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IMD Monsoon Update : मध्य प्रदेश में मानसून की उल्टी गिनती शुरू, जानिए आपके जिले में कब होगी पहली बारिश


IMD Monsoon Update : मध्य प्रदेश में जून के दूसरे सप्ताह के साथ ही मानसून को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। प्रदेश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हैं, जिसके कारण कहीं बारिश, कहीं तेज आंधी और कहीं गरज-चमक देखने को मिल रही है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के कई हिस्सों में आगे बढ़ चुका है और महाराष्ट्र तक पहुंच गया है। अब नजर मध्य प्रदेश पर है, जहां 14 से 20 जून के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में मानसून की दस्तक की संभावना जताई जा रही है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ सक्रिय मौसम प्रणालियों के कमजोर पड़ने से मानसून की गति फिलहाल धीमी हुई है, जिससे प्रदेश के कई इलाकों में गर्मी और उमस एक बार फिर बढ़ सकती है। IMD के नवीनतम अपडेट के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में प्रवेश करने के बाद महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों तक अपनी पहुंच बना ली है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। देश के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश, तेज हवाओं और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों के लिए चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून का आगे बढ़ना केवल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी पर निर्भर नहीं करता। इसके साथ पश्चिमी विक्षोभ, निम्न दबाव क्षेत्र और ऊपरी वायुमंडलीय परिसंचरण जैसी प्रणालियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस समय प्रदेश के आसपास सक्रिय कुछ प्रणालियां अपेक्षाकृत कमजोर हुई हैं। यही कारण है कि प्री-मानसून बारिश तो जारी है, लेकिन व्यापक और लगातार मानसूनी बारिश का इंतजार अभी बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में नमी की आपूर्ति बढ़ती है तो मानसून तेजी से आगे बढ़ सकता है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में पिछले दिनों हुई बारिश ने तापमान में गिरावट दर्ज कराई है। कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इससे किसानों, शहरी आबादी और जल संकट झेल रहे क्षेत्रों को अस्थायी राहत मिली है। हालांकि मौसम विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले कुछ दिनों के लिए गर्मी और उमस में वृद्धि हो सकती है। यह स्थिति विशेष रूप से मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश के हिस्सों में महसूस की जा सकती है। पारंपरिक रूप से मध्य प्रदेश में मानसून का प्रवेश दक्षिण-पूर्वी हिस्सों से होता है। इस बार भी जबलपुर संभाग और उससे जुड़े जिलों को मानसून की शुरुआती बारिश मिलने की संभावना जताई जा रही है। https://twitter.com/Indiametdept/status/2064641179887808907 मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जैसे जिलों में सबसे पहले मानसूनी प्रभाव दिखाई दे सकता है। इसके बाद बारिश का दायरा धीरे-धीरे मध्य, पश्चिमी और उत्तरी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ेगा। वर्तमान मौसम संकेतों और उपलब्ध पूर्वानुमानों के आधार पर मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में मानसून की संभावित एंट्री का अनुमान इस प्रकार है 14 से 16 जून के बीच बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन और बड़वानी में मानसूनी गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। 15 से 17 जून के दौरान बालाघाट, मंडला और सिवनी में बारिश का दायरा बढ़ सकता है। 16 से 18 जून के बीच जबलपुर, छिंदवाड़ा और डिंडोरी में मानसून पहुंचने की संभावना है। 17 से 19 जून के दौरान नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। 18 से 20 जून के बीच भोपाल, रायसेन, सीहोर और विदिशा मानसूनी प्रभाव में आ सकते हैं। 18 से 21 जून के दौरान इंदौर, उज्जैन और देवास में मानसून सक्रिय हो सकता है। 22 से 25 जून के बीच ग्वालियर-चंबल और रीवा-सतना संभाग तक मानसून पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री अब केवल कुछ दिनों की दूरी पर दिखाई दे रही है। फिलहाल प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हैं और मौसम लगातार बदल रहा है। अगले एक सप्ताह में मानसून की प्रगति, स्थानीय वर्षा और तापमान के रुझान प्रदेश के मौसम की दिशा तय करेंगे। https://twitter.com/Indiametdept/status/2064635552570462221

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जून को केरल तट से प्रवेश करने के बाद महज छह दिनों में 16 राज्यों तक पहुंच चुका है। बुधवार सुबह तक मानसून मुंबई क्षेत्र में सक्रिय हो गया, जिससे पश्चिमी भारत में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार मानसून फिलहाल महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को कवर कर चुका है। अगले चार से पांच दिनों के दौरान इसके महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के शेष क्षेत्रों में आगे बढ़ने की संभावना है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की वर्तमान प्रगति सामान्य स्थिति के करीब बनी हुई है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार मिल रही नमी के कारण मध्य और पूर्वी भारत में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इसका असर मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी जिलों पर भी दिखाई देने की संभावना है, जहां मानसून की पहली बारिश का इंतजार किया जा रहा है।