Mohan Yadav Cabinet : भोपाल के मंत्रालय में
मंगलवार, 2 जून 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक ने राज्य के लाखों ग्रामीणों के जीवन में एक बड़ा बदलाव लाने का निर्णय लिया है। इस बैठक में सरकार ने निर्णय लिया कि मध्य प्रदेश में 'स्वामित्व योजना' के तहत आने वाले करीब 48 लाख पट्टाधारियों को अब सरकार की ओर से बाकायदा रजिस्टर्ड दस्तावेज यानी मालिकाना हक के पक्के कागजात सौंपे जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया के लिए सरकार 3800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च करेगी, जिससे राज्य के ग्रामीण इलाकों में संपत्ति के अधिकार को लेकर स्थिति बिल्कुल साफ हो जाएगी और लोगों के लिए आर्थिक तरक्की के रास्ते खुलेंगे।
अब बैंक लोन के लिए नहीं भटकना पड़ेगा
राज्य के एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक ग्रामीणों को पट्टे के जो प्रमाण पत्र दिए गए थे, वे बैंक लोन लेने के लिए पर्याप्त नहीं थे। अक्सर देखा गया कि जब भी कोई ग्रामीण अपने घर या जमीन पर बैंक से कर्ज लेने की कोशिश करता, तो पट्टों की अनिश्चितता के कारण उसे बैंक से निराशा हाथ लगती थी। सरकार ने इस समस्या की गहराई को समझा है। केंद्र सरकार की 'स्वामित्व योजना' के तहत ड्रोन कैमरों के जरिए पहले ही अधिकार क्षेत्रों की सीमाएं तय कर ली गई थीं और प्रदेश के करीब 48 लाख 32 हजार पट्टाधारियों की पहचान पूरी हो चुकी है। अब उन सभी को पक्के और कानूनी रूप से रजिस्टर्ड दस्तावेज दिए जाएंगे, जिससे उन्हें बैंक से लोन मिलने में कोई बाधा नहीं आएगी।
सारा खर्च उठाएगी सरकार
यह फैसला न केवल पट्टाधारियों को मालिकाना हक देगा, बल्कि उनके वित्तीय बोझ को भी कम करेगा। मंत्री काश्यप ने स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया में होने वाला पंजीयन शुल्क, पंचायतों का उपकर और अन्य सरकारी शुल्क का भुगतान खुद राजस्व विभाग करेगा। सरकार इस कार्य पर 3800 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च करने जा रही है। https://twitter.com/CMMadhyaPradesh/status/2061721037201707509 इस निर्णय का सीधा मतलब है कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को अब अपने घर के कागजात बनवाने के लिए अपनी जेब से एक भी पैसा नहीं खर्च करना पड़ेगा। यह कदम राज्य सरकार की लोक कल्याणकारी नीतियों को दर्शाता है, जिसमें आम आदमी की आर्थिक मजबूती को प्राथमिकता दी गई है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान
विशेषज्ञों का मानना है कि घर की जमीन पर रजिस्टर्ड मालिकाना हक मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में एक नई तरह की आर्थिक गतिविधि शुरू होगी। जब किसी व्यक्ति के पास अपनी संपत्ति के वैधानिक दस्तावेज होते हैं, तो उसकी क्रेडिट वैल्यू बढ़ती है। अब ग्रामीण इन दस्तावेजों का उपयोग अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने, बच्चों की पढ़ाई या घर के जरूरी कार्यों के लिए बैंक लोन लेने में कर सकेंगे। मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम गांव-गांव तक वित्तीय साक्षरता और पहुंच को बढ़ाने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। https://twitter.com/CMMadhyaPradesh/status/2061721037201707509 कैबिनेट के इस निर्णय से न केवल जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में भी पारदर्शिता आएगी। आने वाले दिनों में जब पट्टाधारियों को उनके रजिस्टर्ड दस्तावेज मिलना शुरू होंगे, तो इससे ग्रामीण अंचल में खुशहाली का एक नया अध्याय शुरू होगा। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि इस पूरी प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाया जाए ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। यह फैसला राज्य के विकास में एक मजबूत आधारशिला साबित होगा।