पीएफ निकासी के नियमों में बड़ा बदलाव, अब कुछ ही दिनों में मिलेगा आपका पैसा
श्रम मंत्रालय ने ईपीएफओ सिस्टम को किया पूरी तरह डिजिटल; 5 लाख तक के क्लेम अब ऑटो मोड में होंगे सेटल, नौकरी बदलने पर पीएफ ट्रांसफर का झंझट खत्म।
EPFO Claim Settlement New Rules 2026:कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने निजी क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए अपने कार्य संचालन में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। केंद्र सरकार ने पीएफ निकासी, खाता हस्तांतरण और पेंशन वितरण की पूरी प्रक्रिया को न केवल तेज कर दिया है, बल्कि इसे पहले के मुकाबले कहीं अधिक पारदर्शी भी बनाया है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य तकनीक के माध्यम से मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और लाभार्थियों को बिना किसी देरी के उनके हक का पैसा पहुंचाना है।
श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने हाल ही में लोकसभा में इन सुधारों की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने सदन को बताया कि सरकार का प्राथमिक लक्ष्य ईपीएफओ के पूरे ढांचे को ‘यूजर फ्रेंडली’ और सुरक्षित बनाना है। इसके लिए डिजिटल और ऑटोमेटेड प्रणालियों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि देश के किसी भी कोने में बैठा कर्मचारी अपनी जमा पूंजी पर त्वरित नियंत्रण रख सके।
सेंट्रलाइज्ड पेंशन सिस्टम से रुकावटें हुईं दूर
पेंशनर्स के लिए सबसे बड़ी राहत ‘सेंट्रलाइज्ड पेंशन पेमेंट सिस्टम’ (CPPS) के रूप में सामने आई है। इसे 1 जनवरी 2025 से देश के सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में प्रभावी रूप से लागू किया जा चुका है। इस आधुनिक प्रणाली की मदद से अब लगभग 70 लाख पेंशनभोगियों को हर महीने एक निश्चित समय पर पेंशन मिल रही है।
इस व्यवस्था ने उस पुरानी समस्या को खत्म कर दिया है जिसमें डेटा ट्रांसफर या क्षेत्रीय कार्यालयों के बीच समन्वय की कमी के कारण पेंशन रुक जाती थी। अब पेंशन सीधे केंद्रीयकृत तरीके से बिना किसी मानवीय त्रुटि के खातों में भेजी जा रही है।
ऑटो मोड में करोड़ों क्लेम का निपटारा
दावा निपटान की गति को बढ़ाने के लिए ईपीएफओ ने ‘ऑटो मोड’ सिस्टम का विस्तार किया है। चालू वित्त वर्ष में 25 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, 5 लाख रुपये तक की सीमा वाले करोड़ों दावों का निपटारा स्वचालित तरीके से किया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कुल एडवांस क्लेम में से लगभग 71.37 प्रतिशत का सेटलमेंट ऑटो मोड के जरिए सफलतापूर्वक पूरा हुआ। इस प्रक्रिया के माध्यम से अब तक 51,620 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है।
72 घंटे के भीतर खाते में आएगी रकम
ईपीएफओ की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि क्लेम सेटलमेंट की अवधि में भारी कटौती करना है। कुछ समय पहले तक पीएफ निकालने के आवेदन पर कार्यवाही करने में 15 से 20 दिनों का समय लगता था।
हालांकि, ऑनलाइन सिस्टम और कागजी कार्यवाही को न्यूनतम करने के बाद अब यह समय घटकर औसतन 3 दिन से भी कम रह गया है। इसका सीधा लाभ उन कर्मचारियों को मिल रहा है जिन्हें आपातकालीन स्थितियों में तुरंत आर्थिक सहायता की आवश्यकता होती है।
नौकरी बदलने पर खुद ट्रांसफर होगा पीएफ
एक कंपनी से दूसरी कंपनी में जाने वाले कर्मचारियों के लिए ईपीएफ खाते का हस्तांतरण हमेशा से एक जटिल प्रक्रिया रही है। लेकिन अब ईपीएफओ ने इसे पूरी तरह सुव्यवस्थित कर दिया है। यदि किसी कर्मचारी का केवाईसी (KYC) अपडेट है, तो नौकरी बदलने की स्थिति में उसका पीएफ फंड नए खाते में अपने आप ट्रांसफर हो जाता है।
इसमें अब पुराने या नए नियोक्ता (Employer) की मंजूरी के लिए लंबे इंतजार की जरूरत नहीं रह गई है। फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, 70.5 लाख से अधिक ऑटो ट्रांसफर क्लेम बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के संपन्न किए जा चुके हैं, जिससे कर्मचारियों का समय और श्रम दोनों बच रहे हैं।












