Sports News Without Access, Favor, Or Discretion!

  1. Home
  2. Latest Big News

किराए के मकान में चल रही थी ड्रग्स फैक्ट्री, मऊगंज पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई, रीवा से मुंबई तक हड़कंप


MP Crime News : मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में हाल ही में जो हुआ, उसने सबको चौंका कर रख दिया है। आमतौर पर शांत रहने वाले बिझौली गांव में जब पुलिस का काफिला पहुंचा, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि यहां नशे की एक ऐसी प्रयोगशाला चल रही है, जिसकी धमक मुंबई तक महसूस की जा रही है। शाहपुर थाना क्षेत्र के एक किराए के मकान में चल रही यह एमडी ड्रग्स की फैक्ट्री न केवल अवैध थी, बल्कि यह नशा तस्करी के उस गहरे जाल को भी उजागर करती है, जो आजकल छोटे शहरों की गलियों में भी अपने पैर पसार रहा है। पुलिस की यह छापेमारी कोई इत्तेफाक नहीं थी, बल्कि रीवा जोन के आईजी गौरव राजपूत द्वारा चलाए जा रहे नशा विरोधी अभियान का एक बड़ा हिस्सा थी। बिझौली गांव में स्थित साहू के जिस किराए के मकान को लोग सामान्य समझते थे, वहां अंदर का नजारा किसी फिल्मी दृश्य जैसा था। जब पुलिस ने वहां दबिश दी तो उन्हें बड़ी मात्रा में तैयार एमडी ड्रग्स के साथ-साथ खतरनाक केमिकल, एसिड और लैब में उपयोग होने वाले महंगे उपकरण मिले। यह देखकर साफ था कि अपराधी पूरी प्लानिंग के साथ इस कारोबार को काफी समय से अंजाम दे रहे थे। इस कार्रवाई के दौरान चार लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ चल रही है। पुलिस ने न केवल ड्रग्स और रसायनों का जखीरा जब्त किया है, बल्कि एक फोर-व्हीलर गाड़ी भी बरामद की है, जिसका इस्तेमाल संभवतः माल की ढुलाई के लिए किया जाता रहा होगा। जब्त किए गए ड्रग्स की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है, जो इस बात का सबूत है कि यह कोई छोटा-मोटा धंधा नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक गिरोह का काम है। जांच का दायरा फिलहाल मऊगंज से निकलकर रीवा संभाग और वहां से सीधे मुंबई तक जा पहुंचा है। यह बेहद चिंताजनक है कि कैसे मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में बनी ड्रग्स सीधे देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के नेटवर्क से जुड़ी है। पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार जैन के निर्देशन में मऊगंज पुलिस अब हर उस कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है, जो इस गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुंच सके। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के बाद इस नेटवर्क से जुड़े कई और चेहरों से नकाब हटेगा और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं। पुलिस की यह कामयाबी नशे के खिलाफ छिड़ी जंग में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ये गिरोह इतने दिनों तक प्रशासन की नजरों से बचकर कैसे काम करते रहे? यह घटना एक चेतावनी है कि नशा तस्कर अब अपनी फैक्ट्री और ठिकाने बड़े शहरों से हटाकर छोटे इलाकों में शिफ्ट कर रहे हैं, ताकि किसी को शक न हो। फिलहाल पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी मजबूत कर दी है और गहन जांच जारी है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नेटवर्क के तार और भी दूर तक फैलते नजर आ रहे हैं। मऊगंज की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस अब नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस ड्रग्स सिंडिकेट का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस आगे क्या बड़े खुलासे करती है और इस पूरे रैकेट की जड़ें वास्तव में कितनी गहरी हैं।