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राम मंदिर दान घोटाला: चंपत राय का इस्तीफा, 8 गिरफ्तार , जानें पूरी इनसाइड स्टोरी


Ayodhya Ram Mandir donation case : करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रतीक अयोध्या का राम मंदिर इन दिनों एक अलग ही कारण से सुर्खियों में है। वह कारण है दान राशि में कथित गड़बड़ी का वह मामला, जिसने ट्रस्ट से लेकर संसद तक हलचल मचा दी है। मामला इतना गंभीर हो गया कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना पड़ा। और इसके साथ ही आठ लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं है। यह मामला उन लाखों-करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई में से कुछ हिस्सा भगवान राम के चरणों में समर्पित किया था।

मई में शुरू हुई थी गड़बड़ी की भनक

विवाद जून में सामने आया, लेकिन ट्रस्ट को गड़बड़ी का शक मई के आखिरी सप्ताह में ही हो गया था। बैंक में जमा हो रही रकम और दान पेटियों से निकलने वाली राशि का मिलान करने पर कुछ अंतर नजर आया। इसके बाद जिस कमरे में दान पेटियां खोली जाती थीं और नोटों की गिनती होती थी, वहां निगरानी बढ़ाई गई और छिपे हुए कैमरे भी लगाए गए। 7 जून 2026 को समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि राम मंदिर की दान पेटियों से करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये का गबन हुआ है। उनके इस बयान के बाद मामला तेजी से राजनीतिक मुद्दा बन गया और विपक्ष ने पारदर्शिता की मांग शुरू कर दी।

SIT गठन से FIR तक का सफर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था। कई दिनों की जांच, कर्मचारियों से पूछताछ और दान पेटियों के रिकॉर्ड खंगालने के बाद 23 जून को SIT ने सरकार को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कठोर कार्रवाई की सिफारिश की गई। SIT की शुरुआती जांच में पाया गया कि भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान को रखने, गिनने और उसे बैंक में जमा करने के नियमों में कई स्तरों पर लापरवाही बरती गई। इसके आधार पर 25 जून को ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर श्री राम जन्मभूमि थाने में FIR दर्ज हुई। FIR में चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी का सामान छिपाने, आपराधिक साजिश और 'भारतीय न्याय संहिता' व 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' के तहत अपराधों के आरोप शामिल हैं।

आठ गिरफ्तारियाँ और 79.85 लाख रुपये बरामद

FIR दर्ज होने के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने कार्रवाई की। 26 जून को हिरासत में लिए गए सभी आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार लोगों में चंपत राय के करीबी सहयोगी रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, रामाशंकर मिश्रा और सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। सुभाष श्रीवास्तव दान की गिनती की व्यवस्था संभालते थे। अयोध्या की विशेष अदालत ने सभी आठ आरोपियों को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अभियोजन अधिकारी के मुताबिक एक आरोपी को छोड़कर बाकी सभी से कुल 79.85 लाख रुपये बरामद किए गए हैं।

चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा

26 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। दोनों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ रहे हैं, ताकि जांच निष्पक्ष ढंग से पूरी हो सके और ट्रस्ट की साख पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे। BJP कार्यकर्ता डॉ. रजनीश सिंह, जिन्होंने इस गड़बड़ी को लेकर सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी, का कहना है कि सिर्फ इस्तीफे दे देना काफी नहीं है और इस पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए।

राम मंदिर में आखिर कितना दान आता है?

ट्रस्ट के आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच राम मंदिर को 82.78 करोड़ रुपये का दान मिला। इसी दौरान बैंक में जमा राशि पर 138.03 करोड़ रुपये का ब्याज भी मिला। वहीं वर्ष 2024-25 में ट्रस्ट की कुल आय 327 करोड़ रुपये रही थी, जिसमें करीब 153 करोड़ रुपये श्रद्धालुओं के चढ़ावे से मिले थे। इन आँकड़ों को देखें तो समझ आता है कि यह मामला सिर्फ कुछ हजार या लाख रुपये की चोरी का नहीं है यह एक ऐसे संस्थान की विश्वसनीयता का प्रश्न है, जिस पर देश के करोड़ों लोग आँख मूँदकर भरोसा करते हैं।

विपक्ष ने उठाए तीखे सवाल

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ विश्वासघात बताते हुए सरकार से जवाब माँगा। https://twitter.com/yadavakhilesh/status/2070161292552519807 दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या दौरे के दौरान दावा किया कि भगवान राम को चढ़ाए गए गहने, हीरे, चांदी और करीब 200 करोड़ रुपये नकद गायब हैं। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस मामले में प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है और वही लोग अब खुद को बचाने की कोशिश में हैं। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी द्वारा दिए गए 1 करोड़ रुपये के दान की रसीद अब तक नहीं मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट को दी गई 25 किलो से ज्यादा वजन की चांदी की ईंट का भी कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आया। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की जांच कराने की माँग की। आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि केजरीवाल की अयोध्या यात्रा के दौरान ली गई आधिकारिक तस्वीरें उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गईं और सोशल मीडिया पर इसे "छोटी राजनीति" करार दिया।

सरकार की सफाई और भाजपा का रुख

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि FIR दर्ज हो चुकी है और मामले की निष्पक्ष जांच होगी। भाजपा नेता नीरज सिंह ने इसे "निःसंदेह शर्मनाक" बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की त्वरित कार्रवाई की सराहना की। केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने भी कहा कि दोषियों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।