पुरानी पेंशन योजना पर सरकार का दो टूक जवाब, जानिए क्या है नया अपडेट
Old Pension Scheme update : अगर आप केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं और पुरानी पेंशन योजना यानी OPS वापस आने का इंतजार कर रहे थे, तो जरा रुक जाइए। सरकार ने अभी-अभी संसद में जो जवाब दिया है, उसने लाखों कर्मचारियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। चलिए, पूरी बात समझते हैं, आसान भाषा में, बिना किसी लाग-लपेट के।
संसद में क्या हुआ, पूरा किस्सा जानिए
बात है 23 जुलाई 2026 की। राज्यसभा में सांसद आर. गिरिराजन ने सरकार से सीधा सवाल पूछा - क्या सरकार पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने पर विचार कर रही है? इस सवाल का जवाब दिया श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने। उन्होंने बताया कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के अनुसार, फिलहाल OPS को वापस लाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। यानी सीधी और साफ भाषा में कहें तो, सरकार का इरादा अभी OPS लौटाने का बिल्कुल नहीं है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह मुद्दा इतना गरमाया क्यों है? इसकी वजह है आठवां वेतन आयोग। जैसे ही आठवें वेतन आयोग की बात शुरू हुई, कर्मचारी संगठनों ने भी अपनी पुरानी मांग फिर से जोर-शोर से उठानी शुरू कर दी।
कौन-कौन से संगठन कर रहे हैं मांग
यह कोई एक-दो संगठनों की बात नहीं है, साहब। नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी यानी NC-JCM, फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन (FNPO), ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉईज फेडरेशन (AIDEF), ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉईज फेडरेशन (AINPSEF) और इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) जैसे बड़े-बड़े संगठनों ने आठवें वेतन आयोग को दिए अपने ज्ञापन में OPS बहाली की मांग रखी है।
इन संगठनों का सीधा-सा तर्क है कि नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS के तहत, जिन कर्मचारियों की सैलरी कम है या जो देर से नौकरी में आए हैं, उन्हें रिटायरमेंट के बाद बहुत मामूली पेंशन मिलती है। इससे उनकी बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
NC-JCM ने क्या कड़ा रुख अपनाया
NC-JCM ने अपने ज्ञापन में एक बड़ी बात कही है। उनका कहना है कि 1 जनवरी 2004 के बाद केंद्र सरकार की नौकरी में आए कर्मचारियों के लिए तय पेंशन योजना की जगह NPS लागू करने का सरकार का फैसला गैरकानूनी है। इसके पीछे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया है जिसमें कहा गया है कि पेंशन एक तरह का संपत्ति अधिकार है, जिसे कानूनी रूप से लागू कराया जा सकता है।
संगठन का यह भी कहना है कि NPS में मिलने वाली पेंशन बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है, जिससे बुढ़ापे की सामाजिक सुरक्षा कमजोर होती है। सीधी बात यह है कि जब शेयर बाजार गिरता है, तो पेंशन का पैसा भी हिल जाता है, और यही बात कर्मचारियों को डराती है।
यूनिफाइड पेंशन स्कीम पर भी उठे सवाल
अब बात करते हैं यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS की। सरकार ने इसे NPS और OPS का मिला-जुला रूप बताकर पेश किया था, लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इसे उतना समर्थन नहीं मिला जितनी उम्मीद थी। कर्मचारियों को लगता है कि UPS असली पुरानी पेंशन योजना जैसी सुरक्षा नहीं देती।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 से केंद्रीय कर्मचारियों के लिए NPS लागू किया था। इसके बाद ज्यादातर राज्यों ने भी इसे अपना लिया। लेकिन बाद में कुछ राज्यों ने अपने कर्मचारियों के दबाव में आकर पुरानी पेंशन योजना को फिर से बहाल कर दिया, जिससे केंद्र के कर्मचारियों की उम्मीद और बढ़ गई थी।
