Medical Store Strike Today : ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ AIOCD की हड़ताल, मरीजों के लिए क्या है व्यवस्था
Medical Store Strike Today : देशभर में बुधवार को ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल आयोजित की गई। इस हड़ताल में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, दिल्ली और अन्य राज्यों के लाखों मेडिकल स्टोर संचालक शामिल हुए। संगठन का आरोप है कि ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी कंपनियों द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट से पारंपरिक मेडिकल दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और दवा वितरण व्यवस्था में असंतुलन पैदा हो रहा है। हालांकि, मरीजों को जरूरी दवाएं मिलती रहें, इसके लिए कई राज्यों में प्रशासन ने आपातकालीन मेडिकल स्टोर्स खुले रखने की व्यवस्था की है।
लेकिन इसके साथ नियमन का सवाल भी लगातार उठता रहा है। दवा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए मजबूत सत्यापन व्यवस्था, लाइसेंसिंग और डेटा सुरक्षा जरूरी है। कई सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मॉडल के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी नीति चुनौती बन चुका है।
देशव्यापी हड़ताल?
भारत में दवा कारोबार लंबे समय से पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स के नेटवर्क पर आधारित रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स के तेजी से विस्तार ने बाजार की तस्वीर बदल दी है। घर बैठे दवा डिलीवरी, ऐप आधारित ऑर्डर और बड़े डिस्काउंट के कारण ऑनलाइन कंपनियों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। AIOCD का कहना है कि यह मॉडल छोटे और मध्यम स्तर के दवा व्यापारियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। संगठन का दावा है कि बिना पर्याप्त नियमन के ऑनलाइन दवाओं की बिक्री से मरीजों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है, खासकर प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के मामले में। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म डॉक्टर की पर्ची के सत्यापन और दवा वितरण के मानकों का पालन नहीं करते। यही वजह है कि वे सरकार से सख्त नियामक ढांचा लागू करने की मांग कर रहे हैं।AIOCD की मुख्य मांगें क्या हैं?
AIOCD ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।- पहली मांग GSR 817 अधिसूचना को वापस लेने की है, जो ऑनलाइन दवा बिक्री के नियमन से जुड़ी मानी जाती है। संगठन चाहता है कि सरकार नया और स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार करे, जिसमें मरीजों की सुरक्षा और ऑफलाइन व्यापारियों के हित दोनों सुरक्षित रहें।
- दूसरी मांग कोविड-19 महामारी के दौरान लागू की गई GSR 220 अधिसूचना को समाप्त करने की है। संगठन का कहना है कि महामारी के समय दी गई कई अस्थायी छूट अब स्थायी व्यावसायिक लाभ का माध्यम बन गई हैं।
- तीसरी और सबसे प्रमुख मांग ऑनलाइन कंपनियों द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट पर नियंत्रण लगाने की है। केमिस्ट संगठनों का तर्क है कि छोटे दुकानदार इतने बड़े डिस्काउंट के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
मरीजों पर कितना असर पड़ा?
देश के कई शहरों में सामान्य मेडिकल स्टोर्स बंद रहने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा, खासकर उन लोगों को जिन्हें नियमित दवाओं की जरूरत होती है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग और ड्रग कंट्रोल प्रशासन ने पहले से तैयारी करते हुए कुछ दुकानों को 24 घंटे खुला रखने की अनुमति दी। कई सरकारी अस्पतालों के आसपास मेडिकल सुविधाएं चालू रखी गईं ताकि इमरजेंसी सेवाओं पर असर न पड़े। कुछ राज्यों में प्रशासन और दवा संगठनों के बीच बातचीत के बाद आंशिक राहत भी देखने को मिली।ऑनलाइन फार्मेसी पर सरकार की चुनौती
भारत में ई-फार्मेसी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। उद्योग रिपोर्ट्स के अनुसार, डिजिटल हेल्थ और ऑनलाइन मेडिसिन डिलीवरी बाजार आने वाले वर्षों में कई गुना बढ़ सकता है। कोविड महामारी के बाद ऑनलाइन हेल्थ सेवाओं की मांग में तेजी आई थी, जिसका सीधा फायदा ई-फार्मेसी कंपनियों को मिला।
लेकिन इसके साथ नियमन का सवाल भी लगातार उठता रहा है। दवा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए मजबूत सत्यापन व्यवस्था, लाइसेंसिंग और डेटा सुरक्षा जरूरी है। कई सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मॉडल के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी नीति चुनौती बन चुका है। 