपॉलिटन योजना में और देरी हुई तो मास्टर प्लान पर भी असर पड़ सकता है।
शहरी विकास के नए मॉडल की तैयारी
मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की यह योजना सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं है बल्कि शहरी विकास के नए मॉडल की ओर एक कदम मानी जा रही है। इसके तहत शहर के मुख्य भाग पर निर्भरता कम करते हुए आसपास के क्षेत्रों को भी व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाएगा।
यदि यह योजना सफल होती है तो भोपाल और आसपास के जिलों में रहने वाले लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार जैसी सुविधाएं अपने ही क्षेत्र में मिल सकेंगी। इससे शहर के ट्रैफिक, प्रदूषण और अव्यवस्













