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Gold की कीमत में फिर तेज उछाल, MCX पर ₹1.50 लाख के पार भाव; जानिए तेजी की पूरी वजह

7 अगस्त 2026 को MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के ऊपर पहुंचा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Gold सात सप्ताह के उच्च स्तर के आसपास है। कमजोर तेल कीमतें, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर रहे हैं।
Gold

Gold  की कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों का ध्यान खींच लिया है। 7 अगस्त 2026 को भारत में MCX गोल्ड अक्टूबर फ्यूचर्स ₹1,50,381 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब सात सप्ताह के उच्च स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था। इसी दौरान निवेशकों की नजर अमेरिकी जुलाई रोजगार आंकड़ों पर बनी हुई है, क्योंकि इससे आगे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं। यानी कहानी सिर्फ इतनी नहीं है कि सोना महंगा हो रहा है। असली सवाल यह है कि क्या मौजूदा तेजी आगे भी जारी रह सकती है और क्या इस स्तर पर खरीदारी करना समझदारी होगी?

7 अगस्त को कितना रहा Gold Rate

शुक्रवार के कारोबार में MCX गोल्ड अक्टूबर फ्यूचर्स लगभग 1.02 फीसदी चढ़कर ₹1,50,381 प्रति 10 ग्राम तक पहुंचा और दिन के दौरान ₹1,50,487 का स्तर भी देखा गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.6 फीसदी बढ़कर $4,262.39 प्रति औंस तक पहुंचा। पिछले सत्र में अंतरराष्ट्रीय सोना सात सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच चुका था।

खुदरा बाजार में भी सोने की कीमतें मजबूत रहीं। 7 अगस्त को दिल्ली में 24 कैरेट सोना करीब ₹1,49,020 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,36,602 प्रति 10 ग्राम बताया गया। मुंबई में 24 कैरेट सोना करीब ₹1,49,280 और 22 कैरेट सोना ₹1,36,840 प्रति 10 ग्राम रहा। शहर, कारोबारी मार्जिन, टैक्स और ज्वेलरी के मेकिंग चार्ज के कारण दुकान पर मिलने वाला अंतिम भाव इससे अलग हो सकता है।

सोने की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह 

सोने पर ब्याज दरों का सीधा असर पड़ता है। जब ब्याज दरें ज्यादा रहने की उम्मीद होती है तो बिना ब्याज देने वाले सोने की तुलना में बॉन्ड जैसे विकल्प ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। इसके उलट दरों में नरमी की संभावना बढ़ने पर सोने को समर्थन मिल सकता है।

फिलहाल बाजार अमेरिकी फेड की अगली चाल पर नजर रख रहा है। CME FedWatch के अनुसार, सितंबर में अमेरिकी दर बढ़ने की संभावना एक सप्ताह पहले के 63 फीसदी से घटकर करीब 55 फीसदी रह गई थी। अमेरिकी जुलाई के Nonfarm Payrolls आंकड़े इस उम्मीद को आगे प्रभावित कर सकते हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी बनी सहारा

इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी ने भी सोने को समर्थन दिया है। तेल सस्ता होने से महंगाई का दबाव कम रहने की उम्मीद बनती है। इससे बाजार में लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की आशंका कुछ कमजोर हो सकती है।

यही वजह है कि सोने में इस सप्ताह की तेजी को केवल एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा। ब्याज दरों की उम्मीद, तेल की कीमत और वैश्विक जोखिम धारणा मिलकर बाजार को प्रभावित कर रहे हैं।

पश्चिम एशिया की खबरें भी महत्वपूर्ण

पश्चिम एशिया से जुड़ी घटनाएं भी बाजार की दिशा पर असर डाल रही हैं। संघर्ष को लेकर तनाव और संभावित कूटनीतिक प्रगति दोनों ही निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं।

एक तरफ तनाव बढ़ने पर सोने को सुरक्षित निवेश की मांग से फायदा मिल सकता है। दूसरी तरफ यदि तनाव में टिकाऊ कमी आती है तो सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर भी हो सकती है। इसलिए आने वाले दिनों में इस मोर्चे पर किसी भी बड़ी खबर का असर बुलियन मार्केट में तेजी से दिखाई दे सकता है।

इस सप्ताह सोना कितनी तेजी से बढ़ा?

7 अगस्त के कारोबार तक MCX पर गोल्ड और सिल्वर दोनों में अच्छी मजबूती दिखाई दी। Economic Times के मुताबिक, तीन कारोबारी सत्रों में MCX गोल्ड में करीब ₹6,335 यानी 4.4 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई, जबकि इसी अवधि में सिल्वर लगभग 5.2 फीसदी चढ़ा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्पॉट गोल्ड इस सप्ताह 5 फीसदी से ज्यादा ऊपर था। इससे साफ है कि मौजूदा तेजी केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार की चाल का घरेलू कीमतों पर भी असर पड़ रहा है।

क्या अभी सोना खरीदना सही समय है?

यहीं सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत है। तेजी के दौरान यह मान लेना कि कीमत आगे भी लगातार बढ़ती रहेगी, निवेश का सही तरीका नहीं है।

7 अगस्त को कुछ तकनीकी विश्लेषकों ने MCX गोल्ड में तेजी की स्थिति बरकरार रहने की बात कही। Times of India के अनुसार, LKP Securities के Jateen Trivedi ने शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के लिए ₹1,47,900 के आसपास के स्तर को महत्वपूर्ण बताया और बाजार में ‘buy on dips’ रणनीति का उल्लेख किया। यह ट्रेडिंग नजरिया है, इसे हर निवेशक के लिए व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।