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चोरी के शक में दो युवकों के साथ कथित बर्बरता, करंट देने का वीडियो वायरल; NCPCR ने लिया संज्ञान


Raisen Crime News : मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में दो युवकों के साथ कथित तौर पर बेहद अमानवीय व्यवहार किए जाने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि मोटर चोरी के शक में दोनों युवकों को पहले बांधा गया, फिर उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें बिजली के करंट के झटके भी दिए गए। वीडियो वायरल होने के बाद मामला सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इस पर प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। वहीं राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी इस मामले का संज्ञान लेने की बात कही है।

रायसेन के पिपलई डेम के पास की बताई जा रही घटना

जानकारी के मुताबिक यह मामला रायसेन कोतवाली थाना क्षेत्र के पिपलई डेम के आसपास का बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को कुछ दिन पुराना बताया जा रहा है। वीडियो में दो युवक रस्सी से बंधे दिखाई देते हैं और उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि दोनों युवकों पर मोटर चोरी का शक था। हालांकि यह आरोप पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। वीडियो में कुछ लोग कानून अपने हाथ में लेते हुए नजर आते हैं, जो दोनों युवकों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं।

कानून से पहले खुद सजा देने का आरोप

घटना को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि किसी पर चोरी का संदेह था, तो क्या उसे सजा देने का अधिकार किसी आम नागरिक को है? भारतीय कानून में किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अधिकार केवल न्यायालय को है। ऐसे में यदि वायरल वीडियो में दिख रही घटनाएं सही साबित होती हैं, तो यह कानून व्यवस्था और मानवाधिकार दोनों के लिहाज से गंभीर मामला माना जाएगा। विशेषज्ञ भी लगातार यही कहते हैं कि अपराध का संदेह होने पर पुलिस को सूचना देना ही कानूनी रास्ता है। किसी व्यक्ति को बंधक बनाना, मारपीट करना या कथित तौर पर बिजली का करंट देना गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ वीडियो

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर इसे लेकर लगातार चर्चा हो रही है। कई लोगों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि कुछ लोगों ने कानून अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई है। हालांकि वायरल वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें दिख रहे सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक आधिकारिक रूप से नहीं हुई है। इसलिए जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जा सकता।

NCPCR सदस्य प्रियांक कानूनगो ने जताई सख्त प्रतिक्रिया

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इस वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आयोग इस मामले का संज्ञान ले रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि चोरी के आरोप में युवकों को कथित तौर पर 'तालिबानी शैली' में सजा दिए जाने का वीडियो सामने आया है और इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं। चोरी के शक में दो युवकों के साथ कथित बर्बरता, करंट देने का वीडियो वायरल; NCPCR ने लिया संज्ञान उन्होंने यह भी कहा कि भारत में कानून का शासन है और किसी भी प्रकार की समानांतर या गैरकानूनी सजा स्वीकार नहीं की जा सकती। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही है।

पुलिस कर रही वीडियो की जांच

रायसेन पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान करने का प्रयास जारी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना कब हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही की जाएगी।