Solar Eclipse 2026 : सावन में लगने जा रहा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं
surya grahan sawan month 2026 : साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण बुधवार, 12 अगस्त को लगेगा। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जो श्रावण महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को लगेगा। भारतीय मानक समय के अनुसार, यह ग्रहण रात लगभग 9:04 बजे शुरू होगा और लगभग 1:27–1:28 बजे तक चलेगा; इसकी कुल अवधि लगभग साढ़े चार घंटे होगी। ग्रहण अपने चरम पर रात 11:17 बजे होगा। खास बात यह है कि चूंकि यह ग्रहण पवित्र श्रावण महीने में पड़ रहा है, इसलिए धार्मिक नज़रिए से इसे महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, खगोलीय नज़रिए से यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा; इसलिए, यहां सूतक काल से जुड़े नियम लागू नहीं होंगे।
कब और कहां दिखेगा यह सूर्य ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से यूरोप और आर्कटिक क्षेत्र के देशों में दिखाई देगा। ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी स्पेन और पुर्तगाल के उत्तर-पूर्वी हिस्से में लोग इसे पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में देख पाएंगे, जबकि उत्तरी रूस के एक छोटे और दुर्गम इलाके में भी दोपहर के समय पूर्णता का नजारा दिखेगा। यह 1999 के बाद पहला मौका है जब यूरोप के मुख्य भूभाग से पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा, इसलिए वहां के खगोलप्रेमियों के लिए यह किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है।
इसके अलावा यह ग्रहण आंशिक रूप में यूरोप के बड़े हिस्से, कनाडा के अधिकांश भाग, अमेरिका के उत्तर-पूर्वी इलाकों और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में भी नजर आएगा। अटलांटिक कनाडा के कुछ क्षेत्रों में सूर्य का लगभग आधा हिस्सा चांद की छाया से ढका दिखेगा, जबकि अमेरिका के न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में इसका असर थोड़ा कम रहेगा। स्पेन में पूर्णता का समय करीब एक मिनट पचास सेकंड से लेकर सवा दो मिनट के आसपास रहने का अनुमान है, और उस दौरान सूर्य क्षितिज के काफी करीब होने से आसमान का नजारा और भी खास बन जाएगा।
भारत में सूतक काल नहीं होगा मान्य
हिंदू परंपरा में सूतक काल तभी मान्य माना जाता है, जब ग्रहण संबंधित स्थान पर आंखों से देखा जा सके। चूंकि 12 अगस्त का यह सूर्य ग्रहण भारत की सीमा से बाहर घटित होगा और यहां से नजर नहीं आएगा, इसलिए देशभर में न तो सूतक काल लागू होगा और न ही मंदिरों के कपाट बंद करने या पूजा-पाठ रोकने जैसे नियम लागू होंगे। लोग अपने रोजमर्रा के काम, खान-पान और धार्मिक अनुष्ठान सामान्य रूप से जारी रख सकेंगे।
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण को खगोलीय घटना के साथ-साथ प्रकृति, राशियों और वैश्विक घटनाक्रम पर असर डालने वाली घटना के तौर पर भी देखा जाता रहा है। कुछ ज्योतिषियों के अनुसार सावन मास में पड़ने वाला यह ग्रहण कुछ राशियों के लिए अनुकूल फल ला सकता है, तो कुछ के लिए सतर्कता बरतने का समय हो सकता है। हालांकि यह मान्यता आस्था पर आधारित है और इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, इसलिए इसे व्यक्तिगत विश्वास के दायरे में ही देखा जाना चाहिए।
पूर्ण सूर्य ग्रहण होता क्या है
पूर्ण सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चांद, सूरज और पृथ्वी के बीच से गुजरते हुए सूरज की रोशनी को पूरी तरह ढक लेता है। जिन इलाकों में चांद की गहरी छाया यानी अम्ब्रा पड़ती है, वहां लोगों को कुछ देर के लिए पूर्ण अंधकार जैसा अनुभव होता है, तापमान में गिरावट आती है और आसमान में सूरज के इर्द-गिर्द चमकीला प्रभामंडल यानी कोरोना दिखाई देने लगता है। इसके बाहर के बड़े इलाके में लोगों को सिर्फ आंशिक ग्रहण दिखता है, यानी सूरज का केवल एक हिस्सा ही ढका हुआ नजर आता है।
