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डिजिटल अरेस्ट के डर से देवास में ₹63.52 लाख की ठगी, फर्जी अफसर बनकर साइबर गिरोह ने बनाया शिकार

MP Cyber Crime

MP Cyber Crime :  देवास में साइबर ठगी का ऐसा नेटवर्क सामने आया है, जिसने देशभर में लोगों को डराकर पैसे ऐंठने का तरीका अपना रखा था। फोन और वीडियो कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताना, मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी देना और फिर जांच के नाम पर खाते में पैसे जमा करवाना यही इस गिरोह का तरीका बताया जा रहा है।

देवास पुलिस ने इस मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से ठगी की रकम में से ₹54 लाख 84 हजार 725 बरामद किए गए हैं। कार्रवाई का दायरा कितना बड़ा था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पुलिस की 19 टीमों ने 17 राज्यों के 33 जिलों में दबिश दी। करीब 127 दिनों तक चले इस अभियान में पुलिसकर्मियों ने लगभग 58,315 किलोमीटर की दूरी तय की।

देवास के एक व्यक्ति से हुई थी ₹63.52 लाख की ठगी

मामला देवास के कोतवाली थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति की शिकायत से सामने आया। पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की थी। पुलिस के अनुसार, साइबर ठगों ने फोन और वीडियो कॉल के जरिए खुद को दूरसंचार विभाग, मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई से जुड़ा अधिकारी बताया।

इसके बाद डर का खेल शुरू हुआ।

पीड़ित को बताया गया कि उसका नाम कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है। गिरफ्तारी की धमकी दी गई और उसे लगातार यह भरोसा दिलाया गया कि वह एक गंभीर जांच में फंस चुका है। ठगों ने वीडियो कॉल के दौरान कथित जांच प्रक्रिया और अदालत जैसा दृश्य भी दिखाया। इसके जरिए पीड़ित और उसके परिवार से बैंकिंग तथा निवेश से जुड़ी जानकारी हासिल की गई। फिर जांच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। पुलिस के अनुसार, इस पूरे तरीके से पीड़ित से ₹63.52 लाख की साइबर ठगी हुई।

बैंक खाते की एक-एक लेयर खंगालकर आरोपियों तक पहुंची पुलिस

शिकायत मिलने के बाद देवास पुलिस ने अपराध क्रमांक 192/2026 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने बैंक ट्रांजेक्शन, खाताधारकों की जानकारी, मोबाइल नंबर, बैंक स्टेटमेंट और सीसीटीवी फुटेज जैसे तकनीकी साक्ष्यों को जांच का आधार बनाया।

साइबर ठगी में पैसा अक्सर सीधे मुख्य आरोपी के खाते में नहीं जाता। रकम कई खातों से होकर आगे बढ़ाई जा सकती है। इस मामले में भी पुलिस ने बैंकिंग लेन-देन की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ते हुए संदिग्ध खातों की पड़ताल की। एक खाते से दूसरे खाते तक पहुंचते हुए जांच टीम अलग-अलग राज्यों में मौजूद संदिग्धों तक पहुंची। इसी जांच के दौरान पुलिस को कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क का पता चला।

17 राज्यों के 33 जिलों में पहुंची देवास पुलिस

यह कार्रवाई सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रही। पुलिस टीमों ने राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कुल 17 राज्यों में कार्रवाई की। कुल 33 जिलों में पुलिस टीमों ने दबिश दी।

इस अभियान में 70 पुलिसकर्मियों को शामिल करते हुए 19 टीमें बनाई गई थीं। 127 दिनों तक चली कार्रवाई के दौरान टीमों ने करीब 58,315 किलोमीटर की दूरी तय की।
यानी देवास से शुरू हुई जांच को आरोपियों तक पहुंचाने के लिए पुलिस को देश के अलग-अलग हिस्सों तक जाना पड़ा।

12 आरोपी गिरफ्तार, लाखों रुपये और डिजिटल सामान जब्त

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में भूराराम राव, भालाराम मेघवाल, नाजिम खान, हर्षवर्धन साई नरसिंह वर्मा, वैभव शुक्ला, मुकराला मेघा अविनाश, आयुष गुप्ता, केयूर कुमार, कमल कांति, मोहम्मद अब्दुल्ला, अनिल कुमार और गिरीश कुमार येलेंटी शामिल हैं।

पुलिस ने आरोपियों से कुल ₹54,84,725 बरामद किए हैं। उपलब्ध पुलिस जानकारी के मुताबिक मोहम्मद अब्दुल्ला के पास से करीब ₹21 लाख, गिरीश कुमार से ₹11.20 लाख, अनिल कुमार से ₹6 लाख, कमल कांति से ₹3.20 लाख और नाजिम खान से ₹4 लाख बरामद किए गए। एक आरोपी से चेकबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन भी जब्त किया गया।