Sports News Without Access, Favor, Or Discretion!

  1. Home
  2. Latest Big News

Hydrogen Train India : भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जींद से सोनीपत तक शुरू होगा नया सफर, जानिए क्यों है यह रेल तकनीक देश के लिए खास


Hydrogen Train India : भारत का रेलवे नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में गिना जाता है। अब इसी नेटवर्क में एक ऐसी तकनीक जुड़ने जा रही है, जो आने वाले वर्षों में रेल यात्रा की तस्वीर बदल सकती है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच शुरू होने जा रही है। यह सिर्फ एक नई ट्रेन नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक परिवहन की दिशा में भारत का बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर तय योजना के अनुसार संचालन शुरू होता है, तो भारत हाइड्रोजन ईंधन से यात्री ट्रेन चलाने वाले दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा। इससे पहले जर्मनी, फ्रांस, चीन और स्वीडन इस तकनीक का सफल उपयोग कर चुके हैं।

जींद से सोनीपत तक चलेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन

नई हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच करीब 89 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इस सफर में लगभग दो घंटे का समय लगेगा। ट्रेन में कुल 10 कोच होंगे और इसकी अधिकतम रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन रास्ते में 14 स्टेशनों पर रुकेगी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक किराया भी आम लोगों की पहुंच में रखा गया है और यह लगभग 5 रुपये से 25 रुपये के बीच होगा। यही वजह है कि इस परियोजना को सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि आम यात्रियों के लिए भी अहम पहल माना जा रहा है।

112 करोड़ रुपये की परियोजना, पूरी तैयारी के साथ

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना पर करीब 112 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस राशि में केवल ट्रेन तैयार करना ही शामिल नहीं है, बल्कि पूरे हाइड्रोजन इकोसिस्टम को विकसित किया गया है। जींद में हाइड्रोजन उत्पादन, सुरक्षित स्टोरेज और आधुनिक रीफ्यूलिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं। ट्रेन का डिजाइन और इंटीग्रेशन चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में किया गया है। वहीं हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम विकसित करने में मेधा सर्वो ड्राइव्स और ग्रीनएच इलेक्ट्रोलिसिस जैसी भारतीय कंपनियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

जींद में बना देश का पहला हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग प्लांट

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ ट्रेन नहीं, बल्कि उसका पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर भी है। जींद रेलवे स्टेशन के पास देश का पहला हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग प्लांट तैयार किया गया है। यहां इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक के जरिए पानी से प्रतिदिन लगभग 430 किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन बनाई जाएगी। प्लांट में करीब 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन स्टोर करने की क्षमता होगी। वहीं ट्रेन में एक बार में लगभग 440 किलोग्राम हाइड्रोजन भरी जा सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इसी तरह के रीफ्यूलिंग स्टेशन दूसरे रेल मार्गों पर भी विकसित किए जा सकते हैं।

एक बार फ्यूल भरने पर 356 किलोमीटर तक चलेगी ट्रेन

रेलवे की योजना के अनुसार यह ट्रेन एक बार हाइड्रोजन भरने के बाद लगभग 356 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है। रोजाना दो फेरे लगाने के दौरान करीब 300 किलोग्राम हाइड्रोजन की खपत होने का अनुमान है। इससे बार-बार ईंधन भरने की जरूरत कम होगी और संचालन भी अधिक व्यवस्थित रहेगा।