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PM आवास की तीसरी किस्त के नाम पर ₹5 हजार की रिश्वत, लोकायुक्त ने पंचायत सचिव को रंगेहाथ पकड़ा

Lokayukta Action MP

Lokayukta Action MP :  प्रधानमंत्री आवास योजना की किस्त किसी जरूरतमंद परिवार के लिए सिर्फ सरकारी सहायता नहीं होती, बल्कि पक्के घर का सपना पूरा करने की उम्मीद होती है। लेकिन देवास जिले के कमलापुर से सामने आया मामला इसी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यहां एक पंचायत सचिव पर आरोप है कि उसने पीएम आवास योजना की तीसरी किस्त की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले लाभार्थी से ₹5 हजार की रिश्वत मांगी। शिकायत मिलने के बाद उज्जैन लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाया और पंचायत सचिव को कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ लिया।

यह कार्रवाई 12 अगस्त 2026 को देवास जिले की बागली तहसील के कमलापुर गांव में हुई। लोकायुक्त की कार्रवाई में पंचायत सचिव ओमप्रकाश सारण को आरोपी बनाया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पीएम आवास की तीसरी किस्त के लिए मांगे थे ₹5 हजार

मामले की शुरुआत कमलापुर निवासी सलीम शाह की शिकायत से हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, सलीम शाह का प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत वर्ष 2026 में आवास स्वीकृत हुआ था। उन्हें योजना की पहली और दूसरी किस्त बैंक खाते में मिल चुकी थी।

इसके बाद मकान निर्माण से जुड़ी अगली प्रक्रिया और तीसरी किस्त के लिए उन्होंने पंचायत सचिव ओमप्रकाश सारण से संपर्क किया। शिकायत के अनुसार, सचिव ने जियो टैगिंग और तीसरी किस्त जारी कराने की प्रक्रिया के बदले ₹5 हजार की मांग की।

यहीं से मामला लोकायुक्त तक पहुंचा। सलीम शाह ने उज्जैन स्थित लोकायुक्त कार्यालय में लिखित शिकायत दी। शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने पहले इसकी जांच कराई। रिपोर्टों के अनुसार, शिकायत की पुष्टि होने के बाद ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई।

135 किलोमीटर दूर पहुंची उज्जैन लोकायुक्त की टीम

इस कार्रवाई की एक खास बात यह भी रही कि शिकायत की जांच और ट्रैप के लिए उज्जैन से लोकायुक्त की टीम कमलापुर पहुंची। स्थानीय रिपोर्टों में उज्जैन से कमलापुर की दूरी करीब 135 किलोमीटर बताई गई है। टीम ने शिकायतकर्ता के साथ समन्वय कर कार्रवाई की तैयारी की।

योजना के मुताबिक जब शिकायतकर्ता पंचायत सचिव के पास पहुंचा और कथित तौर पर ₹5 हजार दिए गए, तभी लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, टीम ने सचिव को रिश्वत की रकम स्वीकार करते हुए पकड़ लिया। इसके बाद मौके पर कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।

लोकायुक्त कार्रवाई में उप पुलिस अधीक्षक दिनेशचंद्र पटेल और निरीक्षक हिना डावर समेत टीम के अन्य सदस्य शामिल रहे। अलग-अलग रिपोर्टों में टीम के सदस्यों की संख्या और विवरण में थोड़ा अंतर है, इसलिए यहां केवल उपलब्ध रूप से पुष्ट अधिकारियों का उल्लेख किया जा रहा है।

जियो टैगिंग का नाम सामने आने से क्या समझें?

इस मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तीसरी किस्त के लिए जियो टैगिंग के नाम पर रकम मांगी गई। ग्रामीण आवास योजनाओं में निर्माण की प्रगति की निगरानी के लिए तकनीकी और डिजिटल प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है। केंद्र का ग्रामीण विकास मंत्रालय PMAY-G के क्रियान्वयन, निगरानी और समीक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालता है।

लोकायुक्त ने पंचायत सचिव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की है। आगे जांच, दस्तावेजी प्रक्रिया और कानूनी कार्रवाई के बाद ही मामले की अगली स्थिति स्पष्ट होगी। आरोपी पर लगे आरोपों को अदालत में साबित होना बाकी है।