नकली पेट्रोल और अवैध शराब की फैक्ट्री पकड़ी, 2600 लीटर इथेनॉल समेत भारी सामान जब्त
Mp Big News , Madhya Pradesh News : ग्वालियर में अवैध कारोबार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हाईवे की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मोहना हाईवे पर आबकारी विभाग ने एक मकान में चल रही कथित अवैध शराब और नकली पेट्रोल बनाने की फैक्ट्री पकड़ी है। कार्रवाई के दौरान टीम को बड़ी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ और शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान मिला।
मामला रेहट के पास महाकाल ढाबे से सटे दो कमरों के मकान का है। आबकारी विभाग के मुताबिक, सूचना मिलने के बाद टीम ने मकान की घेराबंदी की और छापा मारा। तलाशी के दौरान जो सामान मिला, उसकी मात्रा ने अधिकारियों को भी चौंका दिया।
2600 लीटर इथेनॉल समेत बड़ी मात्रा में सामान जब्त
छापेमारी में करीब 2600 लीटर ओपी यानी इथेनॉल, 63 बल्क लीटर शराब, 20 ड्रम पेट्रोल और 18 ड्रम थिनर बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, बरामद इथेनॉल से करीब 32 लाख रुपये की शराब तैयार की जा सकती थी।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि मौके से केवल अवैध शराब बनाने से जुड़ी सामग्री नहीं मिली, बल्कि नकली पेट्रोल तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ भी बरामद हुए हैं।
पेट्रोल में थिनर और इथेनॉल मिलाने का आरोप
जांच में सामने आया कि पेट्रोल में थिनर, इथेनॉल और अन्य ज्वलनशील पदार्थ मिलाकर कथित तौर पर नकली पेट्रोल तैयार किया जा रहा था। आबकारी विभाग के अनुसार, इसे हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों को बेचने की बात भी सामने आई है।
अगर जांच में यह आरोप सही साबित होता है तो मामला सिर्फ अवैध बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा। मिलावटी और गलत तरीके से तैयार ईंधन वाहनों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। हालांकि, नकली पेट्रोल की गुणवत्ता, उसकी बिक्री का नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
भारी मात्रा में थिनर मिलने पर पुलिस को भी सौंपा गया
मौके से 18 ड्रम थिनर बरामद होने के बाद इसकी जानकारी पुलिस को भी दी गई है। इतनी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री का एक जगह रखा होना सुरक्षा के लिहाज से भी अहम जांच का विषय बन गया है। आबकारी विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि इस कारोबार में इस्तेमाल होने वाली सामग्री कहां से लाई जाती थी और तैयार माल को कहां भेजा जाता था।
तीन लोगों के नाम सामने आए
आबकारी विभाग के मुताबिक, इस कथित फैक्ट्री को सौरभ गुर्जर, अनिल शर्मा और अरबाज खान मिलकर चला रहे थे। जिस मकान में कार्रवाई हुई, वह अनिल शर्मा का बताया गया है। अधिकारियों की पूछताछ में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी कब से इस गतिविधि में शामिल थे। साथ ही यह जांच भी महत्वपूर्ण है कि तैयार की गई शराब और कथित नकली पेट्रोल की सप्लाई किन इलाकों तक होती थी।
11 महीने पहले भी इसी हाईवे पर पकड़ी गई थी अवैध शराब की फैक्ट्री
इस कार्रवाई का एक अहम पहलू यह भी है कि इसी हाईवे पर करीब 11 महीने पहले भी अवैध शराब बनाने का मामला सामने आया था। 26 अक्टूबर 2025 को इसी इलाके में एक अवैध शराब की फैक्ट्री पकड़ी गई थी।
अब उसी क्षेत्र में दोबारा बड़े स्तर पर अवैध कारोबार मिलने के बाद आबकारी विभाग की निगरानी और कार्रवाई को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। खासकर हाईवे जैसे व्यस्त मार्ग पर इस तरह की गतिविधि लंबे समय तक चलने का दावा जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।
नकली पेट्रोल के नेटवर्क की जांच सबसे अहम
मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित नकली पेट्रोल और अवैध शराब आखिर कहां-कहां पहुंचाई जाती थी। क्या इसका इस्तेमाल सिर्फ स्थानीय स्तर पर होता था या इसके पीछे कोई बड़ा सप्लाई नेटवर्क भी था, इसकी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी।
पूछताछ में यह भी पता लगाने की कोशिश होगी कि बरामद सामग्री कब खरीदी गई, तैयार माल की कितनी मात्रा पहले ही बाहर भेजी जा चुकी थी और इसमें अन्य लोग शामिल थे या नहीं।
चंबल संभाग में मिलावट का लंबा इतिहास
ग्वालियर-चंबल संभाग में मिलावटखोरी का यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी इस इलाके में नकली दूध और नकली मावा बनाने के मामले सामने आ चुके हैं। अब इस सूची में नकली पेट्रोल का नाम भी जुड़ गया है।
यह पैटर्न बताता है कि इलाके में मिलावटखोरों का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जो अलग-अलग समय पर अलग-अलग उत्पादों में मिलावट करता रहा है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना जरूरी होगा कि क्या इन सभी मामलों के पीछे कोई साझा कड़ी है।
