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MP में CM के नाम पर फर्जी लेटरहेड से ट्रांसफर की कोशिश, आलीराजपुर में आरोपी गिरफ्तार

Madhya Pradesh latest news

Madhya Pradesh Latest News : आलीराजपुर में एक ऐसा मामला सामने आया है जो सुनकर लोग चौंक गए। कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम और फोटो वाला फर्जी लेटरहेड बनाकर सरकारी अधिकारी को भेज रहा था। मकसद था आयुष डॉक्टर का ट्रांसफर करवाना। पुलिस ने आरोपी को सीहोर से गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना 21 जुलाई को हुई। आलीराजपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश अतुलकर के व्हाट्सएप पर एक संदेश आया। उसमें मुख्यमंत्री का नाम लिखकर आयुष विभाग की डॉक्टर निर्मला निंगवाल का उदयगढ़ से सोंडवा ट्रांसफर करने का आदेश था। लेटर पर मुख्यमंत्री की फोटो और मध्य प्रदेश शासन का लोगो भी चिपका था। तारीख 12 जुलाई 2026 दर्ज थी।

डॉ. अतुलकर को लेटर देखते ही शक हुआ। भाषा और फॉर्मेट सामान्य सरकारी आदेश जैसे नहीं लग रहे थे। उन्होंने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों से पुष्टि करवाई। इंदौर और अन्य जगहों से जवाब आया कि ऐसा कोई पत्र मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी नहीं हुआ। फिर स्वास्थ्य विभाग ने करीब एक महीने तक जांच की। डॉक्टर और उनके ड्राइवर से पूछताछ हुई। दस्तावेज कहां से आया, किसने भेजा, इन सवालों के जवाब तलाशे गए।

जांच में सामने आया कि डॉक्टर उदयगढ़ में पदस्थ थीं और सोंडवा जाना चाहती थीं। उनके ड्राइवर नवल सिंह सस्तिया का संपर्क मुकेश भोसले से हुआ। मुकेश ने भरोसा दिलाया कि वह ट्रांसफर करवा सकता है। आरोप है कि 40 हजार रुपये का सौदा तय हुआ। इसमें से 15 हजार रुपये ड्राइवर ने यूपीआई से मुकेश को भेज दिए। बाकी पैसा ट्रांसफर होने के बाद देने की बात कही गई।

मुकेश राम सिंह भोसले सीहोर जिले के श्यामपुरा का रहने वाला है। उम्र करीब 33 साल। पुलिस जांच में पता चला कि उसने फर्जी लेटरहेड इंदौर से तैयार करवाया था। फिर अपने मोबाइल नंबर से सीएमएचओ को व्हाट्सएप पर भेज दिया। आलीराजपुर कोतवाली पुलिस ने सीएमएचओ की शिकायत पर मामला दर्ज किया। तकनीकी सबूतों के आधार पर टीम सीहोर पहुंची और मुकेश को गिरफ्तार कर लिया।

एसपी रघुवंश सिंह भदौरिया के निर्देशन में कार्रवाई हुई। आरोपी के पास से मोबाइल और टैबलेट बरामद हुए। इनमें स्कूल शिक्षा विभाग और बिजली कंपनी के एमडी के नाम से बने अन्य फर्जी पत्र भी मिले। पुलिस अब यह देख रही है कि मुकेश ने सिर्फ इसी एक मामले में फर्जी दस्तावेज बनाए या पहले भी ऐसे लेटर तैयार करवाए। इंदौर में जिस जगह से लेटरहेड बना, वहां दबिश देने की तैयारी चल रही है। डिजिटल तरीके से बनाया गया या प्रिंटिंग प्रेस से, यह भी जांच का विषय है।

आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया। आगे की पूछताछ के लिए रिमांड लिया गया। पुलिस पूछ रही है कि फर्जी लेटर बनाने का असल मकसद क्या था और इसमें और कोई शामिल है या नहीं। गृह विभाग मध्य प्रदेश ने भी आधिकारिक रूप से इस त्वरित कार्रवाई की जानकारी दी। आरोपी ने मुख्यमंत्री के नाम का गलत इस्तेमाल कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की।

यह मामला सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग की गंभीरता दिखाता है। आजकल मोबाइल और टैबलेट से आसानी से फर्जी लेटरहेड बना लिए जाते हैं। लोग ट्रांसफर या अन्य कामों के लिए पैसे देकर ऐसे झांसे में आ जाते हैं। आलीराजपुर पुलिस की तेज कार्रवाई ने दिखाया कि अगर अधिकारी सतर्क रहें तो ऐसे खेल जल्दी पकड़े जा सकते हैं। सीएमएचओ ने शक किया और तुरंत कार्रवाई शुरू की, इसलिए आरोपी तक पहुंचने में देर नहीं लगी।

जांच अभी जारी है। पुलिस अन्य संभावित मामलों की भी तलाश कर रही है। अगर मुकेश ने पहले भी ऐसे दस्तावेज बनाए हों तो और आरोप लग सकते हैं। डॉक्टर और ड्राइवर की भूमिका पर भी जांच चल रही है। आधिकारिक स्रोतों के अनुसार, अभी तक सिर्फ एक आरोपी गिरफ्तार हुआ है। बाकी लोगों की तलाश जारी है।

मध्य प्रदेश में ऐसे मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं। फर्जी आदेश, फर्जी हस्ताक्षर या लेटरहेड का इस्तेमाल करके लोग सरकारी मशीनरी को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। इस घटना से सबक यह है कि कोई भी सरकारी दस्तावेज मिलने पर उसकी पुष्टि जरूर करानी चाहिए। व्हाट्सएप पर आए आदेश को सीधे लागू नहीं करना चाहिए।