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वह खुद को बताता था इनकम टैक्स का अफसर, बैग खुलते ही पुलिस के उड़ गए होश; आखिर क्या था इस हाईटेक चोर का राज?

Indore Crime

इंदौर के पलासिया थाना क्षेत्र में एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है जहां बीटेक की डिग्री रखने वाला और इनकम टैक्स विभाग में काम कर चुका एक युवा ऑनलाइन ट्रेडिंग का कर्ज चुकाने के लिए शातिर चोर बन गया।

Indore Crime : इंदौर की पुलिस का तो जवाब नहीं! शहर में इन दिनों एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। मामला पलासिया थाना इलाके का है, जहां पुलिस ने एक ऐसे शातिर चोर को दबोचा है जो आम चोरों की तरह नहीं, बल्कि पूरे हाईटेक तरीके से हाथ साफ करता था। अब आप सोच रहे होंगे कि चोर भला कितना पढ़ा-लिखा होगा? तो भाई, ये जनाब कोई आम लुटेरे नहीं, बल्कि बाकायदा मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लिए बैठे हैं।

जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना। इस हाईटेक चोर का नाम प्रतीक लिखार है और इसकी उम्र बत्तीस साल है। पकड़ने के बाद जब पुलिस ने इसकी कुंडली खंगाली, तो पता चला कि यह भाई साहब तो नोएडा में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट यानी आयकर विभाग में टैक्स असिस्टेंट की नौकरी भी कर चुके हैं। अब आप खुद ही सोचिए कि जो बंदा सरकारी महकमे में रह चुका हो, वह चोरी के धंधे में उतरेगा तो तरीके भी वैसे ही खतरनाक ही अपनाएगा।

ऑनलाइन ट्रेडिंग का चक्कर और सिर पर कर्ज का पहाड़

आखिर एक पढ़ा-लिखा इंसान चोर क्यों बन गया? इसकी भी एक पूरी कहानी है। साहब को ऑनलाइन ट्रेडिंग का चस्का लग गया था। ट्रेडिंग की दुनिया ऐसी है कि अच्छे-अच्छों को सड़क पर ले आती है। प्रतीक भाई ने भी इसमें खूब हाथ आजमाया और सिर पर भारी कर्ज लाद लिया। जब चारों तरफ से उधारी वालों ने घेर लिया, तो नौकरी छोड़कर इंदौर वापस लौट आए।

इंदौर आने के बाद इन्होंने शॉर्टकट अपनाया और शहर के पॉश इलाकों को अपना निशाना बनाना शुरू किया। भंवरकुआं, राऊ, राजेंद्र नगर, गीता भवन, पलासिया, बॉम्बे हॉस्पिटल और चोइथराम जैसे इलाकों में जितने भी छात्र हॉस्टल और पीजी में रहते हैं, प्रतीक उन्हीं के कमरों को खंगालने लगा। कभी किसी का लैपटॉप पार, तो कभी टैबलेट और मोबाइल साफ।

चैटजीपीटी का ऐसा इस्तेमाल, अच्छे-अच्छे खा जाएं धोखा

इस चोर का शातिर दिमाग यहीं नहीं थमता था। चोरी करने के बाद सामान को खपाने के लिए यह गजब का जुगाड़ लगाता था। आज के जमाने का एआई टूल यानी चैटजीपीटी का इस्तेमाल कर यह फ्लिपकार्ट और लोटस जैसे बड़े ब्रांड्स के एकदम असली जैसे दिखने वाले फर्जी बिल तैयार कर लेता था। कोई ग्राहक या दुकानदार यह देखकर कभी सोच ही नहीं सकता था कि बिल जाली है।

फर्जी बिल हाथ में होते ही यह शातिर इंदौर के सिल्वर मॉल, यशवंत प्लाजा और डॉलर मार्केट जैसी जगहों पर पहुंच जाता था और बड़े आराम से चोरी का माल बेच देता था। लोगों को लगता था कि बिल पक्का है तो माल भी चोरी का नहीं होगा। इस तरह से यह शातिर लंबे समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंकता आ रहा था।

खुद को समझने लगा था इनकम टैक्स का बड़ा अफसर

पुलिस भी कम चालाक नहीं थी। पलासिया पुलिस लगातार सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही थी और मुखबिर तंत्र को एक्टिव कर रखा था। बीस जुलाई को बड़वानी प्लाजा के पास पुलिस को एक संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिया। जब उसे रोककर पूछताछ की गई, तो भाई साहब ने रोब दिखाने की कोशिश की। उसने पुलिस पर धौंस जमाते हुए खुद को इनकम टैक्स का बड़ा अधिकारी बता दिया ताकि पुलिस डर जाए।

लेकिन खाकी का डंडा जब पड़ा तो सारा रोब हवा हो गया। पुलिस ने जब उसका बैग चेक किया तो उसमें ताले तोड़ने के लिए हाइड्रोलिक रॉड, रीबार कटर और पेचकस जैसे औजार मिले। फिर क्या था, थाने लाकर जब थोड़ी सख्ती से पूछताछ की गई, तो प्रतीक ने सारे राज उगल दिए और अपनी जुबानी पूरी कहानी बयां कर दी।

पुलिस की आगे की कार्रवाई जारी

पुलिस ने इस हाईटेक चोर के कब्जे से जब माल समेटा तो आंखें फटी की फटी रह गईं। इसके पास से इक्कीस लैपटॉप, चार टैबलेट, चार मोबाइल फोन और दो महंगी घड़ियां बरामद हुईं। जब्त किए गए पूरे सामान की कुल कीमत करीब तेरह लाख रुपये आंकी गई है।

फिलहाल पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस शातिर ने और कहां-कहां हाथ मारा है और इसके साथ कौन-कौन से स्थानीय दुकानदार या लोग मिले हुए थे जो इस चोरी का माल खरीदते थे। इंदौर पुलिस की यह कार्रवाई वाकई काबिले तारीफ है जिसने एक पढ़े-लिखे शातिर मुजरिम को उसके ही हाईटेक हथकंडों के साथ धर दबोचा।