प्रशासन में बड़ा बदलाव: सरकार ने एक झटके में बदले 20 IAS अधिकारी, 6 जिलों की कमान नए अफसरों को
MP IAS Transfer List 2026 : रात के बारह बजे थे। भोपाल में मंत्रालय की बत्तियां जल रही थीं। ज्यादातर अफसर तब तक अपने घरों में चैन की नींद सो चुके थे। लेकिन सुबह जब आंख खुली तो पता चला कि उनकी कुर्सी बदल गई है। मध्यप्रदेश में यही होता आया है, और इस बार भी कुछ अलग नहीं हुआ।
24 जुलाई की रात मोहन सरकार ने 20 IAS अफसरों की तबादला सूची जारी कर दी। यह कोई मामूली फेरबदल नहीं था। नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के पदभार संभालने के ठीक अगले दिन यह पहली बड़ी प्रशासनिक सर्जरी थी, और इसी वजह से इस लिस्ट पर सबकी नजर टिकी रही।
किसको मिली कौन सी कुर्सी
इंदौर के कमिश्नर रहे डॉ. सुदाम पी. खाड़े को अब मुख्यमंत्री सचिवालय भेजा गया है। वे यहां सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी जगह भास्कर लक्षकार को इंदौर का नया कमिश्नर बनाया गया है। इंदौर जैसे बड़े शहर की कमान संभालना आसान बात नहीं होती, तो यह बदलाव खुद में बड़ी खबर है।
राजस्व मंडल की बात करें तो वहां भी अध्यक्ष पद पर नई नियुक्ति की चर्चा है। मंत्रालय के गलियारों में यह भी बात हो रही है कि मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई को अब उद्योग एवं MSME विभाग सौंपा गया है। उन्हीं के कंधों पर जनवरी 2027 में भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की तैयारी की जिम्मेदारी भी है।
छह जिलों में बदल गए कलेक्टर
गांव की चौपाल हो या शहर की चाय की दुकान, हर तरफ एक ही सवाल: "अपने जिले का कलेक्टर कौन बना?" तो चलिए सीधे बताते हैं।
रतलाम में अजय कटेसरिया नए कलेक्टर बनाए गए हैं। वे पहले सामान्य प्रशासन विभाग में उप सचिव थे। यहां की पुरानी कलेक्टर मिशा सिंह का तबादला अब शहडोल कर दिया गया है।
शहडोल में मिशा सिंह की नियुक्ति के साथ ही पुराने कलेक्टर केदार सिंह को लोक निर्माण विभाग में अपर सचिव बनाया गया है।
अनूपपुर की कमान अब रत्नाकर झा के हाथ में है। यहां के पूर्व कलेक्टर हर्षल पंचोली को भोपाल स्थित एप्को भेज दिया गया है।
मंदसौर में दिव्यांक सिंह नए कलेक्टर होंगे। पुरानी कलेक्टर अदिति गर्ग को भोपाल के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में जगह मिली है।
आगर-मालवा में डॉ. शेर सिंह मीना ने कलेक्टर की कुर्सी संभाली है। यहां से प्रीति यादव को इंदौर स्थित एमपीआईडीसी भेजा गया है।
खरगोन में गुरु प्रसाद को नया कलेक्टर बनाया गया है।

आधी रात को ही क्यों होते हैं तबादले
अब सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसे बड़े फैसले रात के अंधेरे में ही क्यों लिए जाते हैं। मध्यप्रदेश में यह कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ महीनों में भी देर रात 26 और 24 अफसरों की तबादला सूचियां जारी हो चुकी हैं। दफ्तर के लोग मजाक में कहते हैं कि सरकार का "प्राइम टाइम" रात 12 बजे के बाद ही शुरू होता है।
असल वजह यह बताई जाती है कि दिन में मंत्रालय में जिस तरह की भागदौड़ और बैठकों का दौर चलता है, उसमें इतनी बड़ी सूची पर अंतिम मुहर देर शाम या रात में ही लग पाती है। फिर भी, अफसरों के लिए सुबह उठकर अपना ट्रांसफर ऑर्डर पढ़ना किसी झटके से कम नहीं होता।



