जन्म से अंधी गाय ने दिया 74 किलो के बछड़े को जन्म, बरेली में अनोखे जन्म से हैरान हुए पशु विशेषज्ञ
Mp Big News,Bareilly Latest News : उत्तर प्रदेश के बरेली में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने गौशाला संचालकों से लेकर पशु चिकित्सा विशेषज्ञों तक का ध्यान खींचा है। नकटिया के पास स्थित ‘यदु नंदिनी गौशाला’ में जन्म से नेत्रहीन गाय ने 74 किलोग्राम वजनी स्वस्थ बछड़े को जन्म दिया है। सामान्य बछड़े के जन्म के वजन की तुलना में यह आंकड़ा काफी अधिक है। बछड़े का जन्म गुरुवार को हुआ, इसलिए गौशाला संचालक वीरेंद्र सिंह यादव ने उसका नाम ‘गुरु’ रखा। खास बात यह है कि प्रसव के बाद गाय और बछड़ा दोनों स्वस्थ हैं।
जन्म से नहीं देख सकती ‘काजल’, फिर दिया इतने भारी बछड़े को जन्म
गौशाला संचालक और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी वीरेंद्र सिंह यादव के अनुसार, बछड़ा ‘काजल’ नाम की गाय से पैदा हुआ है। काजल होल्स्टीन फ्रीजियन नस्ल की गाय है और वह जन्म से ही नेत्रहीन है। यह काजल का तीसरा प्रसव था। प्रसव के दौरान डॉक्टरों की सहायता ली गई। बछड़े का वजन सामने आने के बाद गौशाला में मौजूद लोगों के बीच इसकी चर्चा शुरू हो गई। आमतौर पर जन्म के समय बछड़े का वजन करीब 27 से 32 किलोग्राम के आसपास बताया जाता है। ऐसे में 74 किलो का बछड़ा सामान्य वजन से काफी अधिक है।
74 किलो वजन ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की दिलचस्पी
इस असामान्य जन्म की जानकारी सामने आने के बाद भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के विशेषज्ञों का भी ध्यान इस मामले पर गया। IVRI के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत पावड़े के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में इतना अधिक वजन लेकर बछड़े का जन्म होना बेहद दुर्लभ है। उन्होंने ऐसी स्थिति के संभावित कारणों में मस्कुलर हाइपरट्रॉफी सिंड्रोम जैसी अवस्था का उल्लेख किया है।
इस स्थिति में पशु के शरीर में मांसपेशियों का विकास सामान्य से अधिक हो सकता है और जन्म के समय वजन भी बढ़ सकता है। हालांकि, 74 किलोग्राम वजन का यह मामला अपने आप में असामान्य है और इसके पीछे वास्तविक कारण समझने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी होगा। इसलिए सिर्फ वजन के आधार पर किसी निश्चित चिकित्सकीय निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
बरेली में ‘गुरु’ को देखने पहुंच रहे लोग
74 किलो के बछड़े के जन्म की खबर आसपास के इलाकों में फैलते ही लोग इसे देखने के लिए गौशाला पहुंचने लगे। लोगों के लिए सबसे ज्यादा हैरानी की बात बछड़े का आकार और उसका जन्म के तुरंत बाद स्वस्थ होना है। गौशाला में उसकी मां काजल की भी निगरानी की जा रही है, ताकि प्रसव के बाद दोनों को पर्याप्त देखभाल मिल सके।
पुलिस सेवा से गौसेवा तक का सफर
वीरेंद्र सिंह यादव वर्ष 2018 में बदायूं से सीओ पद से सेवानिवृत्त हुए थे। पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने बरेली के कई प्रमुख थानों में जिम्मेदारी संभाली। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपना समय गौसेवा में लगाना शुरू किया। उनकी गौशाला में अलग-अलग नस्लों की करीब 60 गायें हैं। इनमें साहिवाल, गिर, थारपारकर और अमेरिकन ब्रीड की गायें शामिल हैं। गौशाला में तीन दुर्लभ बताई जाने वाली ‘स्वर्ण कपिला’ गायें भी हैं। इसके अलावा देश की छोटी नस्लों में शामिल पुंगनूर गाय भी यहां मौजूद है।
11 लाख रुपये की पेशकश भी ठुकराई
वीरेंद्र सिंह यादव की गौशाला की एक ‘स्वर्ण कपिला’ गाय को खरीदने के लिए राजस्थान के एक व्यक्ति ने कथित तौर पर 11 लाख रुपये की पेशकश की थी। हालांकि, यादव ने गाय को बेचने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि गौशाला का उद्देश्य केवल पशुओं से आर्थिक लाभ कमाना नहीं, बल्कि उनकी देखभाल और सेवा करना है। गौशाला में दूध से हर महीने एक लाख रुपये से अधिक की आय होती है। यादव के अनुसार, इस आय का इस्तेमाल गौवंश के रखरखाव और सेवा पर किया जाता है।
क्यों खास है 74 किलो का ‘गुरु’?
‘गुरु’ के जन्म की सबसे बड़ी खासियत उसका वजन है। जहां सामान्य नवजात बछड़े का वजन इससे काफी कम होता है, वहीं इस बछड़े का वजन 74 किलोग्राम दर्ज किया गया है।
दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि उसकी मां काजल जन्म से नेत्रहीन है। इसके बावजूद उसने तीसरे प्रसव में एक स्वस्थ बछड़े को जन्म दिया।
फिलहाल, बरेली में यह बछड़ा लोगों की उत्सुकता का केंद्र बना हुआ है। वहीं विशेषज्ञों के लिए इसका असामान्य जन्म वजन आगे के अध्ययन का विषय हो सकता है।
