WhatsApp Scam : ग्वालियर में रहने वाले एक 70 साल के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) साहब के साथ जो हुआ, उसे सुनकर हर कोई हैरान है। हम अक्सर सोचते हैं कि साइबर ठग सिर्फ उन्हीं लोगों को लूटते हैं जिन्हें तकनीक की ज्यादा समझ नहीं होती, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। जब वित्तीय मामलों के पक्के खिलाड़ी माने जाने वाले CA साहब खुद करोड़ों की ठगी का शिकार हो सकते हैं, तो आम आदमी को तो और भी ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। यह घटना हमें बताती है कि आज के दौर में शातिर ठग कितने शातिर हो गए हैं। ग्वालियर में 70 वर्षीय एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से ऑनलाइन निवेश के नाम पर 21 करोड़ 5 लाख 92 हजार रुपये की कथित साइबर ठगी का मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद राज्य साइबर सेल ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह मामला देश के बड़े ऑनलाइन निवेश फ्रॉड में शामिल माना जा रहा है।
व्हाट्सएप पर शुरू हुई बातचीत, फिर बढ़ता गया भरोसा
पुलिस के मुताबिक, दिसंबर 2025 में पीड़ित के व्हाट्सएप पर खुद को "दिव्या सिंह" बताने वाली एक महिला का संदेश आया। सामान्य बातचीत के बाद उसने डिजिटल करेंसी और ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए कम समय में अच्छा मुनाफा कमाने का दावा किया। बातों को भरोसेमंद बनाने के लिए महिला ने एक ऑनलाइन निवेश पोर्टल का लिंक भेजा। रजिस्ट्रेशन के बाद पोर्टल पर निवेश की रकम लगातार बढ़ती हुई दिखाई देने लगी। यही वह तरीका था जिससे ठगों ने धीरे-धीरे पीड़ित का विश्वास जीत लिया। पहले छोटा मुनाफा दिखाया, फिर करोड़ों रुपये निवेश करवा लिए साइबर ठगों की रणनीति पहले से तैयार थी। शुरुआत में छोटी रकम निवेश करवाई गई और उस पर अच्छा रिटर्न दिखाया गया। इतना ही नहीं, एक बार सीमित राशि सफलतापूर्वक निकलवाकर यह भरोसा भी दिलाया गया कि प्लेटफॉर्म पूरी तरह सुरक्षित है। जब भरोसा मजबूत हो गया, तब निवेश की रकम लगातार बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। पीड़ित ने अलग-अलग तारीखों में आरटीजीएस, यूपीआई और अन्य बैंकिंग माध्यमों से कई बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए। जून 2026 तक कुल ट्रांजेक्शन बढ़कर 21 करोड़ 5 लाख 92 हजार रुपये तक पहुंच गया।
पैसे निकालने की बारी आई तो शुरू हो गई नई-नई मांगें
असल खेल तब सामने आया जब पीड़ित ने अपनी जमा राशि और कथित मुनाफा निकालने की कोशिश की।ठगों ने पहले टैक्स जमा करने की बात कही। फिर प्रोसेसिंग चार्ज का बहाना बनाया गया। इसके बाद अलग-अलग औपचारिकताओं के नाम पर और पैसे मांगे जाने लगे। मामला यहीं नहीं रुका। बाद में "रिस्क मार्जिन" के नाम पर भी करोड़ों रुपये जमा करने का दबाव बनाया गया। जब हर बार नई शर्त सामने आने लगी, तब पीड़ित को शक हुआ। दोस्तों से चर्चा करने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे एक सुनियोजित साइबर ठगी का शिकार बन चुके हैं।
देश के कई राज्यों तक पहुंची जांच
शिकायत दर्ज होने के बाद राज्य साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम देश के कई राज्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। जांच एजेंसियां बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, आईपी एड्रेस, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की मदद से पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दक्षिण भारत के कई बैंक खातों में सबसे अधिक रकम भेजी गई है।