बाबा बागेश्वर की 10 करोड़ की सोने की खड़ाऊ? वायरल तस्वीरों के पीछे की पूरी कहानी, भक्त ने बताया सच
Baba Bageshwar Viral News : बाबा बागेश्वर की खड़ाऊ इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। वजह है उनका सुनहरा रंग और उससे जुड़ा एक दावा। इंटरनेट पर कुछ पोस्ट में कहा जा रहा है कि बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सोने की खड़ाऊ पहनते हैं, जिसकी कीमत कथित तौर पर 10 करोड़ रुपये है। तस्वीरें वायरल हुईं तो लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
आखिर क्या सच में बाबा बागेश्वर के पास करोड़ों रुपये की सोने की खड़ाऊ है? या फिर सुनहरे रंग की वजह से एक साधारण वस्तु को लेकर बड़ा दावा कर दिया गया? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सोशल मीडिया पर किसी चीज का चमकदार दिखना उसकी असली कीमत या सामग्री का प्रमाण नहीं होता।
यह पूरा मामला 14 सितंबर 2026 को मुंबई में गणेश चतुर्थी के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम से जुड़ा बताया जा रहा है। इस दौरान बाबा बागेश्वर उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया पहुंचे थे। वहां सामने आई तस्वीरों में उनके पैरों में सुनहरे रंग की खड़ाऊ दिखाई दी।
इसके बाद सोशल मीडिया पर खड़ाऊ की कीमत करोड़ों में बताने वाली पोस्ट तेजी से फैलने लगीं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन खड़ाऊ को सोने से बना हुआ बताने का दावा सही नहीं है। एक करीबी भक्त ने भी इनकी वास्तविक बनावट को लेकर सफाई दी है। अब सवाल यह है कि वायरल तस्वीरों में दिख रही खड़ाऊ की असलियत क्या है और 10 करोड़ रुपये वाला दावा कहां से आया?
एंटीलिया में गणेशोत्सव के दौरान नजर आई बाबा बागेश्वर की खड़ाऊ
14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के मौके पर मुंबई स्थित मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया में गणेश उत्सव का आयोजन हुआ था। इस अवसर पर बाबा बागेश्वर भी वहां पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान सामने आई तस्वीरों और वीडियो में उनके पैरों में सुनहरे रंग की खड़ाऊ दिखाई दी। खड़ाऊ का रंग सामान्य लकड़ी की चप्पलों से अलग नजर आ रहा था। इसी वजह से लोगों का ध्यान इस पर गया और सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा शुरू हो गई।
खड़ाऊ का चमकदार रूप देखकर कुछ लोगों ने इसे सोने का बना हुआ मान लिया। इसके बाद तस्वीरों के साथ अलग-अलग दावे साझा किए जाने लगे। हालांकि, किसी वस्तु का रंग देखकर उसकी धातु या कीमत तय नहीं की जा सकती। इसके लिए उसकी सामग्री, निर्माण और विश्वसनीय स्रोत से पुष्टि जरूरी होती है।
सोशल मीडिया पर कैसे फैला 10 करोड़ रुपये की खड़ाऊ का दावा?
वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि बाबा बागेश्वर जो खड़ाऊ पहनते हैं, वह सोने की बनी हुई है और उसकी कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये है। इस दावे ने लोगों का ध्यान खींचा, क्योंकि इतनी महंगी धार्मिक उपयोग की वस्तु अपने आप में असामान्य बात मानी जाती।
लेकिन वायरल पोस्ट में किसी प्रमाणित जौहरी की जांच, आधिकारिक मूल्यांकन रिपोर्ट या विश्वसनीय दस्तावेज का उल्लेख सामने नहीं आता। इसलिए 10 करोड़ रुपये की कीमत को पुष्ट तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर किसी तस्वीर के साथ लिखी गई जानकारी अपने आप में प्रमाण नहीं बन जाती। कई बार तस्वीर का वास्तविक संदर्भ हट जाता है और उसके साथ नया दावा जोड़कर उसे दोबारा प्रसारित किया जाता है। इस मामले में भी खड़ाऊ के सुनहरे रंग को आधार बनाकर उसकी कीमत और सामग्री को लेकर दावा फैलाया गया। अब उपलब्ध स्पष्टीकरण इस दावे से अलग तस्वीर पेश करता है।
क्या बाबा बागेश्वर की खड़ाऊ सोने की बनी है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बाबा बागेश्वर की वायरल खड़ाऊ ठोस सोने से बनी हुई नहीं है। बताया गया है कि यह सामान्य लकड़ी से तैयार की गई है और इसके ऊपर सुनहरे रंग की पॉलिश या फिनिश की गई है। लकड़ी पर की गई चमकदार फिनिश के कारण खड़ाऊ दूर से सोने जैसी दिखाई दे सकती है। तस्वीरों में इसकी बनावट भी लकड़ी की वस्तु जैसी नजर आने की बात कही गई है।
इसके अलावा, मुंबई प्रवास के दौरान सामने आई कुछ अन्य तस्वीरों में खड़ाऊ के निचले हिस्से पर रबर जैसी परत दिखाई देने का उल्लेख भी किया गया है। ऐसी परत चलने के दौरान पकड़ और सुविधा बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।इसलिए केवल सुनहरी चमक देखकर इसे सोने की खड़ाऊ कहना सही नहीं होगा। किसी वस्तु की वास्तविक सामग्री की पुष्टि के लिए प्रत्यक्ष जांच या विश्वसनीय प्रमाण आवश्यक होता है।
भक्त राजपाल सिंह ने सफाई दी
वायरल दावों के बीच बाबा बागेश्वर के करीबी भक्त राजपाल सिंह ने खड़ाऊ को लेकर स्पष्टीकरण दिया है। उनके अनुसार, ये खड़ाऊ लकड़ी से बनी हुई हैं और सोने की नहीं हैं। बताया गया है कि बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इनका इस्तेमाल धार्मिक परंपरा और अपनी सहज शैली के तहत करते हैं। खड़ाऊ का सुनहरा रंग ही सोशल मीडिया पर फैले भ्रम की मुख्य वजह बना। राजपाल सिंह की ओर से दी गई इस जानकारी के मुताबिक, 10 करोड़ रुपये की सोने की खड़ाऊ वाला दावा गलत है।

