Sports News Without Access, Favor, Or Discretion!

  1. Home
  2. Latest Big News

रिश्वत के जाल में फंसा पटवारी: 10 हजार रुपये लेते ही लोकायुक्त के शिकंजे में आया राजस्व अधिकारी


Bribery case Madhya Pradesh : मनावर तहसील के कस्थली गांव में दो प्लाटों के नामांतरण की प्रक्रिया एक आम नागरिक के लिए सिरदर्द बन गई थी। अरुण कुमार तिवारी नाम के एक व्यक्ति को अपने ही काम के लिए सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ रहे थे, लेकिन बार-बार कोशिश के बावजूद काम नहीं हो रहा था। इस देरी के पीछे की असली वजह पटवारी प्रवीण पाटीदार की लालच थी। सोमवार, 8 जून 2026 को लोकायुक्त इंदौर की टीम ने जाल बिछाकर पटवारी को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए इंदौर रोड स्थित रेस्ट हाउस से रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह घटना भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही उस जंग की याद दिलाती है, जो अक्सर आम आदमी की चुप्पी के कारण धीमी पड़ जाती है। अरुण कुमार तिवारी के पास कस्थली गांव में दो प्लाट थे, जिनका नामांतरण वे करवाना चाहते थे। जब वे पटवारी प्रवीण पाटीदार के पास पहुंचे, तो काम करने के बजाय उनसे पैसों की मांग की गई। पटवारी ने प्रति प्लाट 10 हजार रुपये यानी कुल 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। अरुण ने तय किया कि वे इस अन्याय के आगे झुकेंगे नहीं। उन्होंने इंदौर स्थित लोकायुक्त कार्यालय में इसकी शिकायत की। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए लोकायुक्त ने मामले की जांच की और आरोप सही पाए गए। रिश्वत के जाल में फंसा पटवारी: 10 हजार रुपये लेते ही लोकायुक्त के शिकंजे में आया राजस्व अधिकारी लोकायुक्त की टीम ने एक योजना बनाई। सोमवार का दिन तय हुआ और आरोपी पटवारी को रिश्वत की पहली किस्त लेने के लिए इंदौर रोड स्थित एक रेस्ट हाउस में बुलाया गया। जैसे ही अरुण कुमार तिवारी ने 10 हजार रुपये पटवारी के हाथ में दिए, पहले से मुस्तैद लोकायुक्त की टीम ने मौके पर छापा मार दिया। रिश्वत की रकम के साथ पटवारी को हिरासत में ले लिया गया। यह पूरी कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख और उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह के दिशा-निर्देशों के तहत अंजाम दी गई। पकड़े गए पटवारी प्रवीण पाटीदार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामले में साक्ष्य के तौर पर रिश्वत की नोटों पर लगी फिनोलफ्थेलीन पाउडर की परत और रंगे हाथों गिरफ्तारी सजा दिलाने के लिए काफी मजबूत आधार बनती है। वर्तमान में सरकारी दफ्तरों में डिजिटलाइजेशन होने के बावजूद नामांतरण जैसे कार्यों में अभी भी फील्ड स्तर के कर्मचारियों का दखल बना हुआ है, जिसका फायदा उठाकर कुछ कर्मचारी जनता को परेशान करते हैं।