Bhavantar Bhugtan Yojana MP : मध्य प्रदेश के लाखों अन्नदाताओं के लिए आज का दिन बड़ी राहत और उत्साह लेकर आया है। राज्य सरकार अपनी महत्वाकांक्षी योजना के जरिए किसानों को उनकी मेहनत का सही मोल देने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के हजारों किसानों के बैंक खातों में सीधे करोड़ों रुपये की राशि ट्रांसफर करेंगे। यह कदम न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि खेती-किसानी में उनके भरोसे को भी बढ़ाएगा।
मंदसौर के मल्हारगढ़ से सीएम देंगे बड़ी सौगात
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को मंदसौर जिले के दौरे पर रहेंगे। यहां के मल्हारगढ़ में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान वे सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए खुशियों का पिटारा खोलेंगे। मुख्यमंत्री सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना के तहत चौथी किस्त जारी करने जा रहे हैं। इस बार प्रदेश के करीब 1.17 लाख किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। सरकार ने इसके लिए 200 करोड़ रुपये का बजट तय किया है, जो कुछ ही देर में डिजिटल माध्यम से किसानों के खातों में पहुंच जाएगा।
किन किसानों को मिल रहा है इस बार लाभ
इस योजना का लाभ उन विशेष किसानों को दिया जा रहा है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज 20 दिसंबर 2025 से लेकर योजना की अंतिम तारीख तक मंडियों में बेची थी। मध्य प्रदेश सरकार अब तक इस योजना के माध्यम से प्रदेश के 7.10 लाख किसानों को लाभान्वित कर चुकी है। अगर कुल आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक किसानों के खातों में 1492 करोड़ रुपये की बड़ी राशि भेजी जा चुकी है। यह राशि उन किसानों के लिए एक बड़ा सहारा बनी है जिन्हें बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण नुकसान झेलना पड़ता था।
विकास कार्यों को भी मिलेगी नई रफ्तार
मल्हारगढ़ का यह कार्यक्रम सिर्फ पैसे ट्रांसफर करने तक ही सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस मौके पर क्षेत्र के विकास के लिए 69.50 करोड़ रुपये के विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण भी करेंगे। इसमें सबसे अहम मंदसौर-नीमच स्टेट हाईवे पर बनने वाला 4-लेन फ्लाई-ओवर है, जिसकी लागत करीब 51.91 करोड़ रुपये है। इसके अलावा पिपलिया मंडी में रेलवे अंडर ब्रिज और मल्हारगढ़ रेलवे स्टेशन रोड पर नए पुल का काम भी शुरू होगा। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से क्षेत्र के लोगों को ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी और सफर आसान हो जाएगा।
भावांतर भुगतान योजना क्या है
किसानों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि भावांतर योजना आखिर काम कैसे करती है। सरल शब्दों में कहें तो जब किसानों को मंडी में उनकी फसल का दाम सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम मिलता है, तो उस अंतर की भरपाई राज्य सरकार करती है। https://twitter.com/DrMohanYadav51/status/2016716141444682210 इस योजना की शुरुआत साल 2019 में हुई थी और पिछले साल से इसमें सोयाबीन को भी शामिल कर लिया गया। सरकार का मकसद यह है कि बाजार में भाव चाहे जो भी हो, किसान को उसकी लागत और मेहनत का उचित लाभ जरूर मिले। यह पूरा पैसा बिना किसी बिचौलिए के सीधे 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (DBT) के जरिए किसान के खाते में जमा होता है।