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महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी के ठिकानों पर लोकायुक्त का बड़ा एक्शन, आय से 241% ज्यादा संपत्ति का खुलासा.


Lokayukta raid Indore :इंदौर की शांत गलियों में बुधवार की सुबह तब हड़कंप मच गया, जब लोकायुक्त पुलिस की तीन टीमें एक साथ शहर के अलग-अलग इलाकों में पहुंचीं। ये कार्रवाई महिला एवं बाल विकास विभाग के डिप्टी डायरेक्टर लक्ष्मी नारायण कंडवाल के ठिकानों पर की गई। इस छापे का मुख्य कारण उनके पास उनकी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति का होना बताया जा रहा है। लोकायुक्त की टीम अब कंडवाल के उन साम्राज्य की पड़ताल कर रही है, जिसे उन्होंने पिछले 30 वर्षों की सरकारी सेवा के दौरान खड़ा किया था।

शिकायत के बाद सक्रिय हुई जांच टीम

इस पूरे मामले की शुरुआत एक गोपनीय शिकायत से हुई थी, जिसमें कंडवाल द्वारा पद का दुरुपयोग कर अवैध धन अर्जित करने का आरोप लगाया गया था। पुलिस महानिदेशक योगेश देशमुख के सख्त निर्देशों के बाद, लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया। कार्यवाहक निरीक्षक आशुतोष मिठास को इस शिकायत की सत्यता परखने की जिम्मेदारी दी गई। प्रारंभिक जांच में जब वित्तीय विसंगतियां साफ नजर आने लगीं, तब टीम ने विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट हासिल किया और बुधवार सुबह कार्रवाई को अंजाम दिया।

241 प्रतिशत का बड़ा अंतर

जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। वर्ष 1996 में अपनी सरकारी सेवा शुरू करने वाले लक्ष्मी नारायण कंडवाल की अब तक की कुल वैध आय का आकलन लगभग ढाई करोड़ रुपये के आसपास किया गया है। लेकिन, इसके विपरीत लोकायुक्त को जो संपत्तियां और निवेश मिले हैं, उनका बाजार मूल्य साढ़े नौ करोड़ रुपये से अधिक है। गणितीय दृष्टि से देखें तो यह उनकी वैध आय से करीब 241 प्रतिशत अधिक है। इसी अनुपातहीन संपत्ति के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है।

आलीशान भवन और जमीन

जांच टीम को कंडवाल की संपत्तियों के जो विवरण मिले हैं, वे किसी बड़े कारोबारी से कम नहीं हैं। इंदौर की स्कीम नंबर 103 में स्थित उनका एक बहुमंजिला भवन विशेष चर्चा में है। लगभग 252 वर्गमीटर के व्यावसायिक प्लॉट पर बना यह भवन 13,500 वर्गफीट में फैला है। इस इमारत की तीन मंजिलों पर व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, जिनमें एक जिम और एक डिपार्टमेंटल स्टोर शामिल है, जबकि चौथी मंजिल पर उनका परिवार रहता है। इतना ही नहीं, स्कीम नंबर 140 में दो कीमती प्लॉट और पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के पास के ग्रामीण इलाकों जैसे तारपुरा, बेकलाय और बनेड़िया में भी 11 अलग-अलग भूखंडों का पता चला है। ये सभी संपत्तियां सरकारी नौकरी की तनख्वाह से बनाना सामान्य आय के स्रोतों से संभव नहीं दिखता। लोकायुक्त की तीन टीमें इस समय दस्तावेजों की गहन छानबीन में जुटी हुई हैं। वे इस बात का पता लगा रही हैं कि क्या ये संपत्तियां सीधे उनके नाम पर हैं या बेनामी तरीके से अन्य लोगों के नाम पर खरीदी गई हैं। छापे के दौरान टीम को बैंक लॉकर, निवेश के कागजात और कुछ डिजिटल डेटा भी मिले हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है। जैसे-जैसे दिन बीत रहा है, इस केस की परतें और गहरी होती जा रही हैं। प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। लोकायुक्त के अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी होने के बाद ही संपत्ति का अंतिम मूल्यांकन सामने आ पाएगा।