Honeymoon Murder Case : सोनम रघुवंशी ने खुद जेल जाने का रास्ता चुना, वो भी सिर्फ छह दिन में
Honeymoon Murder Case : कभी-कभी अदालत के फैसले इतनी जल्दी हकीकत बन जाते हैं कि सुनने वाला भी चौंक जाता है। मेघालय के मशहूर हनीमून मर्डर केस में यही हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते का वक्त दिया था, और सोनम रघुवंशी ने महज छह दिन में सरेंडर कर दिया।
इंदौर की सोनम रघुवंशी अब दोबारा जेल की सलाखों के पीछे हैं। बुधवार को शिलांग की अदालत में उसने खुद को पुलिस के हवाले किया। इससे पहले लगभग तीन महीने वो जमानत पर बाहर थी।
आखिर हुआ क्या था
23 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सोनम की जमानत रद्द कर दी थी। कोर्ट ने साफ कहा था कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कोई बड़ी खामी नहीं थी, इसलिए इतने गंभीर मामले में जमानत बनाए रखना ठीक नहीं। अदालत ने सरेंडर के लिए तीन हफ्ते का समय दिया था, लेकिन सोनम ने इंतजार करने के बजाय जल्दी ही अदालत का रुख कर लिया।
ईस्ट खासी हिल्स के एसपी विवेक सिएम ने इसकी पुष्टि की है। उनके मुताबिक सोनम ने खुद अदालत में हाजिर होकर सरेंडर किया, जिसके बाद उसे तुरंत न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
कहानी की शुरुआत मई 2025 से
ये पूरा मामला शुरू होता है मई 2025 से। 12 मई को राजा रघुवंशी और सोनम की शादी हुई थी। शादी के करीब नौ दिन बाद, 20 मई को दोनों इंदौर से मेघालय हनीमून के लिए रवाना हुए।
शिलांग और सोहरा की खूबसूरत वादियों में घूमते हुए दोनों ने नोंगरियाट गांव के मशहूर डबल डेकर लिविंग रूट ब्रिज को भी देखा। 23 मई की सुबह दोनों ने होमस्टे से चेकआउट किया। दोपहर करीब पौने दो बजे सोनम ने अपनी मां से आखिरी बार बात की। इसके बाद दोनों के फोन बंद हो गए।
कुछ दिन बाद राजा का क्षत-विक्षत शव ईस्ट खासी हिल्स जिले में एक झरने के पास मिला। पूरे देश में ये खबर सुर्खियों में छा गई। सोनम कई दिन बाद उत्तर प्रदेश में मिली, जिसके बाद पुलिस ने उसे मेघालय ले जाकर पूछताछ शुरू की।
पुलिस की जांच में क्या निकला
मेघालय पुलिस ने महीनों की जांच के बाद 700 से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट अदालत में पेश की। इसमें इलेक्ट्रॉनिक सबूत, कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज और गाइड के बयान शामिल किए गए। पुलिस का दावा रहा कि हत्या की साजिश पहले से रची गई थी और सोनम के कथित प्रेमी राज कुशवाहा समेत कई और लोग भी इसमें शामिल थे।
जांच पूरी होने तक सोनम करीब दस महीने शिलांग जेल में बंद रही। इसी दौरान अप्रैल 2026 में शिलांग की अदालत ने गिरफ्तारी में प्रक्रियागत खामियां बताते हुए उसे जमानत दे दी थी।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
मेघालय सरकार को ये जमानत रास नहीं आई और उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मगर 29 जून को मेघालय हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची।
सुप्रीम कोर्ट में जुलाई के पहले हफ्ते से लगातार सुनवाई चली। कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ कागजी गलती की वजह से इतने गंभीर अपराध में जमानत देना सही नजरिया नहीं है। आखिरकार 23 जुलाई को कोर्ट ने जमानत रद्द करते हुए सरेंडर का आदेश सुना दिया।
राजा के परिवार की प्रतिक्रिया
राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने इस फैसले पर राहत जताई है। उन्होंने न्यायपालिका और जांच एजेंसियों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है ट्रायल जल्द पूरा होगा और दोषियों को सख्त सजा मिलेगी। परिवार पिछले एक साल से इंसाफ के इंतजार में है।
