Sports News Without Access, Favor, Or Discretion!

  1. Home
  2. Latest Big News

जबलपुर बरगी बांध क्रूज हादसा: हाई कोर्ट पहुंची दूसरी जनहित याचिका, एसआईटी जांच और लापरवाही के बड़े आरोप


  • जबलपुर के बरगी बांध क्रूज हादसे को लेकर हाई कोर्ट में दूसरी जनहित याचिका दायर की गई है।
  • सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पा तिवारी की इस याचिका में पूरे मामले की जांच के लिए आईजी स्तर की एसआईटी (SIT) गठन की मांग की गई है।
  • याचिका में आरोप है कि मौसम विभाग के 'येलो अलर्ट' के बावजूद क्रूज का संचालन किया गया।
  • हादसे के बाद सबूत मिटाने की नीयत से क्रूज को जल्दबाजी में डिस्मेंटल करने पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
Jabalpur Bargi Dam Cruise Accident : मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के प्रसिद्ध बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे के मामले में अब कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पा तिवारी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में इस हादसे को लेकर एक नई जनहित याचिका (PIL) दायर की है। इस याचिका में राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन और मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि मौसम विभाग के येलो अलर्ट के बावजूद क्रूज का संचालन किया गया, जो पर्यटकों की सुरक्षा के साथ एक बड़ा खिलवाड़ था। अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस महानिरीक्षक (IG) स्तर के अधिकारियों की निगरानी में एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की गई है, जिस पर अगले हफ्ते हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है।

येलो अलर्ट को किया दरकिनार, क्यों चली मौत की सवारी?

याचिका में सीधे तौर पर प्रशासन और क्रूज संचालकों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया गया है। पुष्पा तिवारी का कहना है कि जिस दिन यह हादसा हुआ, उस दिन मौसम विभाग ने पहले ही क्षेत्र के लिए येलो अलर्ट जारी कर रखा था। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और संचालकों ने यात्रियों की सुरक्षा को पूरी तरह से ताक पर रख दिया। खराब मौसम और तेज हवाओं के बीच पर्यटकों से भरे क्रूज को बांध के गहरे पानी में भेजना महज एक हादसा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर गंभीर लापरवाही का मामला है।

क्रूज को जल्द डिस्मेंटल करने पर उठे सवाल

इस याचिका में एक और बेहद गंभीर और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। हादसे के तुरंत बाद क्रूज को बहुत जल्द डिस्मेंटल (खोलने या हटाने) कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने इस त्वरित कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है और पूछा है कि आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? क्या इसके पीछे हादसे से जुड़े असली सबूतों को नष्ट करने की कोई कोशिश थी? याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन इस पूरे मामले में जिम्मेदार रसूखदार लोगों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। यही वजह है कि अब मामले की जांच किसी स्थानीय एजेंसी के बजाय आईजी स्तर के अधिकारियों की कमेटी से कराने की मांग की जा रही है।

कोर्ट में अगले हफ्ते सुनवाई, पहले भी दर्ज हो चुके हैं मामले

बरगी बांध क्रूज हादसे की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक व्यवस्था का रुख पहले से ही कड़ा रहा है। इससे पहले जिला अदालत ने खुद इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था और पुलिस को इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट दर्ज करने के सख्त आदेश दिए थे। इसके अलावा, भोपाल के रहने वाले कमल कुमार राठी भी इस हादसे को लेकर हाई कोर्ट में पहली जनहित याचिका दायर कर चुके हैं। अब पुष्पा तिवारी की इस नई याचिका के बाद हाई कोर्ट ने इसे अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि हाई कोर्ट इस गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक मिलीभगत के आरोपों पर क्या कड़ा रुख अपनाता है।