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मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला: भोपाल-विदिशा बनेगा फोरलेन, 27 हजार कर्मचारियों को प्रमोशन की सौगात

MP Cabinet Decisions 2026

MP Cabinet Decisions 2026 : भोपाल के मंत्रालय में मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई और इसमें प्रदेश के विकास से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। सड़क निर्माण से लेकर कृषि अनुसंधान, महिला सुरक्षा और कर्मचारियों की तरक्की तक हर वर्ग को छूने वाले फैसले इस बैठक में लिए गए। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बैठक के बाद मीडिया को इन फैसलों की जानकारी दी।

भोपाल-विदिशा मार्ग होगा फोरलेन, 1757 करोड़ की मंजूरी

बैठक में सबसे बड़ा फैसला भोपाल-विदिशा मार्ग को लेकर आया। यह करीब 44.83 किलोमीटर लंबा मार्ग फिलहाल दो लेन का है, जिसे अब पेव्ड शोल्डर के साथ चार लेन में बदला जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर कुल 1757 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होंगे और इसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर बनाया जाएगा।

शुरुआत में इस परियोजना की लागत 1467.42 करोड़ रुपए तय हुई थी, जिसे बाद में संशोधित कर 1617.70 करोड़ रुपए किया गया। ग्रामीण इलाकों की कृषि भूमि के अधिग्रहण पर अतिरिक्त राशि जोड़ने के बाद कुल लागत 1757 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।

यह सड़क भोपाल, रायसेन और विदिशा जिलों को जोड़ती है और भोपाल-कानपुर हाई-स्पीड कॉरिडोर के लिए एक अहम फीडर रोड का काम भी करेगी। मौजूदा समय में इस मार्ग पर रोजाना करीब 10,975 पैसेंजर कार यूनिट का ट्रैफिक गुजरता है, जबकि चार लेन सड़क के लिए तय मानक 10 हजार पैसेंजर कार यूनिट है। यानी ट्रैफिक का दबाव मानक से ज्यादा हो चुका है, जिसे देखते हुए फोरलेन बनाना जरूरी हो गया था। इस मार्ग पर तीन नए बायपास भी बनाए जाएंगे, जिससे सूखी सेवनिया, बेरखेड़ी और सलामतपुर जैसे इलाकों में ट्रैफिक का बोझ कम होगा। भोपाल को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार ने अगले पांच साल में प्रदेश में करीब 88 हजार करोड़ रुपए की सड़कें बनाने का लक्ष्य भी रखा है।

सोयाबीन अनुसंधान को मिलेगी रफ्तार, 20 हेक्टेयर जमीन मुफ्त

कैबिनेट ने नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टिट्यूट को सीहोर जिले के इच्छावर स्थित भावखेड़ी में 20 हेक्टेयर जमीन नि:शुल्क और स्थायी पट्टे पर देने का फैसला लिया है। यहां एक रिसर्च यूनिट स्थापित की जाएगी, जो सोयाबीन की फसल में लगने वाली बीमारियों पर अध्ययन करेगी और किसानों को उनके समाधान भी सुझाएगी।



मध्य प्रदेश देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में गिना जाता है, इसलिए यह फैसला किसानों के लिए दूरगामी असर वाला साबित हो सकता है। बेहतर बीज किस्में, कम लागत में ज्यादा उत्पादन और बीमारियों से बचाव जैसे पहलुओं पर आने वाले वर्षों में इस केंद्र से मदद मिलने की उम्मीद है।

देवास पटाखा फैक्टरी हादसे के बाद जांच आयोग का गठन

हाल के दिनों में देवास में हुए पटाखा फैक्टरी हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। ऐसी घटनाओं की दोबारा पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए कैबिनेट ने एकल सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग बनाने का फैसला किया है। इस आयोग की अगुवाई एक सेवानिवृत्त जस्टिस करेंगे और यह औद्योगिक सुरक्षा में कमियों की गहराई से पड़ताल करेगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आगे नीतिगत बदलाव भी किए जा सकते हैं, ताकि फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो।

वीरांगनाओं का सम्मान: पुरस्कार राशि दोगुनी

जबलपुर में हुई रानी दुर्गावती कैबिनेट बैठक की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए इस बैठक में महिला सशक्तिकरण से जुड़ा एक अहम फैसला लिया गया। विपरीत परिस्थितियों में भी साहस और संघर्ष का परिचय देने वाली महिलाओं को अब रानी दुर्गावती वीरता पुरस्कार दिया जाएगा, जिसकी राशि 2 लाख रुपए तय की गई है।


इसके साथ ही रानी अवंतीबाई वीरता पुरस्कार की राशि भी 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर दी गई है। सरकार का मकसद प्रदेश की उन महिलाओं को पहचान देना है, जिन्होंने कठिन हालात में असाधारण हिम्मत दिखाई है।

27 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को प्रमोशन की सौगात

इस बैठक की एक और बड़ी खबर रही कर्मचारियों के लिए। कैबिनेट ने करीब 27,534 कर्मचारियों के प्रमोशन को मंजूरी दी है, जिससे प्रदेश भर के विभिन्न विभागों में लंबे समय से रुकी पदोन्नतियों को रफ्तार मिलेगी। यह फैसला कर्मचारी संगठनों की पुरानी मांग को पूरा करता है और सरकारी महकमों में कामकाज की गति बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।

वन प्रबंधन समितियों के श्रमिकों पर अभी असमंजस बरकरार

कैबिनेट में वन प्रबंधन समितियों के तहत काम करने वाले श्रमिकों को मिलने वाले लाभांश में बदलाव को लेकर भी चर्चा हुई। प्रस्ताव है कि आगे से सिर्फ मध्य प्रदेश के मूल निवासी श्रमिकों को ही यह लाभांश दिया जाए। हालांकि इस विषय पर अभी अंतिम फैसला नहीं हो पाया है और इसे आगे की बैठकों के लिए टाल दिया गया है। इस प्रस्ताव का असर हजारों वनवासी परिवारों की आमदनी पर पड़ सकता है, इसलिए सरकार इस पर सोच-समझकर आगे बढ़ना चाहती है।


कुल मिलाकर, यह कैबिनेट बैठक इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि अनुसंधान, औद्योगिक सुरक्षा, महिला सम्मान और कर्मचारी हितों को साधने वाली साबित हुई। आने वाले दिनों में भोपाल-विदिशा फोरलेन प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने से क्षेत्र की तस्वीर बदलने की उम्मीद है, वहीं सोयाबीन रिसर्च यूनिट किसानों के लिए नई राह खोल सकती है।