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Indore Honey Trap Part 2 : सुपर कॉरिडोर की वो रात, करोड़ों की उगाही और सियासत का 'काला' नेटवर्क


Indore Honey Trap Part 2 : मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर एक बार फिर 'हनी ट्रैप' के शोर से दहल उठी है। साल 2019 के उस चर्चित कांड की यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि 'हनी ट्रैप पार्ट-2' ने प्रदेश के गलियारों में खलबली मचा दी है। इस बार कहानी सिर्फ चंद वीडियो की नहीं, बल्कि एक ऐसे खतरनाक सिंडिकेट की है जिसमें पुलिस का नेटवर्क, राजनीति के रसूखदार और हाई-प्रोफाइल महिलाएं शामिल हैं। इंदौर क्राइम ब्रांच की एसआईटी (SIT) ने अब तक 7 लोगों को सलाखों के पीछे भेज दिया है, लेकिन चर्चा है कि यह तो सिर्फ 'ट्रेलर' है पूरी फिल्म में अभी कई बड़े सफेदपोश चेहरों के नाम आने बाकी हैं।

कैसे शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का यह नया खेल?

इस पूरे मामले की परतें तब खुलीं जब इंदौर के शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर ने हिम्मत जुटाकर पुलिस का दरवाजा खटखटाया। हितेंद्र का आरोप था कि उन्हें निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर 1 करोड़ रुपये की मांग की जा रही थी। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी अलका दीक्षित ने कारोबारी से नजदीकी बढ़ाई और फिर उन्हें इंदौर के पॉश 'सुपर कॉरिडोर' इलाके में बुलाया गया। वहां न सिर्फ उनके साथ मारपीट की गई, बल्कि कारोबार में हिस्सेदारी न देने पर वीडियो लीक करने की धमकी दी गई। यहीं से पुलिस को इस संगठित गैंग की भनक लगी।

जेल में रची गई 'हनी ट्रैप-2' की साजिश

क्राइम ब्रांच की जांच में जो सबसे बड़ा खुलासा हुआ, वो था 2019 के हनी ट्रैप कांड से कनेक्शन। सूत्रों के मुताबिक, साल 2019 की मुख्य आरोपी श्वेता विजय जैन और इस नए मामले की आरोपी अलका दीक्षित की मुलाकात जेल में हुई थी। बताया जा रहा है कि जेल की सलाखों के पीछे ही इन दोनों ने नए नेटवर्क का ब्लूप्रिंट तैयार किया। जेल से बाहर आने के बाद इसी नेटवर्क ने बड़े नेताओं, अफसरों और कारोबारियों को टारगेट करना शुरू कर दिया।

यूपीएससी एस्पिरेंट से 'मास्टरमाइंड' बनी रेशु चौधरी

इस पूरे केस में सागर की रेशु उर्फ अभिलाषा चौधरी की गिरफ्तारी सबसे ज्यादा चर्चा में है। रेशु कोई साधारण अपराधी नहीं है; वह पहले दिल्ली में रहकर यूपीएससी (UPSC) की तैयारी कर चुकी है। पुलिस जांच के अनुसार, रेशु अपनी वाकपटुता और राजनीतिक सक्रियता का इस्तेमाल कर रसूखदार लोगों के करीब पहुंचती थी। वह सागर में भाजपा के एक सांगठनिक विंग में पदाधिकारी भी रह चुकी है। उसका काम बड़े लोगों से संपर्क साधना और उन्हें नेटवर्क के जाल में फंसाना था।

खाकी का 'काला' हाथ: हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा

हैरानी की बात यह है कि इस गैंग को कानूनी दांव-पेंच और पुलिसिया कार्रवाई से बचाने के लिए इंटेलिजेंस विंग का हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा ढाल बनकर खड़ा था। विनोद पर आरोप है कि वह गैंग को बताता था कि पुलिस की नजरों से कैसे बचना है और अगर मामला बिगड़े तो कानूनी रूप से कैसे खुद को सुरक्षित रखना है। एक पुलिसकर्मी की इस संलिप्तता ने विभाग की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

दिल्ली आईबी की एंट्री और इंटरस्टेट नेटवर्क

इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली की इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने भी इंदौर क्राइम ब्रांच से संपर्क साधा है। जांच में संकेत मिले हैं कि इस गैंग के तार सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि दिल्ली, गुजरात और छत्तीसगढ़ तक फैले हुए हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से जब्त मोबाइल, लैपटॉप और पेन ड्राइव को फॉरेंसिक लैब भेजा है। आशंका है कि इन डिजिटल उपकरणों में कई बड़े नेताओं और रसूखदारों के 'आपत्तिजनक' वीडियो हो सकते हैं।

क्राइम ब्रांच द्वारा गठित एसआईटी की कार्रवाई

क्राइम ब्रांच द्वारा गठित एसआईटी (SIT) फिलहाल सात आरोपियों अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप, लाखन चौधरी, जितेंद्र पुरोहित, श्वेता विजय जैन, विनोद शर्मा और रेशु चौधरी से पूछताछ कर रही है। कोर्ट ने रेशु और विनोद को 25 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। विशेषज्ञों का क्या कहना है? साइबर एक्सपर्ट्स और जांच अधिकारियों का मानना है कि 'हनी ट्रैप' के मामलों में अब डिजिटल फुटप्रिंट्स सबसे बड़ा हथियार बन गए हैं। अपराधी क्लाउड स्टोरेज और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं ताकि सबूत मिटाए जा सकें। हालांकि, इंदौर पुलिस इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती और डिजिटल डेटा के जरिए पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी में है।