ऑपरेशन के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप, CBI ने नर्सिंग ऑफिसर को रंगे हाथों पकड़ा
Bhopal News : सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बिना किसी अवैध भुगतान के इलाज मिलना चाहिए। लेकिन जब इलाज के नाम पर पैसे मांगे जाने की शिकायत सामने आती है, तो मामला गंभीर हो जाता है। ऐसा ही एक मामला AIIMS भोपाल से सामने आया है, जहां केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक नर्सिंग ऑफिसर को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के बाद अस्पताल परिसर में काफी हलचल देखने को मिली।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता और मरीजों के अधिकारों को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई आम लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, शाजापुर निवासी विनोद मेवाड़ा अपनी मां का इलाज कराने AIIMS भोपाल पहुंचे थे। उनकी मां का कमर से जुड़ा ऑपरेशन होना था। परिवार का कहना है कि पहला ऑपरेशन 21 जुलाई को किया गया था। इसके बाद डॉक्टरों ने दूसरे ऑपरेशन की आवश्यकता बताई।
आरोप है कि इसी दौरान अस्पताल में तैनात एक नर्सिंग ऑफिसर ने ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के नाम पर पहले ₹16,500 की मांग की। बाद में कथित तौर पर रकम घटाकर ₹12,000 देने की बात कही गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि पैसे नहीं देने पर दूसरे ऑपरेशन में परेशानी आने की बात कही गई थी।
आयुष्मान कार्ड धारक होने के बावजूद पैसों की मांग का आरोप
शिकायत में यह भी बताया गया कि विनोद मेवाड़ा आयुष्मान भारत योजना के पात्र लाभार्थी हैं। इस योजना के तहत पात्र मरीजों को सूचीबद्ध अस्पतालों में तय शर्तों के अनुसार कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है।
ऐसे में ऑपरेशन के लिए अतिरिक्त रकम मांगे जाने का आरोप गंभीर माना जा रहा है। हालांकि, यह जांच का विषय है कि कथित मांग किस आधार पर की गई थी और उसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
शिकायत के बाद CBI ने बिछाया जाल
मामले की शिकायत मिलने के बाद CBI ने प्रारंभिक जांच की। एजेंसी के अनुसार, शिकायत की पुष्टि होने के बाद ट्रैप की योजना बनाई गई। निर्धारित योजना के तहत शिकायतकर्ता आरोपी को ₹12,000 देने पहुंचा।
जैसे ही कथित रिश्वत की रकम स्वीकार की गई, CBI की टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए आरोपी नर्सिंग ऑफिसर को रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसके बाद CBI ने आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी।
AIIMS जैसी संस्था पर सवाल
भोपाल AIIMS देश की उन प्रतिष्ठित संस्थाओं में से है, जहां लोग भरोसे के साथ इलाज कराने आते हैं। ऐसे में यह मामला संस्थान की साख पर सीधा असर डालता है। आयुष्मान भारत योजना का मकसद ही यही है कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बिना पैसे के अच्छा इलाज मिले। अगर वहीं भ्रष्टाचार घुस जाए, तो योजना का मतलब ही खत्म हो जाता है।
