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भोपाल की सड़कों पर अब बिजली से दौड़ेंगी बसें, सोमवार से शुरू होगा बड़ा ट्रायल

Bhopal public transport 2026

 

 

 

 

Bhopal public transport 2026 : भोपाल वालों के लिए एक अच्छी खबर है। शहर की सड़कों पर अब जल्द ही इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती नजर आएंगी। पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत राजधानी में ई-बसें पहुंच चुकी हैं और सोमवार से इनका ट्रायल रन शुरू हो रहा है। अगर आप रोज बस पकड़कर दफ्तर जाते हैं, स्कूल-कॉलेज जाते हैं, या फिर बाजार का चक्कर लगाते हैं, तो यह खबर आपके काम की है। आइए जानते हैं पूरा माजरा क्या है।

पहले चरण में बिना यात्रियों के दौड़ेंगी बसें

शुरुआत में कोच फैक्ट्री से औबेदुल्लागंज रूट पर 10 ई-बसें चलाई जाएंगी। लेकिन इनमें कोई यात्री नहीं बैठेगा। वजह साफ है। पहले अधिकारी यह देखना चाहते हैं कि बसें तकनीकी रूप से कितनी सही हैं। चार्जिंग सिस्टम कैसा काम कर रहा है, सड़क पर परफॉर्मेंस कैसी है, इन सबकी बारीकी से जांच होगी। यह कोई एक-दो दिन का काम नहीं है। यह ट्रायल पूरे पांच दिन तक चलेगा।

पांच दिन का ट्रायल क्यों जरूरी है?

अब सवाल यह उठता है कि आखिर पाँच दिन ही क्यों? इसका जवाब बहुत आसान है। मौसम हर दिन एक जैसा नहीं रहता; कभी धूप तेज़ होती है, तो कभी बारिश होती है। ट्रैफ़िक की स्थिति भी अलग-अलग होती है सुबह, शाम और दोपहर के समय में फ़र्क होता है।

अधिकारी चाहते हैं कि हर तरह की स्थिति में बसों को परख लिया जाए। ताकि जब आम जनता के लिए सेवा शुरू हो, तो बीच रास्ते में कोई दिक्कत न आए। मकसद सिर्फ बस चलाना नहीं है। मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जब आप बस में बैठें, तो सफर सुरक्षित हो, समय पर हो और आरामदायक हो।

दूसरे चरण में इन रूटों पर होगा असली टेस्ट

पहला चरण खत्म होने के बाद दूसरा चरण आएगा। इसमें बसें यात्रियों के साथ चलेंगी।
दूसरे चरण के लिए तीन प्रमुख रूट तय किए गए हैं। पहला है कोच फैक्ट्री से औबेदुल्लागंज, दूसरा है फंदा से मंडीदीप, और तीसरा है बैरागढ़ से कटारा हिल्स।

ये रूट भोपाल के काफी व्यस्त इलाकों से गुजरते हैं। यानी अगर आप इन इलाकों में रहते हैं या रोज आना-जाना करते हैं, तो जल्द ही आपको ई-बस में सफर करने का मौका मिल सकता है।

किन-किन चीजों की होगी जांच

अब बात करते हैं कि आखिर इन बसों में चेक क्या-क्या होगा। यह हिस्सा थोड़ा तकनीकी है, लेकिन समझना आसान है। एक बार फुल चार्ज होने पर बस कितनी दूरी तय कर पाती है, यह देखा जाएगा। ब्रेकिंग सिस्टम कितना भरोसेमंद है, यह भी परखा जाएगा।

जीपीएस ट्रैकिंग सही से काम कर रही है या नहीं, डिजिटल टिकटिंग सिस्टम कैसा चल रहा है, और बस समय पर अपने स्टॉप तक पहुंच रही है या नहीं, इन सब बातों पर भी नजर रखी जाएगी।

साथ ही यह भी देखा जाएगा कि भारी ट्रैफिक में, चढ़ाई वाली सड़कों पर और लगातार चलने की स्थिति में बसें कैसा प्रदर्शन करती हैं। भोपाल में कई इलाके ऐसे हैं जहां चढ़ाई-उतराई काफी है, तो यह टेस्ट काफी अहम माना जा रहा है।