छिंदवाड़ा में गजब हुआ: टीचर्स के इश्क़ में बर्बाद हो रही थी पढ़ाई, बच्चे खुद 100 किलोमीटर चलकर पहुंचे कलेक्टर के पास
MP News : सोचिए, कक्षा पांचवीं से आठवीं तक के बच्चे इतने परेशान हो जाएं कि वो खुद अपने मां-बाप और गांव वालों को लेकर 100 किलोमीटर का सफर तय कर दें, सिर्फ इसलिए कि उनकी पढ़ाई बच जाए। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की जुन्नारदेव तहसील की सच्ची घटना है, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है।
आखिर हुआ क्या था स्कूल में
जुन्नारदेव के आदिवासी विभाग द्वारा संचालित एक स्कूल में दो गेस्ट टीचर तैनात थे। बच्चों और गांव वालों का कहना है कि दोनों टीचर पढ़ाने के बजाय आपस में समय बिताने में ज्यादा दिलचस्पी लेते थे।
आरोप है कि क्लास टाइम से पहले ही खत्म कर दी जाती थी। स्कूल की छुट्टी होते ही दोनों टीचर परिसर के एक कमरे में बैठ जाते थे। यह सिलसिला महीनों से चल रहा था, और इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा था। गांव वालों का कहना है कि जब बात-बात में समझाने से कुछ नहीं बदला, तो उन्होंने आखिरी रास्ता अपनाया।
बच्चे और परिजन पहुंच गए सीधे जिला मुख्यालय
पढ़ाई का इतना नुकसान होते देख कक्षा 5 से 8 तक के करीब 50 से 60 बच्चे अपने अभिभावकों और गांव के लोगों के साथ बस और दूसरे वाहनों में सवार होकर सीधे जिला मुख्यालय पहुंच गए। रास्ता कोई छोटा नहीं था, पूरे 100 किलोमीटर का सफर था।
यहां पहुंचकर बच्चों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने साफ शब्दों में बताया कि कैसे स्कूल में पढ़ाई ठप पड़ी है और बच्चों का भविष्य खतरे में है।
शिकायत मिलते ही प्रशासन ने दिखाई फुर्ती
बच्चों की इस हिम्मत भरी शिकायत का असर तुरंत दिखा। ट्राइबल वेलफेयर डिपार्टमेंट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बिना देर किए कार्रवाई कर दी। दोनों आरोपी गेस्ट टीचर्स को तत्काल नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। आदेश में यह भी साफ लिखा गया है कि आगे चलकर ये दोनों किसी भी स्कूल में पढ़ाने के लिए पात्र नहीं होंगे, यानी शिक्षण के क्षेत्र में उनका रास्ता हमेशा के लिए बंद हो गया है।
सिर्फ टीचर ही नहीं, स्कूल के प्रिंसिपल को भी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना गया। उन्हें नोटिस जारी किया गया है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई का प्रस्ताव वरिष्ठ अधिकारियों तक भेज दिया गया है।
अधिकारी ने खुद बताई पूरी बात
छिंदवाड़ा ट्राइबल वेलफेयर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर सत्येंद्र मरकाम ने इस मामले पर मीडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया कि छात्रों और ग्रामीणों की शिकायत मिलते ही मामले को गंभीरता से लिया गया और उसी आधार पर दोनों गेस्ट टीचर्स को हटाने का फैसला लिया गया। उनका कहना था कि दोनों टीचर्स के भविष्य में किसी भी शिक्षण कार्य से जुड़ने पर रोक लगा दी गई है। साथ ही स्कूल प्रिंसिपल को भी बुधवार को नोटिस थमा दिया गया है।
बच्चों की हिम्मत बनी मिसाल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे खास बात यह रही कि छोटी उम्र के बच्चों ने अपने अधिकार के लिए आवाज उठाने का साहस दिखाया। आमतौर पर ऐसे मामलों में बच्चे चुपचाप सब सह लेते हैं, लेकिन यहां बच्चों ने खुद पहल की और अपने भविष्य के लिए 100 किलोमीटर की यात्रा करने से भी पीछे नहीं हटे।
आदिवासी बाहुल्य इलाकों में सरकारी और विभागीय स्कूलों की स्थिति पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। शिक्षकों की कमी, गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति में ढिलाई और निगरानी की कमी जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में हैं। यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि दूर-दराज के स्कूलों में समय-समय पर निरीक्षण कितना जरूरी है।
