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लांजी में EOW की दस्तक से मचा हड़कंप, सहकारी सोसायटी से लेकर बस सेवा तक जांच का दायरा

बालाघाट के लांजी में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की टीम ने गुरुवार सुबह कार्रवाई शुरू की। जानकारी के मुताबिक जबलपुर से पहुंची टीम ने सोसायटी से जुड़े पदाधिकारी और बस कारोबार से जुड़े परिवार के ठिकानों पर जांच शुरू की है।
Balaghat News Today

Mp Big News,Balaghat News Today : बालाघाट जिले के लांजी में गुरुवार सुबह उस समय हलचल बढ़ गई, जब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की टीम जांच के लिए पहुंची। शुरुआती जानकारी के मुताबिक टीम सुबह करीब 6 बजे जबलपुर से लांजी पहुंची और संबंधित ठिकानों पर दस्तावेजों तथा संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू की।

बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई लांजी क्षेत्र के मनेरी सहकारी सोसायटी से जुड़े प्रभारी प्रबंधक विलास चौरे और उनके परिवार से संबंधित ठिकाने पर की जा रही है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार बस कारोबार से जुड़े राजेश चौरे से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं।

EOW की यह कार्रवाई किस शिकायत, जांच या प्रकरण के आधार पर की गई है, इसकी पूरी आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति पर आरोप सिद्ध मानना उचित नहीं होगा।

सुबह 6 बजे जबलपुर से पहुंची EOW की टीम

प्राप्त जानकारी के अनुसार आर्थिक अपराध शाखा की टीम सुबह करीब 6 बजे जबलपुर से लांजी पहुंची। कार्रवाई का नेतृत्व DSP मनजीत सिंह कर रहे हैं। टीम द्वारा संबंधित परिसरों में दस्तावेजों और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच किए जाने की जानकारी है। EOW की जबलपुर इकाई के कार्यक्षेत्र में बालाघाट जिला शामिल है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मध्य प्रदेश शासन की वह जांच एजेंसी है, जिसका काम आर्थिक अपराधों से जुड़ी जानकारी जुटाना और जरूरत पड़ने पर ऐसे मामलों की जांच करना है।

विलास चौरे से जुड़ा है सोसायटी प्रबंधन का काम

स्थानीय जानकारी के मुताबिक जांच विलास चौरे से जुड़े परिसर में चल रही है। बताया गया है कि वे मनेरी सहकारी सोसायटी में प्रभारी प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं।
EOW की कार्रवाई के दौरान सहकारी संस्था से संबंधित रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज, संपत्ति और अन्य संबंधित कागजात की जांच की जा सकती है। हालांकि, जांच में वास्तव में कौन-कौन से दस्तावेज मिले और अधिकारियों ने क्या आपत्तियां दर्ज कीं, इसकी जानकारी आधिकारिक रूप से सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

राजेश चौरे की भर्ती और बस कारोबार भी चर्चा में

सामने आई जानकारी के अनुसार राजेश चौरे की भर्ती संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर हुई थी। इसके बाद उनके नाम से बस कारोबार से जुड़ी गतिविधियों की बात भी सामने आ रही है।बताया गया है कि राजेश चौरे से जुड़े परिवार के पास कई वाहन हैं और बस सेवा का संचालन भी किया जा रहा है। स्थानीय जानकारी में हैदराबाद के लिए बस सेवा चलने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन जानकारियों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस समय उपलब्ध नहीं है। इसलिए वाहनों की संख्या, स्वामित्व और बस सेवा से संबंधित विवरण को जांच के दौरान सत्यापित किया जाना बाकी है।

14 वाहनों के मालिक होने की जानकारी

स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी में बताया गया है कि संबंधित व्यक्ति के नाम से कुल 14 वाहन बताए जा रहे हैं। इनमें 5 बस, 2 ट्रैक्टर, 4 फोर-व्हीलर और 3 मोटरसाइकिल शामिल होने की बात कही गई है।

वाहनों की यह संख्या और उनका वास्तविक स्वामित्व सरकारी रिकॉर्ड से ही निश्चित होगा। EOW की जांच में संपत्ति और वाहन संबंधी दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

सोसायटी की नौकरी से बस कारोबार तक, जांच का फोकस

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर है कि सहकारी संस्था से जुड़े पद पर काम करने वाले व्यक्ति और परिवार से जुड़े निजी कारोबार के बीच आर्थिक गतिविधियों का कोई संबंध है या नहीं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि EOW की जांच का मुख्य आधार क्या है और एजेंसी किन आरोपों या शिकायतों की पड़ताल कर रही है। इसलिए किसी भी संभावित वित्तीय अनियमितता को अभी स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।

जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति के दस्तावेज, वाहन पंजीयन, आय से जुड़े कागजात और संस्था के रिकॉर्ड जैसे दस्तावेजों की जांच की जा सकती है। लेकिन इस कार्रवाई में वास्तव में कौन-कौन से रिकॉर्ड जब्त या जांचे गए, इसकी पुष्टि आधिकारिक बयान के बाद ही होगी।