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सागर शराब कांड में 15 से अधिक मौतों के बाद खुल रही परतें, आखिर कहां से आई थी यह संदिग्ध शराब?

Sagar Liquor Case

Mp Big News ,Sagar Liquor Case : सागर जिले की बंडा तहसील में इन दिनों मातम पसरा है। शनिवार रात से लेकर अब तक इलाके के कई गांवों में जहरीली शराब पीने से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अब तक 14 लोगों की जान जा चुकी है, और दर्जनों लोग अस्पतालों में जिंदगी-मौत के बीच झूल रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस शराब ने ये मौतें दीं, वह बाजार में सिर्फ 70 रुपये के क्वार्टर में बिक रही थी।

कैसे हुई घटना की शुरुआत

गोगरा खुर्द, नौरोजा और पाटन जैसे गांवों में शुक्रवार रात पहली मौत हुई थी। शुरुआत में इसे सामान्य मौत मानकर अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। लेकिन शनिवार को अचानक बड़ी संख्या में लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। उल्टी, सिरदर्द और धुंधला दिखने जैसी शिकायतों के साथ लोग बंडा के सिविल अस्पताल पहुंचने लगे। यहीं से प्रशासन को घटना की गंभीरता का अंदाजा हुआ। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर में गंभीर मरीजों को रेफर किया गया, जिनमें से एक मरीज को एयरलिफ्ट कर भोपाल एम्स तक भेजना पड़ा।

मिथाइल अल्कोहल बना मौत की वजह

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि शराब में मिथाइल अल्कोहल की मात्रा तय सीमा से कहीं ज्यादा थी। यही जहरीला रसायन मौतों की मुख्य वजह बना। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि कई मरीजों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है और उनका इलाज सागर मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल खुद अस्पताल पहुंचीं और मरीजों का हाल जाना।

ललितपुर से आई नकली शराब का नेटवर्क

जांच में पता चला है कि यह मिलावटी शराब उत्तर प्रदेश के ललितपुर से लाई गई थी और सागर के सीमावर्ती गांवों में सप्लाई की जा रही थी। पुलिस अब इस बात की तह तक जाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन स्थानीय लोग शामिल थे। लाइसेंसी शराब ठेकेदारों पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि सस्ते दाम पर बेचने के लिए शराब का नया, खतरनाक फॉर्मूला तैयार किया गया था।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

घटना के बाद पुलिस ने अब तक 30 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें बरेठी के लाइसेंसधारी मनीष लोधी, आशीष साहू और यशवंत सिंह के नाम भी शामिल हैं। करीब 10 आरोपी पुलिस हिरासत में लिए जा चुके हैं।

लापरवाही के आरोप में आबकारी विभाग के पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया है। इनमें सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे और सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते शामिल हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी को ग्वालियर अटैच कर दिया गया है। छह से ज्यादा शराब दुकानें सील की जा चुकी हैं, और इलाके में अवैध शराब के ठिकानों पर लगातार छापेमारी जारी है।

सीएम मोहन यादव का सख्त रुख

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार ने प्रभावित गांवों में डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग कराने की अपील की है, ताकि जिन लोगों ने यह शराब पी है, उनकी समय रहते पहचान हो सके।


देवरी के पूर्व विधायक हर्ष यादव ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि वे बीते 20 साल से अवैध शराब कारोबार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन प्रशासन की सुस्ती के कारण यह कारोबार बेखौफ चलता रहा।