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वन विभाग के क्लर्क के घर सुबह-सुबह छापा, अलमारी से निकली करोड़ों की जायदाद

Mandla EOW Raid News

Mandla EOW Raid News  : मंडला के इंदिरा वार्ड नंबर-2 में बुधवार सुबह का माहौल अचानक बदल गया। सुबह के छह बजे थे, जब जबलपुर की आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो यानी EOW की गाड़ियां वन विभाग में पदस्थ क्लर्क श्वेतांक चौरसिया के मकान के सामने आकर रुकीं। पड़ोसियों को कुछ समझ आता, इससे पहले ही 14 सदस्यीय टीम घर के भीतर जांच में जुट चुकी थी। घंटों चली तलाशी के बाद जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने पूरे इलाके में हलचल मचा दी।

शिकायत से शुरू हुई पूरी कहानी

EOW जबलपुर को लंबे समय से श्वेतांक चौरसिया की आय से कहीं ज्यादा संपत्ति जुटाने की शिकायतें मिल रही थीं। शुरुआती पड़ताल में जब यह शिकायत सही पाई गई, तब जाकर टीम ने छापे की योजना बनाई। जांच एजेंसी ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(b) और 13(2) के तहत अपराध क्रमांक 0/26 दर्ज किया है। दो अलग-अलग टीमों ने घंटों तक घर के कोने-कोने की छानबीन की, दस्तावेज खंगाले और संपत्ति का ब्योरा तैयार किया।

घर की तलाशी में क्या-क्या निकला

सबसे बड़ा खुलासा खुद मकान को लेकर हुआ, जिसकी कीमत करीब 1.50 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा घर से नगद पांच लाख रुपये और घरेलू सामान के रूप में लगभग 25 लाख रुपये का सामान बरामद हुआ। सोने के जेवर जिनका वजन 85 ग्राम है, उनकी कीमत करीब 13 लाख रुपये बताई जा रही है, जबकि पौने तीन किलो से ज्यादा चांदी के जेवर भी छह लाख रुपये के आसपास आंके गए हैं।

जांच में एक दुकान का भी पता चला जिसकी कीमत करीब 51.50 लाख रुपये है। इसके साथ एक फोर व्हीलर गाड़ी, जिसकी कीमत आठ लाख रुपये है, और दो मोटरसाइकिलें भी संपत्ति की सूची में शामिल हैं। इन सभी को मिलाकर अब तक की जांच में कुल 2.48 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति सामने आ चुकी है, जो आरोपी की ज्ञात आय से करीब 290 प्रतिशत ज्यादा बताई जा रही है।

टीम को यह भी पता चला कि चौरसिया और उनके परिवार के नाम पर अलग-अलग बैंक शाखाओं में पांच खाते चल रहे हैं। इन खातों में कितनी रकम जमा है, इसका सही आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है, यानी असल आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा भी हो सकता है।

बीस साल पहले मिली थी नौकरी, अब पत्नी का पार्लर भी घेरे में

जानकारी के अनुसार श्वेतांक चौरसिया को करीब 20 साल पहले अनुकंपा नियुक्ति के आधार पर वन विभाग में नौकरी मिली थी। एक मामूली शुरुआत से इतनी बड़ी संपत्ति तक का सफर ही अब EOW की जांच के केंद्र में है।

 


तलाशी के दौरान टीम को एक और अहम सुराग मिला, चौरसिया की पत्नी का ब्यूटी पार्लर चल रहा था। EOW का कहना है कि इस कारोबार की जानकारी सरकार को नहीं दी गई थी। इतना ही नहीं, जांच में पार्लर से जुड़े आयकर रिटर्न, नगर निगम पंजीयन या MSME पंजीयन से संबंधित कोई दस्तावेज भी बरामद नहीं हो सके, जिससे इस कारोबार की वैधता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

आगे की जांच पर टिकी निगाहें

फिलहाल EOW की टीम सभी दस्तावेजों और बैंक खातों की बारीकी से पड़ताल कर रही है। बैंक खातों में जमा राशि सामने आने के बाद अनुपातहीन संपत्ति का आंकड़ा और बढ़ सकता है। मध्यप्रदेश में सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए EOW लगातार ऐसी कार्रवाइयां कर रही है, और मंडला का यह मामला भी इसी मुहिम की एक कड़ी माना जा रहा है। स्थानीय लोगों में भी इस बात को लेकर चर्चा है कि एक छोटे पद पर बैठे कर्मचारी के पास इतनी बड़ी जायदाद कैसे जमा हो गई।