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बालाघाट में पहली बार नक्सल मुक्त माहौल में स्वतंत्रता दिवस, पूर्व नक्सली भी फहराएंगे तिरंगा,गांवों में दिखा बदलाव

Balaghat News

 

Balaghat News : बालाघाट के जंगलों में कभी बंदूक और डर की चर्चा होती थी। अब वही इलाका तिरंगे, स्कूल और सामान्य जिंदगी की तस्वीर दिखा रहा है। मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित रहे बालाघाट में इस साल 15 अगस्त का स्वतंत्रता दिवस समारोह इसलिए खास है, क्योंकि दिसंबर 2025 में जिले के नक्सलवाद से मुक्त घोषित होने के बाद यह पहला स्वतंत्रता दिवस है।

स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले पुलिस अधिकारियों की टीम उन गांवों तक पहुंची, जहां कभी नक्सली गतिविधियों का असर रहा था। इस दौरे में हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके 11 पूर्व नक्सली भी शामिल रहे। पुलिस अधिकारियों और पूर्व नक्सलियों का गांवों में साथ पहुंचना अपने आप में इस बदलाव की एक अलग तस्वीर पेश करता है।

इस दौरान आईजी ललित शाक्यवार, डीआईजी विनीत कुमार जैन और एसपी आदित्य मिश्रा समेत पुलिस अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। बालाघाट जिला प्रशासन की मौजूदा जानकारी में भी यही अधिकारी पुलिस नेतृत्व में दर्ज हैं।

दिसंबर 2025 में बदली थी बालाघाट की तस्वीर

बालाघाट में नक्सलवाद का प्रभाव अचानक खत्म नहीं हुआ। इसके पीछे वर्षों की सुरक्षा कार्रवाई, स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों के अभियान तथा आत्मसमर्पण की प्रक्रिया रही है। दिसंबर 2025 में आखिरी सक्रिय नक्सलियों में शामिल दीपक और रोहित के आत्मसमर्पण के बाद मध्य प्रदेश को नक्सलवाद मुक्त घोषित किया गया था। आकाशवाणी की रिपोर्ट के मुताबिक, 11 दिसंबर 2025 को दोनों ने आत्मसमर्पण किया और इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को नक्सलवाद मुक्त घोषित किया। उस समय बालाघाट पुलिस ने भी जिले में सक्रिय नक्सली नहीं बचे होने की बात कही थी।

इससे पहले नवंबर-दिसंबर 2025 में कई नक्सलियों के आत्मसमर्पण से अभियान को निर्णायक गति मिली थी। विभिन्न रिपोर्टों में उस दौर में हुए सामूहिक आत्मसमर्पणों का उल्लेख मिलता है। यानी 2026 का स्वतंत्रता दिवस सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। यह उस इलाके के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक बनकर सामने आ रहा है।

जिन गांवों में कभी डर का असर था, वहां पहली बार तिरंगा

पुलिस के इस विशेष दौरे में पालागोंदी, हर्रानाला, कुंआगोंदी, कोद्दापार, चौरिया और मुंडा जैसे गांवों का उल्लेख सामने आया है। इन इलाकों में तिरंगा फहराने की गतिविधियां इस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बनीं।

दक्षिण बैहर क्षेत्र की पाथरी पंचायत के चुक्काटोला में भी पुलिस अधिकारियों ने ध्वजारोहण किया। इस गांव का नाम इसलिए भी चर्चा में रहा है क्योंकि यह कभी कुख्यात माओवादी मिलिंद तेलतुंबड़े से जुड़ा हुआ बताया जाता था।

यह बदलाव केवल प्रतीकात्मक नहीं है। नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा की मौजूदगी के साथ शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाना भी लंबे समय में भरोसा कायम करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

पूर्व नक्सलियों के साथ गांवों में पहुंची पुलिस

इस दौरे का सबसे अलग पहलू रहा कि पुलिस अधिकारियों के साथ आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नक्सली भी गांवों में गए। राशिमेटा की संगीता और संपत तथा पालागोंदी के दीपक जैसे स्थानीय नाम पहले नक्सली गतिविधियों के संदर्भ में सामने आते रहे हैं। दिसंबर 2025 में बालाघाट के नक्सल मुक्त होने की प्रक्रिया में इन स्थानीय चेहरों के आत्मसमर्पण की भूमिका भी रिपोर्ट हुई थी।

अब इनका गांवों में पुलिस अधिकारियों के साथ पहुंचना एक अलग संदेश देता है—हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन में लौटना संभव है।

संगीता को महाराष्ट्र पुलिस और संपत को छत्तीसगढ़ पुलिस की सुरक्षा में कार्यक्रम तक लाया गया, जबकि दीपक ने बालाघाट पुलिस के साथ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। सुरक्षा कारणों से ऐसे लोगों की आवाजाही स्वाभाविक रूप से पुलिस निगरानी में होती है।