क्या अब यूपीआई पेमेंट करना पड़ेगा महंगा? संसद से पास हुआ बिल, जानें आप पर कितना पड़ेगा असर
UPI MDR charge news : देश में हर महीने करोड़ों लोग यूपीआई से पेमेंट करते हैं, और अब इस पॉपुलर पेमेंट सिस्टम को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। लोकसभा ने गुरुवार को टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026 को मंजूरी दे दी, जिसके बाद केंद्र सरकार के पास अब यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाने का अधिकार आ गया है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया खुद बड़े लेनदेन पर फीस वसूलने के पक्ष में खड़ा नजर आ रहा है। संसद में यह बिल पास होने के तुरंत बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि यह चार्ज सीधे ग्राहकों की जेब पर नहीं बल्कि व्यापारियों पर लगेगा
व्यापारियों पर लागू होता है
गुरुवार को लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन को बताया कि एमडीआर केवल मर्चेंट्स यानी व्यापारियों पर लागू होता है, न कि आम यूजर्स या उपभोक्ताओं पर। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एनपीसीआई की अगुवाई वाली यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने अभी तक एमडीआर को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। संशोधन विधेयक संसद से पास होने के बाद ही इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाएगा। यानी बिल पास होना केवल पहला चरण है, असली फैसला अभी बाकी है।
आरबीआई गवर्नर का बयान बना चर्चा का विषय
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए कुछ हफ्ते पीछे जाना जरूरी है। हाल ही में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक कार्यक्रम में कहा था कि यूपीआई भले ही एक पब्लिक सर्विस है, लेकिन इसकी लागत किसी न किसी को तो उठानी ही होगी। उनके इस बयान के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार जल्द ही यूपीआई ट्रांजैक्शन पर किसी न किसी रूप में फीस लागू कर सकती है। अब संसद से बिल पास होने के बाद यह अटकलें और मजबूत हो गई हैं।
समझिए क्या होता है एमडीआर
एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह फीस है, जो बैंक और पेमेंट प्रोसेसिंग कंपनियां हर क्रेडिट या डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर व्यापारी से वसूलती हैं। अभी तक यूपीआई पेमेंट पूरी तरह इस चार्ज से मुक्त रहा है, यही वजह है कि यह भारत में इतनी तेजी से लोकप्रिय हुआ। लेकिन अब सरकार इसी मॉडल को यूपीआई पर भी आजमाने की तैयारी में है, हालांकि शुरुआत में यह सिर्फ बड़े बिजनेस ट्रांजैक्शन तक सीमित रह सकती है।
कितने ट्रांजैक्शन पर पड़ेगा असर
फाइनेंस मिनिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई पेमेंट की कुल वैल्यू में पर्सन-टू-मर्चेंट यानी पी2एम लेनदेन की हिस्सेदारी करीब 29 फीसदी है। अगर सरकार 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लगाने का फैसला करती है, तो करीब 67 फीसदी पी2एम लेनदेन इसकी जद में आ जाएंगे। जुलाई के आंकड़ों के हिसाब से यह रकम करीब 5,80,568 करोड़ रुपये बैठती है, जो अपने आप में एक बड़ी संख्या है।
जुलाई में यूपीआई का आंकड़ा कितना बड़ा रहा
अकेले जुलाई महीने में यूपीआई ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू करीब 29.88 लाख करोड़ रुपये रही। यह आंकड़ा बताता है कि यूपीआई अब भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ बन चुका है। ऐसे में इस पर लगने वाला कोई भी चार्ज सीधे लाखों व्यापारियों और करोड़ों ग्राहकों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकता है।
सरकार की कमाई
एक मीडिया रिपोर्ट में सामने आए अनुमान के मुताबिक अगर 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर पूरे साल के लिए 0.25 फीसदी एमडीआर लागू किया जाए, तो इससे करीब 17,416 करोड़ रुपये की कमाई हो सकती है। अगर यह दर 0.5 फीसदी रखी जाती है, तो आंकड़ा करीब 34,833 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं अगर एमडीआर को 1 फीसदी तक बढ़ाया गया, तो यह रकम बढ़कर करीब 69,655 करोड़ रुपये हो जाएगी। हालांकि यह सिर्फ अनुमान हैं, अंतिम दर पर फैसला अभी होना बाकी है।
व्यापारियों और ग्राहकों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला
छोटे दुकानदारों और व्यापारी संगठनों में इस खबर को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां कुछ व्यापारी मानते हैं कि छोटे चार्ज से डिजिटल पेमेंट पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, वहीं कुछ का कहना है कि पहले से पतले मार्जिन पर काम कर रहे छोटे कारोबारियों के लिए यह अतिरिक्त बोझ साबित हो सकता है। सरकार और एनपीसीआई की तरफ से आने वाले दिनों में इस पर और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अंतिम फैसला स्टीयरिंग कमिटी की सिफारिशों के आधार पर ही लिया जाएगा।
