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छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के पुराने ठिकानों पर बड़ा एक्शन, लाखों का कैश और घातक हथियारों का जखीरा मिला


Bijapur Police Naxal Operations : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने एक बड़े संयुक्त अभियान के तहत नक्सलियों के पुराने ठिकानों और डंप पर छापा मारकर भारी मात्रा में कैश, घातक हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की है। बीजापुर पुलिस, डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा और सीआरपीएफ के जवानों ने मिलकर पिछले एक महीने से चलाए जा रहे इस विशेष सर्च ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में सक्रिय माओवादियों की लॉजिस्टिक्स आपूर्ति, हथियार श्रृंखला और IED बनाने की क्षमताओं को पूरी तरह से खत्म करना है। स्थानीय ग्रामीणों से मिले इनपुट और हाल ही में आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से पूछताछ के आधार पर इस पूरी कार्रवाई को बेहद गोपनीय और सटीक तरीके से अंजाम दिया गया।

कैसे मिला नक्सलियों के इस गुप्त खजाने का सुराग?

सुरक्षाबलों को यह बड़ी कामयाबी अचानक नहीं मिली है। बीजापुर के सुदूर और अतिसंवेदनशील इलाकों में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार सघन एरिया डोमिनेशन अभियान चलाया जा रहा था। बीजापुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र कुमार यादव ने बताया कि हाल ही में हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल हुए माओवादी कैडरों से पुलिस ने गहन पूछताछ की थी। इस पूछताछ में नक्सलियों के कई पुराने और गुप्त ठिकानों के बारे में अहम जानकारियां हाथ लगीं। इसके साथ ही, बस्तर के स्थानीय ग्रामीणों का भी पुलिस को भरपूर सहयोग मिल रहा है। अंदरूनी इलाकों में रहने वाले लोगों के मजबूत सूचना तंत्र की वजह से ही जवान उन दुर्गम जंगलों और पहाड़ियों तक पहुंचने में सफल रहे, जहां नक्सलियों ने अपनी रसद, हथियार और पैसों का बड़ा डंप छिपाकर रखा था।

भारी मात्रा में कैश और खतरनाक हथियारों की बरामदगी

इस ताजा कार्रवाई में संयुक्त बलों ने नक्सलियों के ठिकानों से 65.52 लाख रुपये नगद बरामद किए हैं। इसके अलावा मौके से अलग-अलग बोर के 32 घातक हथियार मिले हैं। इन हथियारों में एक एलएमजी (लाइट मशीन गन) राइफल, चार एसएलआर राइफल, एक कार्बाइन और पांच .303 राइफल शामिल हैं। जवानों को वहां से बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस भी मिले हैं, जिसमें एके-47 के 33 राउंड और एसएलआर के 219 राउंड शामिल हैं। इसके साथ ही 84 बीजीएल (बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) शेल, आईईडी बनाने के उपकरण और नक्सलियों के दैनिक उपयोग का सामान भी जब्त किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर हथियारों और पैसों का मिलना यह साबित करता है कि नक्सली किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे।

टूट गई माओवादियों की वित्तीय रीढ़ की हड्डी

नक्सलियों के खिलाफ चल रहे इस अभियान में सुरक्षाबलों ने उनके आर्थिक नेटवर्क पर अब तक की सबसे करारी चोट की है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सुरक्षाबलों द्वारा अब तक की गई कुल कार्रवाइयों में नक्सलियों के पास से 7.2852 करोड़ रुपये नगद और करीब 12.80 करोड़ रुपये मूल्य का 8.20 किलोग्राम सोना बरामद किया जा चुका है। नक्सलियों के ठिकानों से अब तक कुल 20 करोड़ 08 लाख 52 हजार रुपये की चल-अचल संपत्ति जब्त की जा चुकी है। अकेले वर्ष 2025-26 के दौरान ही बीजापुर जिले से 461 हथियारों की रिकवरी की जा चुकी है, जो यह साफ दिखाता है कि माओवादियों का नेटवर्क अब बस्तर में बुरी तरह बिखर रहा है।

जंगलों में ही उड़ा दिए गए बारूद के ढेर

इस अभियान के दौरान केवल हथियारों की जब्ती ही नहीं हुई, बल्कि सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खतरनाक मंसूबों को मिट्टी में मिला दिया। पामेड़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कवरगुट्टा के जंगलों और नेशनल पार्क एरिया से जवानों ने कुल 140 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और यूरिया बरामद किया। नक्सली इस भारी-भरकम केमिकल का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर आईईडी और रिमोट बम बनाने के लिए करने वाले थे। सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करते हुए बम निरोधक दस्ते ने इस पूरे बारूद को मौके पर ही सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया।