Sports News Without Access, Favor, Or Discretion!

  1. Home
  2. Country

अयोध्या राम मंदिर दान विवाद,SIT की जांच में जुटी टीम, 43 लोगों से हुई गहन पूछताछ


Ayodhya Ram Mandir Donation Controversy : अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर फैले दान संबंधी आरोपों के बीच राज्य सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मंदिर परिसर में जांच का दायरा बढ़ा दिया है। सोमवार और मंगलवार को चली इस जांच प्रक्रिया में ट्रस्ट के पदाधिकारियों से लेकर बैंक कर्मियों तक से सवाल-जवाब किए गए हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके। अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर में इन दिनों एक अलग तरह की हलचल है। यह हलचल किसी उत्सव की नहीं, बल्कि मंदिर के दान-पात्रों से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी पड़ताल तेज कर दी है। सोमवार (15 जून) को सुबह से शुरू हुई यह प्रक्रिया देर रात तक चली, जिसमें एसआईटी के अधिकारियों ने राम मंदिर परिसर में डेरा डाले रखा। मंगलवार (16 जून) को भी इस जांच का सिलसिला जारी रह सकता है , जिसका मुख्य उद्देश्य दान राशि के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और सोशल मीडिया पर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगाना है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित इस टीम में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। एसआईटी के सदस्यों ने सोमवार को गेट नंबर 11 से मंदिर परिसर में प्रवेश किया और लगभग आठ घंटे तक बारीकी से पड़ताल की। जांच के दौरान मंदिर के दान-पात्रों की भौतिक सत्यापन प्रक्रिया पूरी की गई। इसके साथ ही, एसआईटी ने पिछले कुछ समय का सीसीटीवी फुटेज और दान से संबंधित महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर उनकी जांच की। सूत्रों के अनुसार, यह जांच किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। टीम ने दो दिनों के भीतर अब तक 43 लोगों से आमने-सामने पूछताछ की है। इसमें राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों और दान-पात्रों की गिनती में लगे कर्मचारियों को शामिल किया गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और जिलाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहे। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि क्या वास्तव में दान राशि के प्रबंधन में कोई हेरफेर हुई है, या ये आरोप केवल भ्रामक सूचनाओं का हिस्सा हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस पूरे मामले पर बहुत स्पष्ट रुख अपनाया है। ट्रस्ट का मानना है कि मंदिर की प्रतिष्ठा और श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। ट्रस्ट ने खुद सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच का आग्रह किया था। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मीडिया के साथ बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि जांच दो स्तरों पर चल रही है। पहला, क्या इसमें कोई आपराधिक पहलू है? और दूसरा, भविष्य में दान प्रबंधन की प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी कैसे बनाया जा सकता है। नृपेंद्र मिश्र ने यह भी स्पष्ट किया कि सनातन धर्म में दान एक पवित्र प्रक्रिया है, जिसे श्रद्धा के साथ किया जाता है। उन्होंने अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली से किसी अतिरिक्त अधिकारी को बुलाने की बातें निराधार हैं। पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के नियंत्रण में है और ट्रस्ट इसमें पूरा सहयोग दे रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जांच में किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही नहीं होगी, ताकि राम भक्तों का भरोसा और मजबूत बना रहे। एसआईटी की जांच फिलहाल सबूत जुटाने और तथ्यों के सत्यापन के चरण में है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अभी तक किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया गया है और न ही किसी को जेल भेजा गया है। हालांकि, ट्रस्ट द्वारा पूर्व में हिरासत में लिए गए लोगों से भी एसआईटी ने अलग-अलग चरणों में पूछताछ की है। जांच टीम ने एसबीआई के उन कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए हैं जो नियमित रूप से दान-पात्रों की गिनती और बैंक में राशि जमा करने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। जांच का काम पूरा होने के बाद, एसआईटी अब अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपने की तैयारी में है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि मामले में आगे की कानूनी दिशा क्या होगी। फिलहाल, प्रशासन ने इसे पूरी तरह से गोपनीय और व्यवस्थित रखा है ताकि जांच की निष्पक्षता बनी रहे। अयोध्या के लोग और देश भर के राम भक्त इस जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि सच्चाई पूरी तरह से सामने आ सके।