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खुद को IAS बताकर नरसिंहपुर की डॉक्टर से 3 लाख की ठगी, आरोपी वाराणसी से पकड़ाया

Narsinghpur fake IAS fraud

Narsinghpur fake IAS fraud : नरसिंहपुर की एक महिला डॉक्टर मैट्रिमोनियल साइट जीवनसाथी डॉट कॉम पर जीवनसाथी ढूंढ रही थीं। इसी दौरान उनकी बातचीत भदोही, उत्तर प्रदेश के रहने वाले संजय कुमार नाम के एक व्यक्ति से शुरू हुई। संजय ने खुद को डॉक्टर के साथ-साथ IAS अधिकारी बताया। कुछ ही दिनों में यह भरोसा इतना गहरा हो गया कि महिला ने उसे करीब 3 लाख रुपये भेज दिए। बाद में सच्चाई सामने आई तो पूरा मामला ही झूठ निकला।

यह घटना सिर्फ एक ठगी की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि ऑनलाइन मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म पर पहचान का झूठा दावा कितनी आसानी से किसी पढ़े-लिखे और समझदार व्यक्ति को भी निशाना बना सकता है।

कैसे बुना गया झूठ का जाल

पुलिस के अनुसार आरोपी ने खुद को एमबीबीएस और एमडी पटना (बिहार) से तथा डीएम भुवनेश्वर (ओडिशा) से करने का दावा किया। इतना ही नहीं, उसने यह भी बताया कि वह यूपीएससी परीक्षा पास कर चुका है और उसे मध्यप्रदेश कैडर मिला है। फिलहाल वह जिला धार में एसडीएम के पद पर तैनात होने की बात कहता रहा।

आरोपी ने प्रार्थिया को यह भी विश्वास दिलाया कि उसके वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से करीबी संबंध हैं। यही भरोसा उसने आगे चलकर पैसे ऐंठने के लिए इस्तेमाल किया। मदद करने का आश्वासन देकर उसने अलग-अलग तरीकों से महिला डॉक्टर से करीब 3 लाख रुपये प्राप्त कर लिए। जब शक गहराया तो प्रार्थिया ने 10 अगस्त 2026 को थाना कोतवाली, नरसिंहपुर में शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

एसपी ने बनाई विशेष जांच टीम

मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने आरोपी की पहचान, गिरफ्तारी और मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की। टीम को तकनीकी और अन्य जरूरी साधनों का उपयोग कर आरोपी को जल्द पकड़ने तथा आगे की वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

जांच के दौरान टीम ने जीवनसाथी डॉट कॉम और आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट की तकनीकी पड़ताल की। शुरुआती जांच में ही कई ऐसे संकेत मिले जिनसे लगा कि आरोपी खुद को गलत तरीके से IAS अधिकारी दिखा रहा था। जब जिला धार प्रशासन से पुष्टि मांगी गई, तो स्पष्ट हो गया कि उस नाम का कोई अधिकारी वहां पदस्थ ही नहीं है। रिकॉर्ड खंगालने पर भी ऐसे किसी IAS अधिकारी का अस्तित्व सामने नहीं आया।

वाराणसी में दबिश, आरोपी गिरफ्तार

तकनीकी सबूतों और पतासाजी के आधार पर पुलिस टीम वाराणसी, उत्तर प्रदेश रवाना हुई। वहां दबिश देकर आरोपी संजय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। आरोपी सिर्फ ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं था, बल्कि वह अपने गांव और परिवार के लोगों को भी लंबे समय से यही बताता आ रहा था कि वह एसडीएम के पद पर तैनात है। इसी झूठे रुतबे के सहारे वह अपने आसपास के लोगों का भरोसा जीतता रहा।

AI से फोटो एडिट कर बनाई फर्जी पहचान

जांच में एक तकनीकी पहलू भी सामने आया जो इस मामले को और गंभीर बनाता है। आरोपी लोगों को प्रभावित करने के लिए AI आधारित तकनीक से फोटो एडिट करता था। वह वरिष्ठ अधिकारियों, सरकारी कार्यक्रमों और प्रशासनिक संस्थानों से जुड़ी तस्वीरों में छेड़छाड़ कर खुद को उनमें शामिल दिखाता था।

इन एडिटेड फोटो को वह अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड करता था, ताकि देखने वाले उसे सच में एक बड़ा अधिकारी समझें। यही रणनीति उसने महिला डॉक्टर के साथ भी अपनाई थी, जिससे उसका भरोसा जीतना आसान हो गया।

आज के दौर में जब AI टूल्स आम लोगों तक भी आसानी से पहुंच रहे हैं, ऐसे मामले यह चेतावनी देते हैं कि केवल फोटो या सोशल मीडिया प्रोफाइल देखकर किसी की सरकारी पहचान पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।

अभी भी जारी है जांच

पुलिस आरोपी संजय कुमार, निवासी बभनौती, जिला भदोही से विस्तृत पूछताछ कर रही है। उसके बैंक खातों, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं आरोपी ने इसी तरह अन्य लोगों को तो निशाना नहीं बनाया।

नरसिंहपुर पुलिस की अपील

नरसिंहपुर पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि मैट्रिमोनियल वेबसाइट, सोशल मीडिया या मोबाइल कॉल के जरिए संपर्क करने वाले किसी भी अनजान व्यक्ति की पहचान बिना पुख्ता जांच किए भरोसा न करें। सरकारी पद, डिग्री या रुतबे से जुड़े किसी भी दावे को संबंधित विभाग या आधिकारिक स्रोत से जरूर सत्यापित करें।