IAS officers property list MP : जानिए मध्य प्रदेश के सबसे अमीर IAS के बारे में इस जिले के कलेक्टर का प्लॉट 16 साल में सस्ता हुआ
IAS officers property list MP : मध्य प्रदेश में प्रशासनिक सेवा से जुड़े अधिकारियों की संपत्ति को लेकर सामने आई नई जानकारी कई दिलचस्प तथ्य बताती है। राज्य के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों द्वारा घोषित संपत्ति के आंकड़ों से पता चलता है कि प्रदेश में काम कर रहे 391 आईएएस अधिकारियों में अपर मुख्य सचिव Manu Srivastava सबसे अधिक संपत्ति वाले अधिकारी हैं। दूसरी ओर, कई जिलों के कलेक्टर ऐसे भी हैं जिनके पास खुद का घर या खेती की जमीन तक नहीं है।
यह जानकारी अधिकारियों द्वारा घोषित अचल संपत्ति के विवरण से सामने आई है। आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि प्रशासनिक सेवा में काम करने वाले अधिकारियों की आर्थिक स्थिति एक जैसी नहीं होती। किसी के पास करोड़ों की संपत्ति है, तो कई अधिकारी अभी भी निजी संपत्ति के मामले में काफी पीछे हैं।
सबसे अधिक संपत्ति वाले आईएएस अधिकारी
मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव Manu Srivastava ने अपनी कुल अचल संपत्ति लगभग 19 करोड़ 50 लाख रुपये बताई है। यह आंकड़ा प्रदेश के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की तुलना में काफी अधिक है।
वहीं प्रदेश के मुख्य सचिव Anurag Jain की घोषित अचल संपत्ति करीब 4 करोड़ 15 लाख रुपये है। यदि दोनों अधिकारियों की संपत्ति की तुलना की जाए तो मनु श्रीवास्तव की संपत्ति मुख्य सचिव अनुराग जैन से लगभग 4.7 गुना अधिक है।
वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर कार्यरत अधिकारियों की संपत्ति का यह अंतर यह भी दिखाता है कि निवेश, पारिवारिक संपत्ति और व्यक्तिगत खरीद जैसे कई कारक किसी अधिकारी की कुल संपत्ति को प्रभावित करते हैं।
अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति
कुछ अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने भी अपनी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक किया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव Neeraj Mandloi के पास करीब 4 करोड़ 97 लाख रुपये की अचल संपत्ति दर्ज है।
इसी तरह Sanjay Dubey ने लगभग 4 करोड़ 67 लाख रुपये की संपत्ति बताई है।
वरिष्ठ अधिकारी Dr. Rajesh Rajora के पास लगभग 1 करोड़ 73 लाख रुपये की अचल संपत्ति है।
इसके अलावा Shiv Shekhar Shukla ने करीब 2 करोड़ 50 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है, जबकि Raghvendra Singh की संपत्ति करीब 68 लाख रुपये बताई गई है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि वरिष्ठ पदों पर बैठे अधिकारियों की संपत्ति का दायरा कुछ लाख से लेकर कई करोड़ रुपये तक फैला हुआ है।
55 जिलों में से 12 कलेक्टरों के पास निजी संपत्ति नहीं
मध्य प्रदेश के 55 जिलों के कलेक्टरों की संपत्ति का विवरण भी कई तरह के अंतर दिखाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 12 जिलों के कलेक्टरों ने अपनी अचल संपत्ति “निल” बताई है।
इसका मतलब यह है कि इन अधिकारियों के नाम पर न तो कोई मकान दर्ज है और न ही खेती की जमीन। कई बार ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि अधिकारी सरकारी आवास में रहते हैं और निजी संपत्ति खरीदने की योजना बाद में बनाते हैं।
इसके विपरीत 17 कलेक्टर ऐसे हैं जिनके पास मकान, दुकान और कृषि भूमि तीनों प्रकार की संपत्ति मौजूद है। यानी कुछ अधिकारियों ने अपने करियर के दौरान जमीन और संपत्ति में निवेश किया है।
सोनिया मीणा के प्लॉट की कहानी अलग
इन आंकड़ों में एक मामला खास ध्यान खींचता है। नर्मदापुरम की कलेक्टर Sonia Meena की संपत्ति का विवरण सामान्य रियल एस्टेट ट्रेंड से बिल्कुल अलग दिखाई देता है।
उन्होंने वर्ष 2010 में लगभग 4 लाख 50 हजार रुपये में एक प्लॉट खरीदा था। आम तौर पर जमीन की कीमत समय के साथ बढ़ती है, लेकिन इस मामले में स्थिति उलटी रही।
करीब 16 साल बाद उसी प्लॉट की कीमत घटकर लगभग 1 लाख रुपये रह गई है। इसका मतलब है कि उस संपत्ति का मूल्य करीब साढ़े चार गुना कम हो गया। यह उदाहरण दिखाता है कि हर रियल एस्टेट निवेश मुनाफे वाला नहीं होता और बाजार की स्थिति, स्थान और विकास की गति जैसे कारक जमीन की कीमत पर असर डालते हैं।
सार्वजनिक किए जाते हैं अधिकारियों की संपत्ति की जानकारी
आईएएस अधिकारियों को समय-समय पर अपनी संपत्ति का विवरण सरकार के सामने प्रस्तुत करना होता है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि अधिकारियों की आय और संपत्ति के बीच संतुलन बना रहे।
इस प्रक्रिया से जनता को यह जानकारी भी मिलती है कि सरकारी सेवा में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारी किन आर्थिक परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। कई बार इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि कुछ अधिकारी लंबे समय तक सरकारी आवास में रहने के कारण निजी संपत्ति खरीदने की जल्दी नहीं करते।













