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DGP कैलाश मकवाना ने नरसिंहपुर पुलिस की थपथपाई पीठ, साइबर गिरोह का किया था खात्मा

नरसिंहपुर पुलिस ने 15 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा कर मिसाल पेश की है। 180 म्यूल खातों के नेटवर्क को तोड़ने वाली टीम को DGP कैलाश मकवाना ने नकद पुरस्कार से सम्मानित किया है।

Narsinghpur Cyber Fraud : आज के दौर में जहां अपराधी डिजिटल रास्तों का इस्तेमाल कर लोगों की मेहनत की कमाई डकार रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश की नरसिंहपुर पुलिस ने एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसकी गूंज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। नरसिंहपुर की विशेष पुलिस टीम ने करोड़ों रुपये के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का खुलासा करते हुए ‘म्यूल अकाउंट’ चलाने वाले एक बड़े गिरोह को बेनकाब किया है।

इस शानदार उपलब्धि और तत्परता को देखते हुए मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना ने खुद टीम को सम्मानित किया। DGP ने न केवल पुलिसकर्मियों की तारीफ की, बल्कि पूरी टीम को नकद पुरस्कार देकर उनकी मेहनत का मान बढ़ाया।

आखिर क्या था यह पूरा मामला और कैसे हुई कार्रवाई?

नरसिंहपुर पुलिस को पिछले कुछ समय से लगातार साइबर ठगी की शिकायतें मिल रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. ऋषिकेश मीना ने एक विशेष टीम का गठन किया। जब पुलिस ने गहराई से जांच शुरू की, तो परत दर परत चौंकाने वाले खुलासे हुए। पुलिस ने पाया कि ठगों ने आम लोगों के बैंक खातों को किराए पर लेकर एक मकड़जाल बुन रखा था।

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जांच में सामने आया कि ठगों ने करीब 180 ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल किया, जिन्हें तकनीकी भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। इन खातों के जरिए देखते ही देखते 15 करोड़ रुपये से ज्यादा का संदिग्ध लेनदेन किया गया था। पुलिस की इस टीम ने तकनीकी विश्लेषण और जमीनी स्तर पर सूचनाएं जुटाकर उस गिरोह का पर्दाफाश किया जो इन खातों को संचालित कर रहा था।

क्या होते हैं म्यूल अकाउंट और कैसे काम करता है यह गिरोह?

आम आदमी के लिए यह समझना जरूरी है कि ये ठग काम कैसे करते हैं। ‘म्यूल अकाउंट’ असल में ऐसे खाते होते हैं जो सीधे तौर पर अपराधियों के नहीं होते। ये ठग गांव-देहात या कम पढ़े-लिखे लोगों को थोड़े से पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं या उनके मौजूदा खातों को किराए पर ले लेते हैं।

जब ये ठग किसी के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी करते हैं, तो शिकार से लूटा गया पैसा सीधे इन्हीं म्यूल खातों में ट्रांसफर किया जाता है। इससे पुलिस को असली अपराधी तक पहुंचने में काफी मुश्किल होती है क्योंकि कागजों पर खाता किसी बेगुनाह का दिख रहा होता है। नरसिंहपुर पुलिस ने इसी गुत्थी को सुलझाया और 180 खातों की कड़ी जोड़ते हुए ठगों के साम्राज्य को चोट पहुंचाई।

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पीड़ितों को वापस मिले 53 लाख रुपये, 45 लाख अब भी होल्ड पर

पुलिस की यह कार्रवाई केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने आम जनता के पैसे बचाने पर भी पूरा जोर दिया। बीते एक साल के भीतर नरसिंहपुर पुलिस ने शानदार काम करते हुए साइबर फ्रॉड के पीड़ितों को लगभग 53 लाख रुपये वापस दिलवाए हैं। यह वह राशि है जो ठगों के खातों से पुलिस ने वक्त रहते रिकवर कर ली थी।

इसके अलावा, पुलिस ने विभिन्न संदिग्ध खातों में करीब 45 लाख रुपये की राशि को ‘होल्ड’ यानी फ्रीज करवा दिया है, जिसे कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीड़ितों को लौटाने की तैयारी है। साइबर अपराध की दुनिया में इतनी बड़ी रकम की रिकवरी करना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती होती है, जिसमें नरसिंहपुर पुलिस खरी उतरी है।

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DGP कैलाश मकवाना ने बढ़ाया टीम का मनोबल

पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान DGP कैलाश मकवाना ने नरसिंहपुर की इस विशेष टीम की रणनीतिक सोच और तकनीकी कौशल की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से टीम ने 15 करोड़ रुपये के लेनदेन को ट्रैक किया और 180 बैंक खातों के नेटवर्क को तोड़ा, वह दूसरे जिलों की पुलिस के लिए भी एक सीख है।

DGP ने टीम के सदस्यों को नकद इनाम देते हुए कहा कि आज के समय में पुलिस को अपराधियों से दो कदम आगे रहने की जरूरत है। उन्होंने टीम को भविष्य में भी इसी तरह की मुस्तैदी और ईमानदारी से काम करने के लिए प्रेरित किया। नरसिंहपुर पुलिस की इस सफलता ने न केवल जिले बल्कि पूरे राज्य का नाम रोशन किया है।

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Alok Singh

मेरा नाम आलोक सिंह है मैं भगवान नरसिंह की नगरी नरसिंहपुर से हूं ।और पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में आया था ।मुझे पत्रकारिता मैं इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया का 20 वर्ष का अनुभव है खबरों को प्रमाणिकता के साथ लिखने के हुनर में माहिर हूं।

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