मंत्रालय से लेकर जिला दफ्तरों तक अब लगेगी बायोमैट्रिक हाजिरी, सीएम मोहन यादव ने दिए सख्त निर्देश
MP CM Mohan Yadav news : मध्यप्रदेश में सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली को ज्यादा अनुशासित और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राजधानी भोपाल में मंत्रालय, विंध्याचल भवन और सतपुड़ा भवन से लेकर जिला स्तर के सरकारी कार्यालयों तक बायोमैट्रिक अटेंडेंस व्यवस्था शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में 21 प्रमुख कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान साफ कहा कि अधिकारी और कर्मचारी तय समय पर कार्यालय पहुंचें और अपने दायित्वों को समय पर पूरा करें। वरिष्ठ अधिकारी इस व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
मुख्यमंत्री का जोर सिर्फ हाजिरी दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े प्राथमिक कामों का तय समय में निपटारा होना जरूरी है। यानी सरकारी कार्यालयों में समय की पाबंदी के साथ कामकाज की गति और जवाबदेही पर भी नजर रखी जाएगी।
मंगलवार की बैठक में क्या हुआ तय
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मंत्रालय में हुई समीक्षा बैठक में 21 अहम मुद्दों पर चर्चा की। इस बैठक में साफ कहा गया कि अधिकारी और कर्मचारी तय समय पर दफ्तर पहुंचें और अपने काम समय पर निपटाएं। इसकी निगरानी अब वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। मुख्यमंत्री का मकसद साफ है, जनता से जुड़े कामों में देरी अब बर्दाश्त नहीं होगी।
जन विश्वास अभियान को मिल रहा अच्छा रिस्पॉन्स
बैठक में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान को लेकर भी बात हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले तीन हफ्तों से चल रहे साप्ताहिक शिविर और संवाद कार्यक्रम के नतीजे उत्साहजनक रहे हैं। एक दिलचस्प निर्देश भी सामने आया। अगर किसी शुक्रवार को त्योहार या किसी और वजह से शिविर नहीं लग पाता, तो उसे अगले दिन यानी शनिवार को जरूर आयोजित किया जाए। मतलब अब कोई बहाना नहीं चलेगा।
स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को मिलेगा फायदा
गांवों में रहने वाले लोगों के लिए भी राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ग्रामीण आबादी को उनकी जमीन के पट्टे देने का काम तेज किया जाए। इसके लिए निश्शुल्क रजिस्ट्री और अधिकार अभिलेखों के पंजीयन से जुड़ी प्रक्रिया को जल्द पूरा करना होगा।
इसके साथ ही जिला स्तर पर राजस्व, पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग को नर्मदा समग्र मिशन यानी "नमन" योजना की स्थापना और क्रियान्वयन जल्द पूरा करने को कहा गया है।
गुजरात के सूरत मॉडल से सीखेगा मध्य प्रदेश
बैठक में एक और दिलचस्प बात सामने आई। मुख्यमंत्री ने गुजरात के सूरत शहर के जल भंडारण मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में भी "कर्मभूमि से जन्मभूमि अभियान" जैसा एक अभियान शुरू किया जाए।
साथ ही शहरी क्षेत्रों में पेयजल और सीवरेज व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। नगरीय निकायों में पीएचई विभाग के इच्छुक तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों का वन टाइम संविलियन करने का भी निर्देश दिया गया है।
संस्कृति और पर्यटन विभाग के लिए बड़े ऐलान
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। कामदगिरी परिक्रमा मार्ग का विकास होगा और पर्यटन सुविधाओं के लिए साढ़े बारह हेक्टेयर वन भूमि चिन्हित की जाएगी।
सती अनसूइया मंदिर, गुप्त गोदावरी मंदिर परिसर और ममलेश्वर मंदिर प्रांगण के विकास को भी हरी झंडी मिली है। भगवान श्रीराम वनगमन पथ परियोजना के तहत तीस कामों को पूरा करने की योजना है।
पिछले तीन साल में मध्य प्रदेश के पंद्रह स्थल यूनेस्को विश्वधरोहर सूची से जुड़ चुके हैं। अब छह और सांस्कृतिक स्थलों को इस सूची में शामिल कराने की कोशिश की जा रही है।
दतिया और ओरछा सहित बीस आध्यात्मिक और धार्मिक स्थलों का विकास भी एजेंडे में शामिल है। इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण पाथेय परियोजना और सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में टेंपल बांड के जरिए प्रमुख मंदिरों का विकास किया जाएगा।
गृह विभाग में सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाने की तैयारी
सुरक्षा के मोर्चे पर भी कई बड़े फैसले हुए हैं। महाकालेश्वर मंदिर की तर्ज पर अब प्रदेश के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी होमगार्ड के पद बनाए जाएंगे, जिनकी नियुक्ति समिति के खर्च पर होगी।
राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल की मौजूदा क्षमता दो हजार से बढ़ाकर पांच हजार करने का निर्णय लिया गया है। वीआईपी ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों को अब जोखिम भत्ता भी मिलेगा।
बैगा, भारिया और सहरिया समुदाय के लिए विशेष भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। काउंटर टेररिस्ट ग्रुप की संख्या पचास से बढ़ाकर ढाई सौ करने और मध्य प्रदेश राज्य द्रुतगति बल के गठन का भी ऐलान हुआ है।
