रिटायरमेंट के बाद हर तीन महीने मिलेगी पक्की कमाई, ₹30 लाख जमा करने पर सालाना ₹2.46 लाख तक ब्याज
Post Office SCSS Scheme : रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी चिंता यही रहती है कि महीने का खर्चा कहां से निकलेगा। पेंशन तो सबको नहीं मिलती, और बैंक FD का ब्याज अब पहले जैसा मजा नहीं देता।
ऐसे में अगर आपके घर में कोई 60 साल पार कर चुका है, तो पोस्ट ऑफिस की एक स्कीम के बारे में जानना जरूरी है। नाम है सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम, यानी SCSS। यह कोई नई स्कीम नहीं है, लेकिन जुलाई-सितंबर 2026 वाली तिमाही के लिए सरकार ने इसका ब्याज दर फिर कन्फर्म कर दिया है, इसलिए आज इसकी पूरी बात समझ लेते हैं।
आखिर है क्या यह SCSS स्कीम
सीधी भाषा में कहें तो यह सरकार की एक गारंटीड बचत योजना है, जो सिर्फ बुजुर्गों के लिए बनाई गई है। 60 साल या उससे ज्यादा उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक इसमें पैसा जमा कर सकता है, और बदले में हर तीन महीने में उसे ब्याज का पैसा मिलता रहता है। मतलब पेंशन जैसी ही एक व्यवस्था, बस फर्क इतना है कि यहां पैसा आप खुद जमा करते हैं और सरकार उस पर तय ब्याज देती है।
जुलाई-सितंबर 2026 के लिए ब्याज दर कितनी है
वित्त मंत्रालय ने 30 जून 2026 को साफ कर दिया कि इस तिमाही यानी 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 तक SCSS पर 8.2 प्रतिशत सालाना ब्याज ही मिलेगा। यह लगातार नौवीं तिमाही है जब सरकार ने इस स्कीम की दर में कोई बदलाव नहीं किया, यानी पिछले दो साल से ज्यादा वक्त से यह दर स्थिर बनी हुई है।
खास बात यह है कि जो दर खाता खोलने के दिन लागू रहती है, वही आपके पूरे पांच साल के लिए लॉक हो जाती है। बाद में सरकार दर घटाए या बढ़ाए, आपको फर्क नहीं पड़ता। ₹30 लाख जमा करने पर कितनी कमाई होगी
अब असली सवाल, पैसा कितना बनेगा।
अगर कोई बुजुर्ग पूरे ₹30 लाख इस स्कीम में डाल देता है, तो 8.2 प्रतिशत की दर से साल भर में करीब ₹2 लाख 46 हजार का ब्याज बनता है। इसे महीने में बांटें तो लगभग ₹20,500 हर महीने का हिसाब बैठता है, और तिमाही आधार पर देखें तो हर तीन महीने में ₹61,500 सीधे खाते में आते हैं। यही वजह है कि रिटायरमेंट के बाद के खर्चे इस स्कीम से आराम से निकल जाते हैं।
कौन खोल सकता है खाता, और कितना पैसा लगेगा
इस स्कीम में खाता खोलने के लिए उम्र कम से कम 60 साल होनी चाहिए। VRS ले चुके कर्मचारियों और कुछ रिटायर सरकारी कर्मचारियों को उम्र में थोड़ी छूट भी मिलती है। पति-पत्नी दोनों मिलकर जॉइंट खाता भी खोल सकते हैं, जिससे परिवार का पूरा पैसा एक साथ मैनेज हो जाता है।
निवेश की शुरुआत सिर्फ ₹1,000 से हो जाती है, और अधिकतम सीमा ₹30 लाख तक है। खाता देश के किसी भी पोस्ट ऑफिस या सरकारी बैंक में खुलवाया जा सकता है, बस पहचान और उम्र का प्रमाण साथ रखना पड़ता है।
टैक्स भी समझ लीजिए
SCSS में जमा रकम पर आयकर की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है, शर्तों के मुताबिक। लेकिन एक बात ध्यान रखें, अब ब्याज पर टीडीएस कटने की सीमा बढ़ाकर ₹1 लाख सालाना कर दी गई है। यानी अगर आपका ब्याज इस सीमा से ऊपर जाता है, तो पोस्ट ऑफिस टीडीएस काट लेगा। अगर आपकी कुल टैक्स योग्य आय वैसे भी छूट सीमा से कम बैठती है, तो फॉर्म 15H समय पर जमा करके यह कटौती रुकवाई जा सकती है, वरना बाद में रिटर्न भरकर रिफंड लेना पड़ता है।
मैच्योरिटी और बीच में खाता बंद करने के नियम
इस स्कीम की तय अवधि पांच साल है। पांच साल पूरे होने पर चाहें तो पैसा निकाल लें, या फिर तीन-तीन साल के ब्लॉक में इसे आगे बढ़ाते रहें। अगर किसी वजह से पांच साल से पहले ही खाता बंद करना पड़े, तो जमा समय के हिसाब से एक से डेढ़ प्रतिशत तक पेनल्टी कट सकती है। इसलिए निवेश करने से पहले अपनी जरूरत और समय-सीमा दोनों का हिसाब लगा लेना समझदारी है।
खाताधारक की मृत्यु होने पर क्या होता है
अगर मैच्योरिटी से पहले ही खाताधारक का निधन हो जाए, तो नियमों के मुताबिक खाता बंद कर दिया जाता है और जरूरी कागजी कार्रवाई के बाद पूरा पैसा नॉमिनी या कानूनी वारिस को दे दिया जाता है। इसीलिए खाता खोलते वक्त नॉमिनी का नाम जरूर दर्ज करवाएं, ताकि बाद में परिवार को परेशानी न हो।
