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भोपाल-इंदौर के बीच बनेगा नया 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, 2 घंटे के सफर का रास्ता होगा आसान

Bhopal-Indore Expressway Update

 

Mp Big News,Bhopal-Indore Expressway Update :  अगर आप भी भोपाल-इंदौर के बीच अक्सर सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बड़े काम की है। अभी दोनों शहरों के बीच आने-जाने में साढ़े तीन से चार घंटे लग जाते हैं। लेकिन आने वाले कुछ सालों में यह सफर सिर्फ दो घंटे में पूरा हो जाएगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भोपाल-इंदौर के बीच बनने वाले 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के एलाइनमेंट को मंजूरी दे दी है। इसका मतलब है कि अब यह प्रोजेक्ट जमीन पर उतरने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गया है।

क्या है ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और यह कहां बनेगा

एक बात साफ समझ लीजिए, यह पुरानी भोपाल-इंदौर सड़क को चौड़ा करने वाला प्रोजेक्ट नहीं है। मौजूदा सड़क को अपग्रेड करने वाले काम को ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट कहते हैं। जबकि यह एक्सप्रेस-वे बिल्कुल नए रूट पर, नई जमीन पर बनाया जाएगा। इसी वजह से इसे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे नाम दिया गया है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 4 हजार करोड़ रुपए है। सरकार ने निर्माण पूरा करने का लक्ष्य जून 2029 तय किया है।

मध्य प्रदेश सरकार पिछले करीब पांच सालों से केंद्र सरकार के स्तर पर इस हाईस्पीड कॉरिडोर के लिए प्रयास कर रही थी। अब एलाइनमेंट मंजूर होने के बाद यह रास्ता साफ हो गया है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, अब प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने का काम शुरू होगा। उम्मीद है कि करीब 10 महीने के भीतर निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएगा।

एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर से कैसे बचेगा समय

इस एक्सप्रेस-वे की सबसे बड़ी खासियत है इसका एक्सेस-कंट्रोल्ड होना। आम हाईवे पर तो कहीं से भी गाड़ियां एंट्री और एग्जिट ले लेती हैं। इसी वजह से रास्ते में जगह-जगह जाम और रुकावट मिलती है। लेकिन इस एक्सप्रेस-वे पर सिर्फ चुनिंदा जगहों पर ही एंट्री-एग्जिट पॉइंट बनाए जाएंगे। भोपाल और इंदौर के बीच सिर्फ दो से तीन बड़े कट प्वाइंट रखे जाने की संभावना है। इससे लोकल ट्रैफिक एक्सप्रेस-वे पर नहीं आ पाएगा और लंबी दूरी की गाड़ियां लगातार रफ्तार से दौड़ सकेंगी।

अभी कितना लंबा है भोपाल-इंदौर का सफर

फिलहाल भोपाल से इंदौर के बीच सड़क मार्ग से दूरी करीब 195 किलोमीटर है। यह सफर देवास और सीहोर होते हुए नेशनल हाईवे 52 से तय किया जाता है। ट्रैफिक दबाव और रास्ते में कई जगह रुकावटों की वजह से इस सफर में साढ़े तीन से चार घंटे लग जाते हैं। नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यह दूरी घटकर 160 से 161 किलोमीटर रह जाएगी। यानी करीब 35 किलोमीटर की सीधी बचत होगी और सफर का समय घटकर दो घंटे रह जाएगा।

भोपाल को कैसे मिलेगी कनेक्टिविटी

भोपाल शहर को इस एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए कोलार या वेस्टर्न कॉरिडोर के जरिए कनेक्टिविटी विकसित किए जाने की योजना है। मकसद यही है कि भोपाल के मुख्य इलाकों से एक्सप्रेस-वे तक पहुंचना आसान हो जाए। हालांकि शहर को जोड़ने का अंतिम स्वरूप प्रोजेक्ट के अगले चरण में तय होगा। इसके अलावा भोपाल के आसपास विकसित हो रहे क्षेत्रीय सड़क नेटवर्क से भी इसे जोड़ा जाएगा, जिससे राजधानी के नजदीकी कस्बों और औद्योगिक इलाकों तक पहुंच भी आसान होगी।

सिर्फ सफर नहीं, कारोबार को भी मिलेगी रफ्तार

यह एक्सप्रेस-वे सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि कारोबार और उद्योग जगत के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है। नए कॉरिडोर के आसपास औद्योगिक, व्यावसायिक और लॉजिस्टिक गतिविधियां विकसित होने की पूरी संभावना है। यानी आने वाले समय में इस रूट के किनारे लॉजिस्टिक हब और नए कारोबारी ठिकाने बनते दिख सकते हैं।

अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो भोपाल-इंदौर के बीच यह एक्सप्रेस-वे मध्य प्रदेश के दो सबसे बड़े शहरों के बीच की दूरी को न सिर्फ कम करेगा, बल्कि राज्य के आर्थिक विकास को भी नई रफ्तार देगा।