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मध्यप्रदेश पुलिस में अब ऑनलाइन बनेगी ACR, प्रमोशन में देरी की टेंशन होगी खत्म

मध्यप्रदेश पुलिस में प्रमोशन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ACR रिकॉर्ड डिजिटल करने की तैयारी है, जिससे पुराने कागज तलाशने की परेशानी घटेगी और मूल्यांकन रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।
MP Police Promotion

Mp Big News,MP Police Promotion:  पुलिस विभाग में प्रमोशन अटकने की सबसे बड़ी वजह क्या रही है? जवाब है पुरानी गोपनीय चरित्रावली यानी ACR का समय पर न मिलना। मध्यप्रदेश में इस समस्या को जड़ से खत्म करने की तैयारी हो चुकी है।

राज्य के पुलिस मुख्यालय ने अब कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के अफसरों की ACR डिजिटल तरीके से तैयार करने का फैसला लिया है। यानी कागजी फाइलें ढूंढने का झंझट अब पुराने जमाने की बात हो जाएगी।

दरअसल पिछले कुछ सालों में प्रमोशन प्रक्रिया के दौरान कई जवानों की पुरानी ACR रिकॉर्ड में मिली ही नहीं। नतीजा यह हुआ कि उन्हें बरसों पहले साथ काम कर चुके अफसरों को ढूंढना पड़ा, कुछ मामलों में तो रिटायर हो चुके अफसरों से भी संपर्क करना पड़ा। इस पूरी कवायद में महीनों निकल गए और कई जवानों का प्रमोशन अटक गया। अब पुलिस मुख्यालय ने इस पूरी व्यवस्था को बदलने का रोडमैप तैयार कर लिया है। जानिए क्या-क्या बदलने वाला है और इससे आम पुलिसकर्मियों को कितनी राहत मिलेगी।

अब IPS अफसरों की तरह होगा ACR का हिसाब

नई व्यवस्था के तहत आम पुलिसकर्मियों की रिपोर्ट भी उसी तरीके से दर्ज होगी, जैसे अभी IPS और राज्य पुलिस सेवा के अफसरों की होती है। इसका मतलब है कि ACR की अवधि अब वित्तीय वर्ष के हिसाब से यानी 1 अप्रैल से 31 मार्च तक मानी जाएगी।पहले यह प्रक्रिया तय समय पर नहीं होती थी, जिससे रिकॉर्ड बिखर जाते थे। अब हर साल की रिपोर्ट एक तय समय-सीमा में ऑनलाइन दर्ज होगी और सिस्टम में सुरक्षित रहेगी।

समय पर एंट्री नहीं की तो मिलेगा अलर्ट

नई डिजिटल व्यवस्था में एक और बड़ा फायदा जुड़ रहा है। अगर किसी अधिकारी ने तय समय पर अपने अधीनस्थ की ACR ऑनलाइन दर्ज नहीं की, तो सिस्टम खुद अलर्ट भेजेगा। इससे रिपोर्ट भरने में होने वाली देरी काफी हद तक कम हो जाएगी।साथ ही एक तय समय-सीमा के बाद रिकॉर्ड में बदलाव करने की गुंजाइश भी सीमित कर दी जाएगी। इससे मनमाने ढंग से एंट्री बदलने या गलत जानकारी जोड़ने की आशंका भी घटेगी।

ट्रांसफर के दौरान बनने वाली दिक्कत भी होगी दूर

पुलिस महकमे में तबादले आम बात हैं, लेकिन इसी वजह से पार्ट असेसमेंट यानी आधी-अधूरी रिपोर्ट बनने की समस्या भी बनी रहती थी। नई व्यवस्था में सर्विस रूल्स को सख्ती से लागू किया जाएगा।

नियम के अनुसार, जिस अफसर के अधीन किसी जवान ने कम से कम 90 दिन तक काम किया हो, उसकी ACR वही अफसर दर्ज करेगा। इससे रिपोर्ट में स्पष्टता रहेगी और किसी एक अफसर पर पूरी जिम्मेदारी तय होगी।

अफसरों का क्या कहना है

सिपाहियों की ACR को ऑनलाइन करना और उसे वित्तीय वर्ष के हिसाब से व्यवस्थित करना एक जरूरी कदम है। उनका कहना है कि इससे रिकॉर्ड हमेशा सुरक्षित रहेगा और भविष्य में किसी भी जवान का प्रमोशन सिर्फ इसलिए नहीं रुकेगा क्योंकि उसकी पुरानी ACR उपलब्ध नहीं है।