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लाल किले से गूंजा वंदे मातरम्, PM मोदी ने युवाओं को सौंपी विकसित भारत की कमान

PM Modi 80th Independence Day speech

PM Modi 80th Independence Day speech : 80वें स्वतंत्रता दिवस की सुबह लाल किले का माहौल कुछ अलग ही था। तिरंगा फहरने से पहले आसमान में वायुसेना के दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर मंडरा रहे थे, फूलों की बारिश की तैयारी के साथ। ठीक उसी पल जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ध्वजारोहण किया, 21 तोपों की सलामी गूंजी और आसमान से पंखुड़ियां बरसने लगीं। इसी के साथ शुरू हुआ भारत के 80 साल के सफर का एक नया अध्याय।

राजघाट से लाल किले तक

दिन की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने राजघाट पहुंचकर की, जहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वे सीधे लाल किले रवाना हुए, जहां रक्षा मंत्री और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने उनका स्वागत किया। गार्ड ऑफ ऑनर की रस्म पूरी होने के बाद प्रधानमंत्री प्राचीर की ओर बढ़े, जहां लगभग पांच हजार विशिष्ट अतिथि इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। यह मोदी का लगातार 13वां स्वतंत्रता दिवस संबोधन था, जिसके साथ वे पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद ऐसा करने वाले दूसरे प्रधानमंत्री बन गए।

आजादी के बाद पहली बार प्राचीर से वंदे मातरम्

इस साल के आयोजन की सबसे खास बात रही राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ। संसद से जुड़े प्रस्ताव के बाद पहली बार लाल किले के औपचारिक समारोह में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले और बाद में बजाया गया। सभा स्थल पर मौजूद बैंड की धुन के साथ पूरा माहौल राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हर घर तिरंगा है, हर मन तिरंगा है, और देश नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने उन स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।


सुबह प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया जिनके साहस और बलिदान से देश को औपनिवेशिक शासन से मुक्ति मिली, और कहा कि उनके सपनों को पूरा करने की दिशा में आज पूरा देश विकसित भारत के निर्माण में जुटा है।

युवाओं के लिए बड़ा ऐलान: एक करोड़ को मिलेगा AI प्रशिक्षण

इस बार का संबोधन खासतौर पर युवाओं पर केंद्रित रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के सफर में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है और इसके सबसे बड़े लाभार्थी भी देश के युवा ही होंगे। इसी क्रम में उन्होंने एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में प्रशिक्षित करने की योजना का ऐलान किया।


प्रधानमंत्री ने भारतीय कंपनियों के लिए भी एक बड़ा लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि दुनिया की शीर्ष 500 कंपनियों की फॉर्च्यून सूची में भारत की कम से कम 50 कंपनियां शामिल होनी चाहिए, और सवाल उठाया कि आखिर भारत इस मुकाम तक क्यों न पहुंचे।

'सप्तधारा' यानी सात धाराओं का सुधार खाका

प्रधानमंत्री ने देश की प्रगति के अगले चरण के लिए 'सप्तधारा' नाम से सात प्रमुख सुधार क्षेत्रों की रूपरेखा पेश की। उन्होंने कहा कि इन सात धाराओं की ताकत से आने वाले पांच से सात वर्षों में देश वह हासिल करेगा जो पिछले पांच-सात दशकों में नहीं हो पाया। इस दौरान उन्होंने देश की जनता से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

'दिमागी नक्सल' पर सख्त चेतावनी

अपने संबोधन के एक गंभीर हिस्से में प्रधानमंत्री ने नक्सल-माओवादी हिंसा के लगभग समाप्त होने की बात कही और कहा कि देश इसके पूर्ण उन्मूलन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने एक नया शब्द गढ़ते हुए 'दिमागी नक्सल' का जिक्र किया। उनका इशारा उन लोगों की ओर था जो माओवादी सोच रखते हुए सत्ता के गलियारों तक पहुंच बना चुके हैं। प्रधानमंत्री ने ऐसे तत्वों की पहचान और उन्हें समाज से अलग-थलग करने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि देश का विकास बाधित न हो।

महिला सशक्तीकरण और डिजिटल जनगणना की अपील

प्रधानमंत्री ने प्राचीर से सभी राजनीतिक दलों से एक साझा अपील भी की। उन्होंने कहा कि सभी दलों को महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर आगे आना चाहिए और इसे राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना चाहिए।


संबोधन के अंत में उन्होंने नागरिकों से आगामी जनगणना को लेकर भी एक अनुरोध किया। उन्होंने लोगों से कहा कि वे अपने परिवार से जुड़ी सही जानकारी डिजिटल माध्यम से साझा करें, ताकि जनगणना की प्रक्रिया पूरी तरह त्रुटिरहित हो सके।

संबोधन के बाद युवाओं से सीधा संवाद

अपना भाषण पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री ने लाल किले पर मौजूद एनसीसी कैडेट्स और छात्रों से मुलाकात की और उनसे बातचीत की। यह पल समारोह की औपचारिकता से हटकर एक आत्मीय क्षण बन गया, जहां देश के भविष्य की झलक युवा चेहरों में साफ दिख रही थी।

इस पूरे आयोजन ने एक बात फिर स्पष्ट कर दी कि 2047 तक विकसित भारत का सपना अब सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि नीति, तकनीक और जनभागीदारी से जुड़ी एक ठोस दिशा बन चुका है, जिसमें देश के युवाओं को केंद्र में रखा जा रहा है।